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बच्चा, बूढ़ा या हो जवान, डिहाइड्रेशन से बचाएं जान

डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएं सिर्फ बच्चों तक ही सीमित नहीं है.

डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएं सिर्फ बच्चों तक ही सीमित नहीं है.

यह बात सोचने वाली है कि सिर्फ भारत में ही हर साल 5 साल से कम उम्र के एक लाख से अधिक बच्चे डिहाइड्रेशन के शिकार होते हैं और उससे जुड़ी बीमारियों से मर जाते हैं. वहीं दुनिया भर में, यह आंकड़ा बढ़कर 7.6 लाख बच्चों तक पहुंच चुका है.

मानसून के दस्तक देते ही पानी से होने वाली बीमारियां सिर उठाने लगती हैं. इनमें ज्यादातर दस्त और डिहाइड्रेशन शामिल हैं. ऐसे समय में अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सतर्कता और सावधानी बरतने के साथ ही एक सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता पड़ती है.

कोविड-19 जैसी भयानक बीमारी की वजह से डिहाइड्रेशन के बारे में बात करना बेहद जरूरी हो गया है. हालांकि, यह बात सोचने वाली है कि सिर्फ भारत में ही हर साल 5 साल से कम उम्र के एक लाख से अधिक बच्चे डिहाइड्रेशन के शिकार होते हैं और उससे जुड़ी बीमारियों से मर जाते हैं. वहीं दुनिया भर में, यह आंकड़ा बढ़कर 7.6 लाख बच्चों तक पहुंच चुका है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस स्थिति की पूरी तरह से रोकथाम की जा सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मानें तो, इससे होने वाली मृत्यु दर को सही समय पर बीमारी की पहचान करने और उपयुक्त इलाज. की मदद से एक प्रतिशत से भी कम किया जा सकता है. सरल शब्दों में समझें, तो इसमें ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) का इस्तेमाल करना, साथ ही इससे जुड़ी बीमारियों जैसे कि दस्त, वायरल या पेट में संक्रमण, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण और निश्चित रूप से, हैजा जैसी घातक बीमारियों का इलाज करना शामिल है.

यकीन मानिए, डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएं सिर्फ बच्चों तक ही सीमित नहीं है. बुजुर्ग, युवा और सभी वर्ग के लोगों को इससे खतरा है- डिहाइड्रेशन के लक्षणों की पहचान करना किसी भी उम्र के लोगों के लिए मुश्किल होता है. इसकी वजह है कि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं और ऐसे में आसानी से पकड़ में नहीं आते हैं.

उदाहरण के लिए सौम्य डिहाइड्रेशन (1-3% शरीर के वजन में कमी) होने पर, हल्की प्यास और मुंह सूखने लगता है, जिस पर हम में से अधिकांश लोग ध्यान नहीं देते हैं. अगर हम लगातार पानी कम पीते हैं, जिससे पानी की कमी होती है (4-6% शरीर का वजन कम होना), तो हम थका हुआ और हल्का सिरदर्द महसूस करने लगते हैं, और हमारे होंठ सूखने लगते हैं. उस समय, हमारे मूत्र का का रंग भी चमकीला पीला हो जाता है. वहीं गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन होता है, तो (> 6% शरीर के वजन में कमी), प्यास, गंभीर सिरदर्द, तेज दिल की धड़कन और थकान का अनुभव होता है. इस समय मूत्र का रंग भूरा-पीला हो जाता है. जब हम अपने शरीर के वजन का 10% से अधिक पानी खो देते हैं, तो हम बेहोश हो सकते हैं और डिहाइड्रेशन से मृत्यु का भी खतरा बना रहता है.

अधिकांश लोग रोज़ाना 6% से ज्यादा की मात्रा में डिहाइड्रेट नहीं होते हैं, क्योंकि हमारी प्यास ही हमें पानी पीने के लिए मजबूर कर देती है. लेकिन नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों में इसके कई विशिष्ट लक्षण दिखाई देते हैं. उदाहरण के लिए, नवजात शिशुओं के पास आपको संकेत देने का कोई तरीका नहीं होता कि वे पानी की कमी से जूझ रहे हैं. हालांकि, जिस पहली चीज पर आप ध्यान दे सकते हैं, वह है उनका सूखा डायपर. अगर किसी शिशु ने 6 घंटे से अधिक समय तक अपना डायपर को गीला नहीं किया है, उसका मुंह सूखा महसूस होता है, और आंखें और खोपड़ी पर मौजूद कोमल हिस्से (काग) थोड़ी धँसे हुए दिखाई देते हैं, तो आपको उन्हें जल्दी ही तरल पदार्थ देने की जरूरत है. वहीं नन्हें बच्चों (टॉडलर) में डिहाइड्रेशन थकान और चिड़चिड़ेपन के साथ बिना आंसुओं के रोने पर देखा जा सकता है. वे उदासीन  दिखाई देते हैं, और उनकी आंखें, गाल और कोमल हिस्से धंसे हुए महसूस होते हैं.

दूसरी तरफ़ परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों के लिए यह समस्या थोड़ी अलग है. जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर में  द्रव संग्रह करने की क्षमता कम होती जाती है और हमारी प्यास भी कम हो जाती है. इसके अलावा, वे बुजुर्ग जो पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं, अक्सर ऐसी दवाएँ लेते हैं जो मूत्रवर्धक (मूत्र में वृद्धि और बार-बार मूत्र त्याग का कारण बनती हैं) हो सकती हैं. अक्सर बीमारियां भी डिहाइड्रेशन के कई लक्षणों को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि वास्तव में किसी व्यक्ति को डिहाइड्रेशन की समस्या है या नहीं है. यह पक्का करने का एक भरोसेमंद तरीका यह पता रखना है कि बुज़ुर्गों के ज़रिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीया जा रहा है या नहीं.

वहीं बाकी सभी लोगों को डायरिया जैसी बीमारियों से खतरा होता है. इसका एक बड़ा कारण मानसून के दौरान स्ट्रीट फूड के लिए हमारा बढ़ता रुझान है जो अक्सर हमें परेशानी में डाल देता है. गंभीर, बहुत ज़्यादा दस्त जो अचानक से हमारे शरीर पर हमला करते हैं, थोड़े ही वक्त में शरीर में मौजूद पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी का कारण बन सकते हैं. अगर दस्त के साथ उल्टी होती है, तो हमारा शरीर और भी अधिक मात्रा में तरल पदार्थ और मिनरल की कमी महसूस करता है.

डिहाइड्रेशन का एक और आम कारण तेज़ बुखार भी है. अगर बुखार, दस्त और उल्टी सभी रोग एक साथ आप पर हमला करते हैं, तो आपको वास्तव में पानी और जरूरी मिनरल की पूर्ति करने की ज़रूरत है, जिन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स कहा जाता है। इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे शरीर के लिए जरूरी मिनरल हैं, जैसे सोडियम, कैल्शियम और पोटैशियम; ये हमारे शरीर की रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, हमारी कोशिकाओं के अंदर और बाहर तरल पदार्थों के बीच संतुलन बनाए रखते हैं और इसके अलावा भी कई काम करते हैं. एक ही दिन में, हम अपने पसीने और मूत्र के माध्यम से काफ़ी इलेक्ट्रोलाइट्स खो देते हैं और उन्हें अपने आहार के माध्यम से पूर्ति करते हैं। हालांकि, डिहाइड्रेशन शुरू होने पर आपको इन तरल पदार्थों और इलेक्ट्रोलाइट्स को तेजी से पूर्ति करने की जरूरत होती है.

यहीं पर ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशंस काम आते हैं. 1960 के दशक में ओआरएस (ORS) की खोज ने डिहाइड्रेशन की स्थिति में जीवन रक्षक की भूमिका निभाई है. वर्षों से डब्ल्यूएचओ ने अलग-अलग अध्ययनों के जरिए रिहाइड्रेशन के सिद्धांत को प्रतिपादित और साबित किया है. नमक, मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट्स का सही अनुपात ही हमारे शरीर को डिहाइड्रेशन से उबारने के लिए जरूरी है.

भारत में यह फॉर्मूला 1972 से इलेक्ट्रॉल के रूप में उपलब्ध है. हमारे परिवार के फर्स्ट ऐड किट में भी इलेक्ट्रॉल पाउच भरोसेमंद दवा के रूप में मौजूद होता है. अब इलेक्ट्रॉल रेडी-टू-ड्रिंक टेट्रापैक में भी उपलब्ध है. भारत में इलेक्ट्रॉल ओआरएस का ही पर्याय है. डाइरिया और डिहाइड्रेशन की परेशानी से जूझ रहे हर शख्स के लिए इलेक्ट्रॉल एक आसान विकल्प है.

अपने परिवार के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी सुरक्षा के उपाय करना और मुश्किल हालात में तैयार रहना बेहद ज़रूरी है. जब बात डिहाइड्रेशन की आती है, तो उसकी सुरक्षा का सबसे आसान उपाय आपकी ज़ेब में मौजूद है. आपका भरोसेमंद इलेक्ट्रॉल.

#हाइड्रेशनफॉरहेल्‍थ 

#यह पार्टनर्ड पोस्ट है.

Tags: Dehydration, Health, Hydrationforhealth, WHO

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