इकोनॉमी में रिकवरी के संकेत, फरवरी में 6.6 फीसदी रहा बैंक क्रेडिट ग्रोथ रेट

लोग बैंक से जितना कर्ज लेते हैं बैंक क्रेडिट ग्रोथ उतनी ही ज्यादा बढ़ती है

लोग बैंक से जितना कर्ज लेते हैं बैंक क्रेडिट ग्रोथ उतनी ही ज्यादा बढ़ती है

केयर रेटिंग्स (CARE Ratings) की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 फरवरी को खत्म हुए पखवाड़े में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 6.6 फीसदी रहा, जबकि प्री-कोविड टाइम में यह 6.5 से 7.2 फीसदी के बीच था.

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नई दिल्ली. देश की इकोनॉमी (Economy) अब कोरोना के प्रभाव से बाहर आने लगी है. इकोनॉमी में रिकवरी होने के संकेत मिलने लगे हैं. दरअसल, अब ज्यादा लोग बैंकों से लोन ले रहे हैं और बैंक क्रेडिट ग्रोथ (Bank Credit Growth) में अब सुधार होने लगा है. फरवरी, 2021 में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 6.6 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल यह 6.4 फीसदी था. कोविड-19 के कारण अप्रैल 2020 में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 5.26 फीसदी पर आ गई थी.

क्या है बैंक क्रेडिट ग्रोथ
बैंक क्रेडिट ग्रोथ का मतलब बैंकों द्वारा कंपनियों, बिजनेसमैन या आम लोगों को दिए जाने वाले उधार से है. यानी लोन में ग्रोथ क्रेडिट तब बढ़ता है जब इंडस्ट्रियल रिफॉर्म होते हैं. लोग बैंक से जितना कर्ज लेते हैं बैंक क्रेडिट ग्रोथ उतनी ही ज्यादा बढ़ती है. केयर रेटिंग्स (CARE Ratings) की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 फरवरी को खत्म हुए पखवाड़े में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 6.6 फीसदी रहा, जबकि प्री-कोविड टाइम में यह 6.5 से 7.2 फीसदी के बीच था.

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दिसंबर तिमाही में बैंकों ने 105 लाख करोड़ रुपये के लोन बांटे


रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर, 2020 को खत्म हुई तिमाही में देश के बैंकों ने कुल 105 लाख करोड़ रुपये के लोन बांटे थे. वहीं 29 जनवरी को खत्म पखवाड़े में भी भी इतनी ही राशि के लोन दिए गए थे. लेकिन 12 फरवरी को खत्म पखवाड़े में बैंकों द्वारा लोन बांटने की राशि बढ़कर 107 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. जनवरी, 2021 में एग्रीकल्चर से जुड़े सेक्टर्स को बैंकों से 9.5 फीसदी लोन मिले. वहीं, रिटेल सेगमेंट को कुल लोन का 29 फीसदी, इंडस्ट्रियल सेक्टर को 29.6 फीसदी और सर्विस सेक्टर को 28 फीसदी लोन मिला.

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क्रेडिट ग्रोथ का आम लोगों पर असर
बैंक क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट का मतलब है कि लोग बैंक से कर्ज नहीं ले रहे हैं. ऐसे में बैंक ग्राहकों को लुभाने के लिए लोन की ब्याज दरों में कटौती करते हैं या लोन प्रोसेस फीस भी माफ कर देते हैं. बैंक क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट का ही नतीजा है कि होम लोन अब तक के सबसे कम ब्याज पर दिया जा रहा है. हालांकि इसका नुकसान भी है. क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट और बैंक डिपॉजिट बढ़ने पर बैंक जमा योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में कटौती करते हैं. वहीं, बैंक क्रेडिट ग्रोथ में तेजी आने पर बैंक सेविंग्स और डिपोजिट पर इंटरेस्ट रेट बढ़ा देते हैं, लेकिन लोगों को लोन महंगा यानी अधिक ब्याज दर पर मिलता है.
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