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VIDEO: बैंक में जमा है कैश तो जान लीजिए ये बदला हुआ नियम, RBI ने लिया फैसला

बैंक में जमा कैश को लेकर एक नियम में बड़ा बदलाव हुआ है. नए बदलाव के मुताबिक, अब बैंक में उस पैसे पर कम ब्याज मिलेगा जिस ...अधिक पढ़ें

    बैंक में जमा कैश को लेकर एक नियम में बड़ा बदलाव हुआ है. नए बदलाव के मुताबिक, अब बैंक में उस पैसे पर कम ब्याज मिलेगा, जिसका कोर्इ दावेदार नहीं है. बैंक इस पैसे को डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीर्इएएफ) में ट्रांसफर कर देते हैं. इन खातों में जमा पैसे पर 3.5 फीसदी की दर से साधारण ब्याज मिलेगा.

    यह नियम एक जुलार्इ, 2018 से लागू हैं. अभी तक यह ब्याज दर 4 फीसदी है. आपको बता दें कि हाल में जारी हुई  रिपोर्ट में कहा गया था कि बैंक खातों में जमा बिना दावे वाली रकम रिकॉर्ड 8,000 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गर्इ है. कड़े केवार्इसी नियमों के कारण इन फंड्स को निकालना मुश्किल हो गया है. अक्सर यह रकम खाताधारक की मौत के कारण इनमें रह जाती है. यह रकम तभी निकल पाती है जब मृतक के परिवार का कोर्इ सदस्य उस रकम पर दावा साबित कर लेता है.

    नया नियम- खातें में जमा जिस पैसे पर दावा नहीं किया जाता है, उसे डीर्इएएफ में ट्रांसफर करते समय बैंक को डिपॉजिटर या दावेदार को एक निश्चित दर पर ब्याज देना पड़ता है. इसे भारतीय रिजर्व बैंक तय करता है. यह रकम तभी दी जाती है, जब इस पैसे का दावेदार सामने आता है. अभी ब्याज की दर सालाना 4 फीसदी है. लेकिन, आगे जाकर यह घटकर सालाना 3.5 फीसदी रह जाएगी. अगर कोर्इ पैसे पर दावा नहीं करता है तो भी डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में पैसे को ट्रांसफर करने पर बैंक यह ब्याज देते हैं.

    दस साल खत्म होने के बाद भी डिपॉजिटर अपनी रकम पर क्लेम कर सकता है. उसे अपने खाते को ऑपरेट करने की भी आजादी है. फिर भले ही उसके खाते में जमा पैसे को डीर्इएएफ में ट्रांसफर कर दिया गया हो. बैंक खाताधारक को उसके खाते में जमा पैसे का भुगतान करने के लिए बाध्य है. वह फंड से इस तरह की रकम का रिफंड करने के लिए कहता है.

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    कब ये बैंक खाते होते हैं लावारिस -नियमों के अनुसार, जब बैंक में खुले किसी खाते को दस साल तक ऑपरेट नहीं किया जाता है तो उसमें जमा रकम बिना दावे वाली मान ली जाती है. इसे डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में जमा कर दिया जाता है. दस साल खत्म होने के तीन महीने पहले ये पैसे इस फंड में डाले जाते हैं.

    बैंकों में पड़े हैं लावारिस 8000 करोड़ रुपये- रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि इस तरह के करीब 2.63 करोड़ खाते हैं, जिनमें 8864.6 करोड़ रुपये की बिना दावे वाली रकम पड़ी है. यह स्थिति दिसंबर 2016 तक की है. दिलचस्प यह है कि 2012 से 2016 के बीच बिना दावे वाली रकम में दोगुने की बढ़ोतरी हुर्इ है.

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    Tags: Bank interest rate, Decreasing interest rates

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