अब ऐसे मिलेगा सरकारी बैंक से लोन, जानिए क्‍या है सरकार का प्‍लान

अब ऐसे मिलेगा सरकारी बैंक से लोन, जानिए क्‍या है सरकार का प्‍लान
बदल सकती हैै सरकारी बैंकों से लोन लेने की प्रक्रि‍या

आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में कहा गया है कि GSTN की तर्ज पर ही PSBN भी तैयार किया जाए. इसी के आधर पर यह तय होगा कि ग्राहक को लोन दिया जाएगा या नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 31, 2020, 4:21 PM IST
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नई दिल्ली. बजट पेश होने से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 (Economic Survey 2019-20) आज जारी कर दिया गया है. इसी आर्थिक सर्वेक्षण में बैंकों में होने वाले फ्रॉड (Bank Fraud) को रोकने के लिए एक खास प्रस्ताव लाया गया है. इस प्रस्ताव के मुताबिक, वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) के तर्ज पर पीएसीबी नेटवर्क (PSBN) लाने का प्रस्ताव है ताकि मशीन लर्निंग (Machine Learning) और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से बैंकों में होने वाले फ्रॉड को रोका जा सके. इस पब्लिक सेक्टर नेटवर्क को लेकर सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगर कोई ग्राहक लोन लेना चाहता है तो उनका वेरिफिकेशन उद्योग आधार कार्ड (Aadhaar Card) और इनकम टैक्स​ डिपार्टमेंट (Department of Income Tax) द्वारा किया जाएगा. इस सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस बैंकों को यह सुविधा प्रदान कर सकेंगे कि उनके मौजूद डेटासेट को समझ सकें. आमतौर पर इंसानों द्वारा यह काम लगभग नामुमकिन है.

इन 4 पार्टिसिपेंट्स को किया जाएगा शामिल
आर्थिक सर्वेक्षण में PSBN को लेकर प्रमुख तौर पर चार पार्टिसिपेंट को शामिल करने का प्रस्ताव है. इसमें पहले UIDAI और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जैसी पहचान वेरिफाई करने वाली एजेंसी, अकाउंट एग्रीगेटर्स, क्रेडिट के बारे में जानकारी देने वाली एजेंसी और कोई फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी होगी. अकाउंट एग्रीगेटर की मदद से ग्राहक के बैंकिंग डेटा को एक्सेस किया जाएगा. यह डेटा सरकारी बैंक में सभी अकाउंट का होगा. क्रेडिट एजेंसी ग्राहक के क्रेडिट के बारे में जानकारी देगी. इसके लिए डेटा सरकारी बैंक के स्‍टेटमेंट, जीएसटी फाइलिंग और टैक्‍स रिटर्न के आधार पर होगी. वहीं, फिनटेक की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग के जरिए सभी डेटा की स्‍क्रीनिंग होगी.

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अब सवाल है कि इस सर्वेक्षण के मुताबिक पीएसबीएन काम कैसे करेगा. जब ग्राहक किसी भी सरकारी बैंक में लोन लेने के लिए पहुंचेगा और लोन की रकम के बारे में जानकारी देगा. साथ ही, उसे इस बात की भी जानकारी देनी होगी कि वो किस प्रकार का लोन लेना होता है. यह किसी आम लोने की सबसे शुरूआती प्रक्रिया होती है.

KYC वेरिफिकेशन: ग्राहक द्वारा लोन के बारे में जानकारी प्राप्‍त करने के बाद बैंक इसे KYC वेरिफिकेशन एजेंसी के पास भेज देगा. यह अथॉरिटी ग्राहके KYC वेरिफिकेशन करेगी. यह वेरिफिकेशन ग्राहक के आधार और इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के पास मौजूद जानकारी के आधार पर की जाएगी.



डेटा कलेक्‍शन: अगले स्‍टेप में विभिन्‍न स्‍त्रोत से जानकारी जुटाई जाएगी. यह डेटा अकाउंट एग्रीगेटर्स और सरकारी सोर्सेज का होगा. इस प्रक्रिया में सरकारी बैंक ग्राहक से अनुमति लेने के बाद उनका बैंकिंग डेटा एक्‍सेस करेगा. इसमें टेलिकॉम प्रोवाइडर या हैंडसेट भी शामिल किए जा सकते हैं.

लोन प्रोविजन: अगली प्रक्रिया में केवाइसी पूरा होने के बाद, सिस्‍टम ये तय करेगा कि क्‍या ग्राहक को लोन दिया जा सकता है या नहीं. यानी क्‍या ग्राहक लोन दिए जाने के योग्‍य है. इसी प्राप्‍त जानकारी के आधार पर यह भी तय किया जाएगा कि अगर ग्राहक को लोन दिया जाएगा तो कितनी रकम दी जाएगी.

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