Mutual Fund की खास स्कीम- रातों-रात बढ़ेगी आपकी दौलत! जानिए ओवरनाइट फंड के बारे में...

ओवरनाइट फंड (Overnight Mutual Funds)
ओवरनाइट फंड (Overnight Mutual Funds)

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ओवरनाइट फंड्स (Overnight Funds) में न के बराबर जोखिम होता है. ये स्कीमें उन निवेशकों के लिए हैं, जो छोटी अवधि के लिए काफी पैसा लगाना चाहते हैं. कपनियां इस तरह की स्कीमों में करोड़ों रुपये का निवेश होता है.

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नई दिल्ली. कोरोना के इस संकट में जहां सभी तरह के म्युचूअल फंड्स में पैसा लगाने वालों को नुकसान हो रहा है. वहीं, फंड्स की एक कैटेगिरी ऐसी भी है, जहां लगातार पैसा बन रहा है. आज हम बात कर रहे हैं ओवरनाइट फंड (Overnight Mutual Funds) की.  यह डेट म्यूचुअल फंड की एक कैटेगरी है. ये ओपन-एंडेड डेट स्कीमें होती हैं. यानी इनमें कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता है. ये स्‍कीमें एक दिन में मैच्योर होने वाली सिक्योरिटी में पैसा लगाती हैं. इसका मतलब है कि इन स्कीमों में फंड मैनेजर (Fund Managers) रोजाना के आधार पर सिक्योरिटी को खरीदते हैं. ये सिक्योरिटी (Securities) एक दिन में मैच्योर (Maturity) हो जाती हैं. फिर स्कीम के फंड को दोबारा नई सिक्योरिटी को खरीदने में लगाया जाता है. निवेश के इस तरह के दिशानिर्देश इन्हें काफी लिक्विड बना देते हैं. सेबी ने सभी तरह के म्यूचुअल फंड्स के लिए निवेश के दिशानिर्देश तय कर रखे हैं.

क्या इसमें पैसा लगाने वालों का नुकसान होता है? ओवरनाइट फंड्स में न के बराबर जोखिम होता है. ये स्कीमें उन निवेशकों के लिए हैं, जो छोटी अवधि के लिए काफी पैसा लगाना चाहते हैं. कंपनियां इस तरह की स्कीमों में करोड़ों रुपये लगाती हैं. कारण है कि बड़ी रकम के साथ थोड़ा भी उतार-चढ़ाव काफी असर डालता है. हालांकि, छोटे निवेशकों के लिए ओवरनाइट फंडों में अतिरिक्त रिटर्न कमा पाना मुश्किल होता है.

कोरोना संकट में भी हिट है ओवरनाइट म्युचूअल फंड्स स्कीम 




कितना देना होगा टैक्स- अन्य डेट म्यूचुअल फंडों की तरह अगर ओवरनाइट फंडों को तीन साल से अधिक समय के लिए रखा जाता है तो उन पर इंडेक्सेशन के साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. तीन साल से पहले निवेश को बेचने पर आपको अपने इनकम टैक्स के स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है.

कौन लगाता है इन स्कीम्स में सबसे ज्यादा पैसे-  सरकार या बड़े निगमों को एक दिन के लिए अतिरिक्त कैश की जरूरत होती है, इसलिए वे उधर लेते हैं. अगले दिन अगर उनके पास अतिरिक्त कैश हो जाता है तो वे अन्य कंपनियों को उधार देते हैं, नहीं तो फिर से ओवरनाइट फंड के जरिए उधर लेते हैं.

क्या है इसमें रिस्क- डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में ओवरनाइट फंडों को सबसे सुरक्षित कहा जाता है. कारण है कि इनमें निवेश का नजरिया बहुत छोटा होता है. इन स्कीमों पर ब्याज दरों में बदलाव और किसी सिक्योरिटी के डिफॉल्ट का फर्क नहीं पड़ता है.

एक्सपर्ट का कहना है कि इस दौर में सुरक्षित रिटर्न चाहने वालों के लिए ओवरनाइट फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जहां मेच्योरिटी सिर्फ 1 दिन की होती है.

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि स्कीम के तहत 100 फीसदी रकम कोलैटरलाइज्ड बॉरोइंग और लेंडिंग ऑब्लिगेशन (CBLO) मार्केट में निवेश किया जाता है, जिससे रिस्क बहुत कम हो जाता है.

CBLO इंस्टूमेंट में मेच्योरिटी 1 दिन की हो सकती है. इससे लिक्विडिटी की समस्या भी नहीं है. हालांकि 1 दिन मेच्योरिटी होने से इनमें रिटर्न कम है, लेकिन बेहद ही सुरक्षित.यही वजह है कि कई एक्सपर्ट कहते हैं कि ये स्कीमें उन लोगों के लिए मुफीद हैं जो बेहद कम जोखिम लेकर थोड़े अधिक रिटर्न के लिए पैसा लगाना चाहते हैं.
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