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...तो इस क्या वजह से बैंक नहीं दे रहे हैं अपना बिजनेस शुरू करने वालों को मुद्रा लोन

News18Hindi
Updated: January 29, 2020, 4:15 PM IST
...तो इस क्या वजह से बैंक नहीं दे रहे हैं अपना बिजनेस शुरू करने वालों को मुद्रा लोन
वित्‍त वर्ष 2019-20 में नवंबर 2019 तक 1.51 लाख करोड़ रुपये के मुद्रा लोन बांटे गए थे.

भारतीय बैंकों ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की शिशु कैटेगरी (Shishu Catagory) के तहत छोटे कारोबारियों को दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 में अब तक 40 हजार करोड़ रुपये के मुद्रा लोन (MUDRA Loan) बांटे.

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  • Last Updated: January 29, 2020, 4:15 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय बैंकों ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत कर्ज बांटने की रफ्तार बढ़ा दी है. पिछले दो महीने में बैंकों (Indian Banks) ने नए कारोबार शुरू करने वाले और छोटे कोरोबारियों की आर्थिक मदद के लिए मुद्रा योजना की शिशु कैटेगरी (Shishu Catagory) के तहत 40,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के कर्ज बांटे. बैंकों ने 24 जनवरी 2020 तक 1,97,816 करोड़ रुपये के मुद्रा लोन (Mudra Loan) मंजूर किए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्‍त वर्ष 2019-20 में अब तक 1,91,970 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा जा चुका है. इसमें नवंबर, 2019 तक 1.51 लाख करोड़ रुपये का मुद्रा लोन बांटा गया था यानी दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 में मौजूदा वित्‍त वर्ष के दौरान अब तक बांटे गए कुल मुद्रा कर्ज का करीब एक तिहाई लोन बांटा गया. दूसरे शब्‍दों में कहें तो बैंक अब ज्‍यादा तेजी के साथ मुद्रा लोन बांट रहे हैं.

पिछले वित्‍त वर्ष का आंकड़ा नहीं छू पाएंगे बैंक
एक बड़े सरकारी बैंक (Major PSB) के वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा, 'देश भर की स्‍टेट लेवल बैंकर्स कमेटीज (SLBC) का भी मानना है कि वित्‍त वर्ष (Financial Year) की आखिरी तिमाही चल रही है. अमूमन टारगेट पूरा करने के लिए वित्‍त वर्ष के आखिरी महीने में सबसे ज्‍यादा लोन बांटा जाता है.' हालांकि, आखिरी महीनों में लोन बांटने की बढ़ाई गई रफ्तार के बावजूद पिछले वित्‍त वर्ष में बांटे गए कर्ज के आंकड़ों को छू पाना नामुमकिन नजर आ रहा है. वित्‍त वर्ष 2018-19 में बैंकों ने कुल 3.21 लाख करोड़ रुपये का मुद्रा लोन बांटा था. इससे एमएसएमई (MSME) को बांटे गए कुल कर्ज का आंकड़ा भी घट जाएगा. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्‍त वर्ष में एमएसएमई को बांटा गया कर्ज 11 जनवरी 2020 तक एक फीसदी घट गया है.

मुद्रा लोन के लिए बैंक किसी तरह की सिक्‍योरिटी हीं मांगते हैं. इसमें शिशु, किशोर और तरुण तीन कैटेगरी बनाई गई हैं.


तीन कैटेगरी में दिए जाते हैं कारोबारियों को लोन
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अप्रैल, 2015 में शुरू किया था. इस योजना के तहत नॉन-कॉरपोरेट (Non-Corporate) और गैर-कृषि (Non-Farm) छोटे व लघु उद्योगों को 10 लाख रुपये तक का मुद्रा लोन दिया जाता है. मुद्रा लोन के लिए बैंक किसी तरह की सिक्‍योरिटी (Collateral) नहीं मांगते हैं. इस योजना की तीन कैटेगरी हैं. पहली, शिशु कैटेगरी में 50,000 रुपये तक का लोन दिया जाता है. इसके बाद किशोर कैटेगरी (Kishore) में 50 हजार से 5 लाख रुपये तक का मुद्रा लोन मंजूर किया जाता है और तीसरी तरुण कैटेगरी (Tarun) में 10 लाख रुपये का कर्ज दिया जाता है.

मुद्रा योजना के तहत सब्‍जी की दुकान, कपड़ों का स्‍टोर खोलने या टैक्‍सी सेवा शुरू करने जैसे छोट-छोटे कारोबार के लिए भी कर्ज बांटा जाता है.
एनपीए में सबसे बड़ा हिस्‍सा शिशु कैटेगरी का है
मुद्रा लोन कमर्शियल बैंक, आरआरबी, स्‍मॉल फाइनेंस बैंक, एमएफआई और एनबीएफसी के जरिये बांटे जाते हैं. हालांकि, सरकारी बैंकों ने सबसे ज्‍यादा मुद्रा लोन बांटे हैं. योजना शुरू होने से लेकर अब तक बांटे गए लोन में सरकारी बैंकों की हिस्‍सेदारी सबसे बड़ी है. योजना के तहत 2015 से अब तक करीब 11 लाख करोड़ रुपये के 21 करोड़ लोन बांटे गए हैं. आरबीआई मुद्रा लोन की वजह से बढ़ते नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) को लेकर बैंकों को आगाह कर चुका है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि सभी बैंक मुद्रा लोन के वितरण में अतिरिक्‍त सावधानी बरतें. बता दें कि मुद्रा लोन के कारण एनपीए में भी सबसे बड़ा हिस्‍सा शिशु कैटेगरी का है.

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First published: January 29, 2020, 4:03 PM IST
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