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इस साल बैंकों को लेकर बदल गए ये नियम, जानिए आपकी जिंदगी पर क्या हुआ इसका असर

News18Hindi
Updated: December 29, 2019, 6:05 AM IST
इस साल बैंकों को लेकर बदल गए ये नियम, जानिए आपकी जिंदगी पर क्या हुआ इसका असर
साल 2019 में बैंकिंग सेक्टर में कई बड़े बदलाव किए गए

साल 2019 में बैंक से संबंधित कई बड़े नियमों में बदलाव हुआ ताकि आम नागरिक का बैंकिंग अनुभव बेहतर और सहूलियत भरा हो.

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  • Last Updated: December 29, 2019, 6:05 AM IST
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नई दिल्ली. साल 2019 के इन अंतिम दिनों में हर कोई इस बात को याद कर रहा कि इस साल उन्होंने क्या अच्छा किया और आगे आने वाले साल के लिए उन्हें क्या कुछ नया करना है. ऐसे में आज हम आपको बीते एक साल में आपके बैंकिंग सिस्टम और उनसे जुड़े बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं. 2019 में केंद्र सरकार, RBI से लेकर वित्तीय कंपनियां और बैकों ने अपने कई नियमों में बदलाव किया है. आइए जानते हैं कि बीते एक साल के दौरान आपके वित्तीय अनुभव में क्या—क्या बदलाव हुआ और इसका क्या असर रहा.

नकदी निकासी पर नया नियम
​इस साल नकदी निकासी (Cash Withdrawal) को लेकर भी एक नया नियम आया है, जिसके बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है. अगर आप किसी भी बैंक अकाउंट या पोस्ट ऑफिस (Post office) से कुल 1 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी करते हैं तो इस पर आपको 2 फीसदी टीडीएस देना होगा.

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ग्राहकों की शिकायतों के लिए व्यवस्था
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) बीते कुछ साल से लगातार सूर्खियों में बनी रहीं. भारतीय रिजर्व बैंक ने जून 2019 में NBFC के खिलाफ ​लोगों की शिकायतें ऑनलाइन सुनने के लिए शिकायत प्रबंधन प्रणाली यानी कंप्लेन्ट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) को शुरू किया था. RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूदा इस सिस्टम के माध्यम से आप ​पब्लिक इंटरफेस वाली किसी भी रेग्युलेट ईकाई के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इनमें कॉमर्शियल बैंक, अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक से लेकर एनबीएफसी तक शामिल हैं. शिकायत को उपयुक्त लोकपाल ऑफिस/रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय ऑफिस को भेज दिया जाएगा. RBI के CMS को डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों पर एक्सेस किया जा सकता है.

कई सरकारी बैंकों के विलय का ऐलान
केंद्र सरकार और RBI की नजर देश के बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector India) को पूरी तरह से दुरुस्त करने पर है. इसी को ध्यान देखते हुए मोदी सरकार ने 10 सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) को विलय कर 4 बड़े सरकारी बैंक बनाने का ऐलान किया है. इसके बाद देशभर में केवल 12 सरकारी बैंक ही रह पाएंगे. सरकार के इस फैसले के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटन बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय किया जाएगा. इसी प्रकार केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का वि​लय, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में कॉरपोरेशन बैंक और आंध्रा बैंक का विलय किया जाएगा. इसके अलावा इंडियन बैंक का विलय इलाहाबाद बैंक ​में किया जाएगा. बता दें कि इसी साल अप्रैल माह में विजया बैंक और देना बैंक का विलय बैंक ऑफ बड़ौदा में किया गया है.

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ATM से ट्रांजैक्शन पर RBI की सफाई
ATM से लेनदेन को लेकर आरबीआई इस साल एक खास स्पष्टीकरण जारी किया है. RBI ने इस साल बताया कि फ्री ATM ट्रांजैक्शन में ATM से टैक्स भरने, फंड ट्रांसफर, बैलेंस चेक जैसे नॉन-कैश​ विड्रॉल ट्रांजैक्शन को नहीं गिना जाता है. इसका सीधा मतलब है कि अगर आप एटीएम की मदद से इस तरह का कोई भी काम करते हैं तो इसे फ्री ट्रांजैक्शन की संख्या में नहीं गिना जाएगा.



फेल ट्रांजैक्शन पर नहीं देना होगा कोई चार्ज
RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी कारणों जैसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, कम्युनिकेशन इश्यू आदि के चलते; ATM में नकदी न होने, बैंक/सर्विस प्रोवाइडर द्वारा ट्रांजेक्शंस से मना करने, इनवैलिड पिन/वैलिडेशन आदि के कारण फेल होने वाले ट्रांजेक्शन को ग्राहक के वैलिड ATM ट्रांजेक्शंस में शामिल नहीं किया जाएगा. ग्राहकों को कोई चार्ज भी नहीं देना होगा. इसके अलावा नॉन कैश विद्ड्रॉल ट्रांजेक्शंस जैसे बैलेंस इन्क्वायरी, टैक्स पेमेंट, चेक बुक रिक्वेस्ट, फंड ट्रांसफर को भी फ्री ATM ट्रांजेक्शंस का हिस्सा नहीं माना जाएगा.



PMC Bank मामले पर RBI की कार्रवाई
इसी साल सितंबर माह में एक को-ऑपरेटिव बैंक (Coopertive Bank) को लेकर RBI ने बड़ा कदम उठाया. RBI ने 23 सितंबर 2019 को पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) पर वित्तीय गड़बड़ियों के चलते कई तरह की पाबंदियां लगा ​दिया. RBI ने पाया कि रियल एस्टेट कंपनी HDIL को दिए गए कर्ज के बारे में बैंक ने सही जानकारी नहीं दिया. PMC बैंक को RBI ने जो सबसे बड़ा कदम उठाया वो ये था कि इस बैंक का कोई भी खाताधारक 6 महीनों के लिए 1 हजार रुपये से अधिक की निकासी नहीं कर सकता है. हालांकि, समय-समय पर RBI ने इसमें कई बदलाव किया, जिसके बाद यह रकम बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति खाता तक कर दिया गया. 20 नवंबर को PMC बैंक के जमाकर्ताओं (Depositors) को मेडिकल इमरजेंसी से जुड़ी जरूरतों की स्थिति में एक लाख रुपये तक की निकासी के लिए नियुक्त प्रशासक से संपर्क कर सकने की सुविधा दी गई.

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ब्याज दरों पर RBI का फैसला
RBI का एक और फैसला जो इस साल लगातार चर्चा में रहा, वो ये था कि केंद्रीय बैंक (Reserve Bank of India) ने इस साल लगातार 5 बार नीतिगत ब्याज दरों (Policy Rates) में कटौती किया. इस प्रकार RBI ने रेपो रेट (Repo Rate) में कुल 1.35 यानी 135 आधार अंक की कटौती किया. इसमें सबसे पहली बार फरवरी माह में 0.25 फीसदी, अप्रैल में 0.25 फीसदी, जून माह में 0.25, अगस्त में 0.35 फीसदी और अक्टूबर माह में 0.25 फीसदी की कटौती की. RBI के इस फैसले के बाद रेपो रेट घटकर 5.15 फीसदी के स्तर पर आ गया. इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) में घटकर 4.90 फीसदी के स्तर पर आ गया. दिसंबर माह में हुए RBI ने इस साल के अपने अंतिम बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया.



फंड ट्रांसफर में सहूलियत
ऑनलाइन बैंकिंग (Online Banking) के जरिए फंड ट्रांसफर (Fund Transfer) करने को लेकर भी RBI ने इस साल बड़ा कदम उठाया. इसमें सबसे पहला कदम तो यह था कि IMPS से फंड ट्रांसफर की सीमा को बढ़ा दिया गया. सा​थ ही RBI ने इस माध्यम से फंड ट्रांसफर का समय सुबह 8 बजे की जगह 7 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे की जगह 6 बजे तक कर दिया.

किसी भी दिन कभी भी कर सकते हैं NEFT के जरिए फंड ट्रांसफर
NEFT के जरिए भी लेनदेन में बदलाव करते हुए RBI ने फैसला लिया कि अब इस सुविधा को सप्ताह के 7 दिन दी जाएगी. ऑनलाइन बैंकिंग करने वाले ग्राहक इस सुविधा का लाभ छुट्टी के दिन भी ले सकते हैं. साथ ही समय की बाध्यता को हटाते हुए इस सुविधा को 24 घंटे के लिए भी कर दिया गया.

मुफ्त में कर सकेंगे फंड ट्रांसफर
देशभर में ऑनलाइन पेमेंट (Online Payment) और फंड ट्रांसफर को बढ़ावा देने के लिए RBI ने RTGS और NEFT के जरिए फंड ट्रांसफर को पहले के मुकाबले सस्ता करने का फैसला लिया. RBI ने इन माध्यमों से फंड ट्रांसफर को मुफ्त् कर दिया है.



ब्याज दरों में बदलाव का सीधे फायदा
बैंकिंग सेक्टर में लोन को लेकर भी RBI ने इस साल एक बड़ा कदम उठाया. RBI ने रिटेल लोन की ब्याज दरों को एक्स्टर्नन बेंचमार्क (External Benchmark) से जोड़ने का फैसला लिया. यह फैसला लिया गया ताकि नीतिगत ब्याज दरों में होने वाले किसी भी बदलाव का लाभ रिटेल लोन (Retail Loan) लेने वाले ग्राहकों को मिल सके. इसके लिए RBI ने बैंकों से फ्लोटिंग रेट (Floating Rate) वाले सभी नए पर्सनल या रिटेल लोन और फ्लोटिंग रेट वाले MSME लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने का आदेश दिया. इन बेंचमार्क में रेपो रेट, भारत सरकार के 3 माह या 6 माह के ट्रेजरी बिल यील्ड और फाइनेंशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (FBIL) द्वारा प्रकाशित कोई भी अन्य बेंचमार्क शामिल हैं. अक्टूबर खत्म होते-होते लगभग सभी बैंकों ने रेपो रेट से लिंक्ड रिटेल लोन प्रॉडक्ट पेश कर दिए.

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First published: December 29, 2019, 6:05 AM IST
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