ये सरकारी बैंक हुए शॉर्टलिस्ट, जल्द होगा प्राइवेटाइजेशन! RBI गवर्नर ने दिया ये बड़ा बयान

RBI Shaktianta Das

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Bank privatisation latest Update: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण (privatisation) को लेकर सरकार (Modi Government)के साथ चर्चा में है. इस संदर्भ में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.

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  • Last Updated: March 25, 2021, 3:34 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण (privatisation) को लेकर सरकार (Modi Government)के साथ चर्चा में है. इस संदर्भ में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. शक्तिकांत दास ने टाइम्स नेटवर्क इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के एक कार्यक्रम में कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) के निजीकरण को लेकर सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं और इस संदर्भ में जल्द प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.

फास्ट ट्रैक पर है यह प्रक्रिया

वहीं, CNBC-आवाजने अपने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकारी बैंकों का प्राइवेटाइजेशन अब फास्ट ट्रैक पर आ रहा है. नीति आयोग ने बैंकों के निजीकरण पर रिपोर्ट तैयार कर ली है. इसमें पहले चरण में निजीकरण के लिए बैंकों के नाम का चयन संभव है. अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 4 सरकारी बैंकों को शॉर्टलिस्ट कर लिया है, कहा जा रहा है कि इनमें से दो बैंकों का निजीकरण अगले वित्त-वर्ष में किया जाएगा.प्राइवेटाइजेशन की लिस्ट में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक के नाम की चर्चा है. हालांकि, अभी तक इसको लेकर कोई भी फैसला नहीं हुआ. वहीं, दूसरी तरफ नीति आयोग (Niti Aayog) ने कुछ सरकारी बैंकों को निजीकरण योजना (privatisation plan) से बाहर रखा है. इनमें पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूनियन बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और SBI शामिल हैं. ये बैंक कंसोलिडेशन के पिछले राउंड का हिस्सा थे. आपको बता दें कि सरकार ने अगस्त 2019 में 10 बैंकों का 4 बैंकों में विलय किया था. इससे देश में सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई है.

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बजट में हुआ था निजीकरण का ऐलान

बता दें कि सरकार में सरकार ने बजट में बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था.अगले कारोबारी साल में दो बैंकों के निजीकरण की तैयारी है. निजीकरण की लिस्ट में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक के नाम की चर्चा है. अभी तक निजीकरण के लिए किसी भी बैंक का अंतिम चयन नहीं किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को 2021-22 का बजट पेश करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी के निजीकरण का प्रस्ताव किया था.

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बैंक यूनियनों कर रहे हैं हड़ताल

बता दें कि सरकार को इस प्रस्ताव के बाद से ही बैंक यूनियनों और विभिन्न विपक्षी नेताओं द्वारा बड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. हाल ही बैंक यूनियनों द्वारा 15 और 16 मार्च को बैंकों के निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया था और आगे भी हड़ताल की धमकी दी गई थी. हालांकि, जानकार बताते हैं कि सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने से ग्राहकों पर कोई खास असर नहीं होगा. बैंक की सर्विसेज पहले की तरह जारी रहती है.
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