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रिश्तेदारों से पैसों के लेनदेन पर रोक नहीं! जानें अनरेगुलेटेड डिपॉजिट कानून से जुड़ी खास बातें

रिश्तेदारों से पैसों के लेनदेन पर रोक नहीं! जानें अनरेगुलेटेड डिपॉजिट कानून से जुड़ी खास बातें

Banning of Unregulated Deposit Ordinance-2019 से घबराने की जरूरत नहीं. व्यवहारिक तौर पर जो भी लेनदेन होते हैं, उसपर पाबंदी नहीं लगी है. आइए जानें इससे जुड़ी सभी काम की बातें...

Banning of Unregulated Deposit Ordinance-2019 से घबराने की जरूरत नहीं. व्यवहारिक तौर पर जो भी लेनदेन होते हैं, उसपर पाबंदी नहीं लगी है. आइए जानें इससे जुड़ी सभी काम की बातें...

Banning of Unregulated Deposit Ordinance-2019 से घबराने की जरूरत नहीं. व्यवहारिक तौर पर जो भी लेनदेन होते हैं, उसपर पाबंदी नहीं लगी है. आइए जानें इससे जुड़ी सभी काम की बातें...

    अनियमित जमा योजना और चिट फंड्स में आम लोगों की गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाने के लिए आए Banning of Unregulated Deposit Ordinance-2019 को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है. नया अध्यादेश अवैध जमा योजनाओं की जांच करेगा जो बहुत गरीब लोगों और आर्थिक निरक्षर लोगों का पैसा ठगने का काम करते हैं. वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार का कहना कि बिना पंजीकरण के अवैध रूप से चलाई जाने वाली जमा योजनाओं पर रोक लगाने संबंधी अध्यादेश से जमा लेने की पात्रता रखने वाले सभी पंजीकृत निकायों की केंद्रीय सूची बनाने में मदद मिलेगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को इससे संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दी. आइए जानें इससे जुड़ी सभी काम की बातें...

    इसका उद्देश्य देश में अवैध रूप से धनराशि जमा कराने वाली योजनाओं पर नकेल कसना है. इस कानून के जरिये पोंजी कंपनियों पर प्रतिबंध की प्रभावी व्यवस्था की गई है.

    रिश्तेदारों से लेनदेन पर नहीं लगी रोक- Banning of Unregulated Deposit Ordinance- 2019 से घबराने की जरूरत नहीं. व्यवहारिक तौर पर जो भी लेनदेन होते हैं उसपर पाबंदी नहीं लगी है. मसलन, अपने रिश्तेदारों से लेनदेन या कारोबार के लिए किसी फर्म, कम्पनी या LLP जैसे संस्थाओं से लेनदेन की छूट दी गयी है.

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    कानून से जुड़ी बड़ी बातें
    >>
    यह एक एजेंट या विज्ञापन के जरिये चूना लगाने पर भी रोक लगाता है.
    >> ऐसी किसी भी योजना का विज्ञापन नहीं कर सकते हैं जो पंजीकृत नहीं है.
    >> नए कानून के तहत दोषी पाए जाने पर एक से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.
    >> नए कानून में 2 लाख रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है.
    >> इसके अलावा कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले की सारी प्रॉपर्टी बेचकर निवेशकों के पैसे चुकाने का प्रावधान भी किया गया है.
    >> इससे संबंधित विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया था. हालांकि, यह विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था.

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    बिना रजिस्ट्रेशन नहीं होंगे पैसे जमा- राजीव कुमार का कहना है कि वैध निकायों की केंद्रीय सूची तैयार करने से गरीबों तथा वित्तीय पर जागरुकता से वंचित लोगों को उनकी गाढ़ी कमाई को चूना लगाने वाली अवैध जमा गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. इस अध्यादेश से हर उस निकाय के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो गया है जो जमा लेने की सुविधा देता हो. इससे जमा लेने योग्य सभी निकायों की केंद्रीय सूची भी तैयार होगी. जो कोई निकाय पंजीकृत नहीं होगा, जमा नहीं ले सकेगा.



    उन्होंने कहा कि अभी से बिना नियंत्रण के निकायों के जमा लेने पर पूरी तरह रोक है और इसे बढ़ावा देने वालों पर जुर्माना लगेगा. साथ ही, जेल भी जाना पड़ सकता है.



    क्या है पोंजी स्कीम- पोंजी स्कीम से मतलब ऐसे फर्जी निवेश ऑपरेशन से है, जिसमें ऑपरेटर पुराने निवेशकों को रिटर्न नए निवेशकों से प्राप्त धनराशि से देता है. यह ऐसी स्कीम होती है जिसमें वास्तव में कोई कारोबार या किसी व्यवसायिक गतिविधि में पैसा नहीं लगाया जाता, बल्कि कुछ व्यक्तियों से पैसा इकठ्ठा कर एक व्यक्ति को रिटर्न के रूप में दे दिया जाता है. इस तरह यह एक चेन बन जाती है जिसमें ज्यादातर लोगों का पैसा डूब जाता है. इटली का एक व्यवसायी चा‌र्ल्स पोंजी ऐसी ही स्कीम चलाकर लोगों का पैसा हजम करता था. इसी के नाम पर पोंजी स्कीम का नामकरण हुआ.

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    Tags: Business news in hindi, Financial Resolution and Deposit Insurance Bill 2017, Fixed deposits, Small depositors

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