Barclays ने दूसरी बार घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 0.8% घटाकर किया 9.2%

कोरोना की दूसरी लहर का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

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    नई दिल्ली. ब्रिटेन की ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज (Barclays) ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर (India GDP Forecast) के अनुमान को 0.8 प्रतिशत घटाकर 9.2 प्रतिशत कर दिया है. बार्कलेज ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर असर उसके शुरुआती अनुमानों से अधिक है. बार्कलेज के भारत में प्रमुख अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा कि देश में टीकाकरण की धीमी रफ्तार और कई राज्यों में जारी लॉकडाउन के चलते पूर्वानुमानों में यह कटौती की गई.

    पिछले एक महीने में कई विश्लेषकों ने इस तरह की आशंकाएं जताई हैं, यहां तक कि आरबीआई ने भी 10.5 प्रतिशत वृद्धि के अपने अनुमान को बनाए रखा है. जीडीपी वृद्धि के लिए विश्लेषकों का अनुमान 8.5 फीसदी से लेकर 10 फीसदी से थोड़ा ऊपर तक है.

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    लॉकडाउन का दिख रहा असर
    बजोरिया ने कहा कि हालांकि, भारत में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर होने लगी है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए लागू किए गए कड़े लॉकडाउन की आर्थिक कीमत कहीं बड़ी है. इसलिए हम वित्त वर्ष 2021-22 के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के पूर्वानुमान को 0.80 प्रतिशत घटाकर 9.2 प्रतिशत कर रहे हैं.

    एक महीने में दूसरी बार की कटौती
    Barclays ने इस महीने में दूसरी बार GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया है. इससे पहले बार्कलेज ने इसे 3 मई को 11 फीसदी से घटाकर 10 किया था. ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी कि टीकाकरण की धीमी रफ्तार से मध्यम अवधि के जोखिम पैदा हो सकते हैं, खासतौर से अगर देश में तीसरी लहर आती है तो.

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    बार्कलेज के विश्लेषकों ने कहा, 'जिस प्रकार भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर जारी है, उससे संक्रमण व मौतों की संख्या को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. धीमा वैक्सीनेशन भी भारत की रिकवरी की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है.