इंडियन इकोनॉमी को झटका! Goldman Sachs ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटाया

ब्रोकरेज फर्म गोल्‍डमैन सैक्‍स ने भारत के आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटा दिया है.

ब्रोकरेज फर्म गोल्‍डमैन सैक्‍स ने भारत के आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटा दिया है.

हर दिन तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के कारण पूरे देश में सख्त लॉकडाउन (Lockdown) की मांग जोर पकड़ने लगी है, हालांकि, आर्थिक नुकसान को देखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Government) ने अभी तक इस कदम से परहेज किया है. गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने एक रिपोर्ट में कहा कि लॉकडाउन का असर साल 2020 के मुकाबले कम है.

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नई दिल्ली. अमेरिका की ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसके चलते कई राज्यों व शहरों में लागू लॉकडाउन के मद्देनजर वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) के अनुमान को 11.7 फीसदी से घटाकर 11.1 फीसदी कर दिया है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus in India) की दूसरी लहर भयानक रूप ले चुकी है. संक्रमण की चपेट में आने से अब तक 2.22 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हर दिन संक्रमण के 3.5 लाख से ज्‍यादा नए मामले सामने आ रहे हैं.

'भारत के प्रमुख शहरों में पाबंदियों का असर दिखना शुरू'

हर दिन तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के कारण पूरे देश में सख्त लॉकडाउन (Lockdown) की मांग जोर पकड़ने लगी है, हालांकि, आर्थिक नुकसान को देखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Government) ने अभी तक इस कदम से परहेज किया है. गोल्डमैन सैक्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि लॉकडाउन का असर साल 2020 के मुकाबले कम है. फिर भी भारत के प्रमुख शहरों में सख्त पाबंदियों का असर साफ दिखाई दे रहा है. शहरों में सख्त लॉकडाउन से सेवाओं (Service Sector) पर असर पड़ा है. इसके अलावा बिजली की खपत (Power Consumption) और अप्रैल में विनिर्माण पीएमआई (Manufacturing PMI) के स्थिर रहने से विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं.

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जुलाई-सितंबर 2021 में तेजी लौटने की जताई है उम्‍मीद

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, अधिकांश संकेतक अभी भी बता रहे हैं कि पिछले साल दूसरी तिमाही यानी अप्रैल-जून 2020 के मुकाबले इस बार असर कम पड़ा है. ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि तीसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर 2021 में तेजी लौटने की उम्मीद है, क्योंकि तब प्रतिबंध (Restrictions) कुछ हद तक कम हो सकते हैं. गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि ऐसे हालात में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर 11.1 फीसदी रह सकती है, जबकि पहले इसके 11.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था.
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