राहुल बजाज के उठाए सवालों पर बेटे ने कहा- सार्वजनिक मंच पर ऐसे मुद्दे उठाना पसंद नहीं

बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज (Rahul Bajaj) के उठाए मुद्दों पर उनके बेटे राजीव बजाज से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, वह (राहुल) ऐसा मौका पसंद करते हैं, जबकि मैं कॉरपोरेट से जुड़े कार्यक्रम में कोई ऐसा संवेदनशील मुद्दा पसंद नहीं करता.
बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज (Rahul Bajaj) के उठाए मुद्दों पर उनके बेटे राजीव बजाज से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, वह (राहुल) ऐसा मौका पसंद करते हैं, जबकि मैं कॉरपोरेट से जुड़े कार्यक्रम में कोई ऐसा संवेदनशील मुद्दा पसंद नहीं करता.

बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज (Rahul Bajaj) के उठाए मुद्दों पर उनके बेटे राजीव बजाज से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'वह (राहुल) ऐसा मौका पसंद करते हैं, जबकि मैं कॉरपोरेट से जुड़े कार्यक्रम में कोई ऐसा संवेदनशील मुद्दा पसंद नहीं करता.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2019, 2:31 PM IST
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नई दिल्ली. बजाज ऑटो (Bajaj Auto) के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज (Rajiv Bajaj) और उनके पिता राहुल बजाज (Rahul Bajaj) की कई बड़े मुद्दों पर अक्सर राय अलग होती है. हाल ही में ईटी अवॉर्ड्स में सीनियर बजाज यानी कि राहुल की टिप्पणियों ने सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इससे उनके बेटे राजीव खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि सार्वजनिक मंच से ऐसे मुद्दे उठाना उन्हें पसंद नहीं.

द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, जब राजीव बजाज से यह पूछा गया कि राहुल बजाज की सरकार पर  टिप्पणियों ने काफी ध्यान खींचा है, तो उन्होंने कहा, 'वह ऐसा मौका पसंद करते हैं, जबकि मैं कॉरपोरेट से जुड़े कार्यक्रम में कोई ऐसा संवेदनशील मुद्दा पसंद नहीं करता. वह हमेशा इसे लेकर निडर रहते हैं और लोग इसके लिए उन्हें पसंद करते हैं. हालांकि इसमें उन्हें किसी का साथ नहीं मिलता और लोग दूर से ही उनके लिए तालियां बजाते रहते हैं.'

बजाज ऑटो (Bajaj Auto) के एमडी राजीव ने यह भी कहा कि उनका बिजनेस ऐसा नहीं है, जिसके लिए उन्हें सरकार से बहुत अधिक बातचीत करनी पड़े. उन्होंने हाल ही में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के साथ बातचीत की है. वे नितिन गडकरी और पीयूष गोयल से भी पहले मिले हैं. राजीव का कहना है, 'ये सभी लोग जानते हैं कि मेरे इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी जैसे विशेष मुद्दों पर उनके साथ मतभेद रहे हैं.'



हालांकि खुद राजीव भी फरवरी 2017 में मुंबई में नैस्कॉम के एक इवेंट में नोटबंदी को लेकर सरकार की आलोचना कर चुके हैं. इस पर उनका कहना है, 'मैंने इसका इस्तेमाल एक आइडिया के नाकाम होने और उसे लागू करने के बीच के अंतर के उदाहरण के तौर पर दिया था. इसकी गलत व्याख्या कर इसे नोटबंदी की बुराई कहा गया था. मेरे बहुत से शुभचिंतकों ने मुझे चेतावनी दी थी कि इससे मुझे और बजाज ऑटो को मुश्किल हो सकती है. कुछ लोगों ने यहां तक कहा था कि सरकार हमारी क्वाड्रिसाइकिल को स्वीकृति नहीं देगी. लेकिन जो हुआ वह इसके उलट था. मैंने गडकरी और कांत से मिलने का समय मांगा और उन्होंने मेरी बात को ध्यान से सुना और हमें एक वर्ष के अंदर स्वीकृति मिल गई जो सरकार के पास आठ वर्षों से अटकी थी.'
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