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बैन की गई दवाओं का नहीं बंद हुआ कारोबार, आराम से खरीद रहे हैं सभी लोग

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इसी हफ्ते सरकार ने 328 फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन पर बैन लगा दिया है. इसके चलते दवाओं के 6 हजार ब्रांड पर बैन लग गया है लेकिन बैन हुई दवाओं का खुला कारोबार अभी भी हो रहा है.

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    इसी हफ्ते सरकार ने 328 फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन पर बैन लगा दिया है. इसके चलते दवाओं के 6 हजार ब्रांड पर बैन लग गया है लेकिन बैन हुई दवाओं का खुला कारोबार अभी भी हो रहा है. सरकार ने 328 तरह की फिक्सड डोज कबिनेशन वाली दवाओं को बैन कर दिया है. लेकिन इसके पीछे की कहानी ये है कि फार्मा कंपनियों को अपनी दाल गलानी थी. इस वजह से उन्होंने कई तरह की दालों को मिलाकर नई दाल यानि नई मेडिसिन तैयार कर दीं और उन्हें 6 हजार से अधिक ब्रांड के जरिए बाजार में उतार दिया. मगर अब जब प्रतिबंध लग चुका है, ये दवाइयां अब भी बाजार में बिक रही हैं.

    आवाज़ संवाददाता ने सिर्फ रिटेल केमिस्ट शॉप पर ही नहीं बल्कि ऑनलाइन फॉर्मेसी से भी दवाएं मंगवाईं. जहां ऑर्डर करने पर आसानी से कोई भी मेडिसिन आपके घर तक मंगवा सकते हैं. आपकी जिंदगी के साथ वहां भी खिलवाड़ हो रहा है. जब खुलेआम बैन हुई दवाइयां मार्केट में आसानी से मिल रही हैं तो सरकार क्या कर रही है, ये एक बड़ा सवाल है.

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    जमीनी हकीकत देखने के बाद मन में सवाल उठता है कि आखिर कैसे ये बैन दवाएं खुलेआम बिक रही हैं. इस पर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया एस ईश्वर रेड्डी ने कहा कि कंपनियों ने दवाईयां बिना मंजूरी के भारतीय बाजार में उतारीं हैं. ये दवाएं सेहत के लिए खतरा हैं. इन पर लगा प्रतिबंध तत्काल रूप से प्रभावी है. प्रतिबंधित की गई दवाओं को बेचना और बनाना गैरकानूनी है.

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    प्रतिबंध 7 सितंबर से लगा लेकिन 13 सितंबर को वेबसाइट पर आदेश आया. हम कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं. जागरुकता बढ़ाने के लिए केमिस्ट एसोसिएशन को जानकारी भेज दी गई है. कंपनियों की जिम्मेदारी है कि अपना स्टॉक जल्द से जल्द वापस लें. स्टॉक वापस लेने के लिए उन्हें सूचित करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है. आदेश अब सार्वजनिक हो चुका है. 15 अन्य दवाओं की समीक्षा के लिए कमिटी बनाई जाएगी. 1988 से पहले न्यू ड्रग का कानून नहीं था ये दवाएं पहले से बनने के कारण इसमें कानूनी अड़चन आ रही है.

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