21 जून को BoB बेचेगा 46 एनपीए अकाउंट, जानें किन ग्राहकों का नाम है इस लिस्ट में


बैंक ऑफ बड़ौदा

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बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) फंसे कर्ज खातों (NPA Account) को बेचने जा रहा है. इन खातों के जरिए बैंक बैंक करीब 597.41 करोड़ रुपये की वसूली करेगा.

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नई दिल्ली: बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता रखने वालों के लिए जरूरी खबर है. अगर आपका भी खाता है तो ध्यान दें... ये सरकारी बैंक 46 खातों की बिक्री करने जा रहा है. बता दें जिन ग्राहकों ने अपने कर्ज का भुगतान नहीं किया है बैंक उन खातों की बिक्री करेगा. ये बिक्री नीलामी के जरिए की जाएगी. इन फंसे कर्ज खातों (NPA Account) से बैंक करीब 597.41 करोड़ रुपये की वसूली करेगा. बैंक की ओर से अधिसूचना जारी कर इस बारे में जानकारी दी गई है.

आपको बता दें ऑनलाइन नीलामी के जरिए इन खातों की बिक्री की जाएगी. इन अकाउंट्स को नकद में असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी), बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थाओं के हाथों बेच सकता है. बैंक ने बताया कि नीलामी की प्रक्रिया 21 जून को होनी है.

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किन खातों की होगी बिक्री
आपको बता दें एनपीए खातों को बिक्री में शामिल प्रमुख खातों में मीना ज्वेल्स एक्सपोर्ट एण्ड मीणा ज्वेलर्स एक्सपोर्ट का खाता है, जिसमें 60.76 करोड़ रुपये का बकाया है. इसके साथ ही क्रयस्टल केबल इंडस्ट्रीज 57.49 करोड़ रुपये, जे आर फूड्स लिमिटेड 41.60 करोड़ रुपये, श्री रघुवंशी फाइबर 27.38 करोड़ रुपये, कनेरी एग्रो इंडस्ट्रीज 24.69 करोड रुपये, मैन टुबिनोक्स 24.28 करोड़ रुपये और आर्यान्स एजूकेशनल एण्ड चेरीटेबल ट्रस्ट 20.79 करोड़ रुपये के बकाये वाले खाते भी शामिल हैं.

इस संबंध में आशय पत्र सौंपने की अंतिम तिथि 19 जून रखी गई है. बैंक ने कहा है कि रुचि पत्र की जांच परख का काम उसी दिन पूरा कर लिया जाएगा. बैंक की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी के प्रावधानों का पालन करते हुए बोली लगाने वाले को एक हलफनामा भी देना होगा. जिसमें वे पुष्टि करेंगे कि किसी भी तरह से प्रमोटर के परिवार या खाते से जुड़े हुए नहीं है.

बैंक ने कहा कि बिक्री के तहत किसी भी खाते में प्राप्त या प्राप्त होने वाला ईसीजीसी / सीजीटीएमएसई दावा उसके पास रखा जाएगा. ये एआरसी/ बैंक/ एनबीएफसी या एफआई को नहीं सौंपा जाएगा. मालूम हो कि निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) एक सरकारी स्वामित्व वाली संस्था है जो भारतीय निर्यातकों को निर्यात ऋण बीमा सहायता प्रदान करती है.



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क्या होता है NPA Account?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक यदि किसी बैंक लोन की किस्त या लोन 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाया जाता तो उसे नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) मान लिया जाता है. अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है. यानी अगर किसी लोन की ईएमआई लगातार तीन महीने तक न जमा की जाए तो बैंक उसे एनपीए घोषित कर देते हैं. एनपीए का मतलब यह है कि बैंक उसे फंसा हुआ कर्ज मान लेते हैं. एनपीए बढ़ना किसी बैंक की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता.

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