ऑर्गेनिक सब्जियां बेचकर ये हर महीने कमाती हैं 3 लाख रुपये

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रहने वाली पदमावती 40-60 हजार रुपये लगाकर ऑर्गेनिक खेती के जरिये उगाई सब्जियों को 3 लाख रुपये तक में बेचती हैं. आइए जानें इसके बारे में...

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रहने वाली पदमावती 40-60 हजार रुपये लगाकर ऑर्गेनिक खेती के जरिये उगाई सब्जियों को 3 लाख रुपये तक में बेचती हैं. आइए जानें इसके बारे में...

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रहने वाली पदमावती 40-60 हजार रुपये लगाकर ऑर्गेनिक खेती के जरिये उगाई सब्जियों को 3 लाख रुपये तक में बेचती हैं. आइए जानें इसके बारे में...

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 21, 2018, 11:53 AM IST
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रहने वाली पद्मावती हफ्ते के आखिरी तीन दिन बहुत व्यस्त रहती हैं. शुक्रवार से लेकर रविवार तक वह अपनी सब्जियों को इकट्ठा कर बाजार ले जाती हैं, या फिर उन्हें खरीदने के लिए ग्राहक उनके घर पर आते हैं. सबसे पहले सब्जियों की क्वालिटी  को चेक किया जाता है. एक बार में वह 40-60 हजार रुपये खर्च कर सब्जियां और ऑर्गेनिक दालें उगाती हैं. इसके बाद उन्हें बाजार में ले जाकर 2-3 लाख रुपये में बेच देती हैं. आइए जानें उनके बिजनेस मॉडल को...

ऑर्डर के हिसाब से होती है खेती- पद्मावती ने न्यूज18 हिंदी से खास बातचीत में बताया है कि उनके पास होटल्स, अपार्टमेंट्स के अलावा कई जगहों से सब्जियों के ऑर्डर आते हैं. वे उसी हिसाब से सब्जियां उगाती हैं और उन्हें मार्केट लेकर जाती हैं.





फिर होती है टेस्टिंग- खेत में सब्जियों को लाने के बाद ग्राहक उन्हें टेस्ट करते हैं. अगर उनके स्वाद में फर्क होता है तो ग्राहक खरीदने से मना कर देता है. इसके अलावा उन्हें कई और तरीकों से टेस्ट किया जाता है, ताकि केमिकल का पता चल सके. पद्मावती ने बताया कि शुरुआत में उनके कुछ ऑर्डर कैंसिल भी हो गए थे, इसीलिए अब हमेशा वो क्वालिटी को लेकर ज्यादा ध्यान रखती हैं.
40-60 हजार रुपये तक आती है लागत- ऑर्गेनिक सब्जियों या फिर दालों को उगाने में 40-60 हजार रुपये तक की लागत आती है. हालांकि, मानसून में ज्यादा बारिश होने पर सब्जियां खराब हो जाती हैं. इन्हें बचाने के लिए अलग से नए काम करने पड़ते हैं. हालांकि, बाजार में इन्हें बेचने पर हर महीने 2-3 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है.



लागत कम करने के लिए उठाते हैं ये कदम- हम जैविक तरीके से सब्जी तैयार करने के लिए बैक्टीरिया बनाते हैं, जिससे पौधों को उसका भोजन पर्याप्त मात्रा में मिल सके. यहीं बैक्टीरिया पौधों को उनका पोषक तत्व देता है. जैविक खेती में सबसे बड़ा काम यही होता, बैक्टीरिया को बनाना. इस बैक्टीरिया से पौधों को नाइट्रोजन भी प्राप्त होता है और नाइट्रोजन के लिए कोई दूसरी दवा भी नही डालनी पड़ती है.  जैविक खेती करने से लगभग 80 फीसदी लागत कम हो जाती है. इसमें गोबर, गौमूत्र सब घर से ही मिल जाता है, जो कि हमारी काफी बचत करता है.

जैविक खेती के बारे में जानिए


जैविक खेती क्या है- जैविक खेती पुरानी विधि से की जाने वाली खेती है, जो भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है, पर्यावरण की शुद्धता को बनाए रखती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाती है, इसमें केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है और कम लागत में गुणवत्तापूर्ण पैदावार होती है. जैविक खेती में रासायनिक उर्वरको, रासायनिक कीटनाशकों तथा खरपतवारनाशकों की बजाय गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, हरी खाद, वैक्टीरिया कल्चर, जैविक खाद और जैविक कीटनाशकों इत्यादि से खेती की जाती है.

जैविक खेती के फायदा
(1) जैविक खेती से न केवल भूमि की उर्वरक शक्ति बनी रहती है, बल्कि उसमें वृद्धि भी होती है.
(2) इस पद्धति से पर्यावरण प्रदूषण रहित होता है.
(3) जैविक खेती में कम पानी की आवश्यकता होती है जैव खेती पानी का संरक्ष्ण करती है.
(4) इस खेती से भूमि की गुणवत्ता बनी रहती है या सुधार होता रहता है.
(5) यह किसान के पशुधन के लिए भी बहुत महत्व रखती है और अन्य जीवों के लिए भी.
(6) फसल अवशेषों को नष्ट करने की आवश्यकता नही होती है.
(7) उत्तम गुणवत्ता की पैदावार का होना.
(8) इससे से लोगों की सेहत ठीक रहती हैं.ऑ
(9) कृषि में सहायक जीव न केवल सुरक्षित होंगे बल्कि उनमें बढ़ोतरी भी होगी.
(10) इसमें कम लगती आती है और मुनाफा ज्यादा होता है.

भारत में जैविक खेती
एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया भर में साढ़े तीन करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि पर करीब 14 लाख उत्पादक जैविक खेती कर रहे हैं. कृषि भूमि का करीब दो तिहाई हिस्सा घास वाली भूमि है. फसल का क्षेत्र करीब 82 लाख हेक्टेयर है, जो कुल जैविक कृषि भूमि का एक चौथाई है. भारत में 2003-04 में जैविक खेती को लेकर गंभीरता दिखाई गई और 42,000 हेक्टेयर क्षेत्र से जैविक खेती की शुरुआत हुई. मार्च 2010 तक यह बढ़ कर करीब 11 लाख हेक्टेयर हो गया.

जैविक खाद कैसे तैयार करें
भारत में पहले से ही गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद और जैविक खाद का प्रयोग विभिन्न फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है. जैविक खाद बनाने के लिए पौधों के अवशेष, गोबर और जानवरों का बचा हुआ चारा आदि सभी वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए. जैविक खाद बनाने के लिए 10 फुट लम्बा, 4 फुट चौड़ा और 3 फुट गहरा गड्ढा करना चाहिए. सभी जैविक पदार्थो को मिलाकर गड्ढे में भरना चाहिए और उपयुक्त पानी डाल देना चाहिए. गड्ढे में पदार्थों को 30 दिन बाद अच्छी तरह पलटना चाहिए और उचित मात्रा में नमी रखनी चाहिए. यदि नमी कम हो तो पलटते समय पानी डाला जा सकता है. पलटने की क्रिया से जैविक पदार्थ जल्दी सड़ते है, और खाद में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है. इस तरह तीन महीनें में जैविक खाद बन कर तैयार हो जाती है.

ज्यादा जानकारी के लिए सरकार की वेबसाइट: http://ncof.dacnet.nic.in/ पर जा सकते हैं

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