SBI के बाद इस सरकारी बैंक ने ब्याज दर घटाया, सभी तरह के लोन हुए सस्ते

BOI ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.15 फीसदी की कटौती की है. MCLR की नई दरें 10 अगस्त यानी शनिवार से लागू होंगी.

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 1:29 PM IST
SBI के बाद इस सरकारी बैंक ने ब्याज दर घटाया, सभी तरह के लोन हुए सस्ते
BOI ने ब्याज दर घटाया, सभी तरह के लोन हुए सस्ते
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Updated: August 8, 2019, 1:29 PM IST
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बाद सरकारी बैंक बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने ग्राहकों को तोहफा दिया है. BOI ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.15 फीसदी की कटौती की है. MCLR की नई दरें 10 अगस्त यानी शनिवार से लागू होंगी. बता दें कि रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को द्वारा लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की है. RBI ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटाया. रेपो रेट में कटौती के बाद सबसे पहले SBI ने ब्याज दरें घटाने की घोषणा की थी.

MCLR घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी से अब तक रेपो दरों में 1.10 फीसदी की कटौती की है. उसने भी बैंकों से इसका लाभ जल्द से जल्द ग्राहकों को हस्तांतरित करने के लिए कहा है.

कितना सस्ता हुआ लोन
कटौती के बाद अब 1 साल अवधि वाले कर्ज के लिए MCLR 8.50 फीसदी हो गई. बैंक के एक दिन और एक माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर घटकर क्रमश: 8.10 फीसदी और 8.20 फीसदी हो गई. बैंक के तीन माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.15 फीसदी घटकर क्रमश: 8.35 फीसदी और 8.40 फीसदी रह गई. ये भी पढ़ें: अब इन शहरों में खरीद सकते हैं मोदी सरकार का सस्ता AC



RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट में की कटौती
रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 0.35 फीसदी की कटौती की है. ​RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटाकर 5.40 फीसदी कर दिया. यह रेपो रेट 9 साल के निचले स्तर पर है. इसी के साथ RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट में कमी की है.
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क्या है MCLR?
MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं. इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं. ये बैंचमार्क दर होती है. इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं.

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कैसे तय होता है MCLR?
मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट औक टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.
First published: August 8, 2019, 1:19 PM IST
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