कोरोना संकट के बीच रियल एस्टेट सेक्टर को मिल सकता है बूस्ट, ये हैं दो कारण

कोरोना संकट के बीच रियल एस्टेट सेक्टर को मिल सकता है बूस्ट, ये हैं दो कारण
रियल एस्टेट बाजार में मांग बढ़ सकती है.

देश के रियल एस्टेट सेक्टर (Real-Estate Sector) में लंबे समय से खास ग्रोथ नहीं देखने को मिला है. इस बीच अब लोग कोरोना वायरस के साथ रहना सीख रहे हैं. ऐसे में बेहतर मॉनसून और घटते ब्याज दर से उम्मीद की जा सकती है रियल एस्टेट सेक्टर को कुछ बूस्ट मिल सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 13, 2020, 12:17 AM IST
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नई दिल्ली. भारत में रहने वाले लोग अब धीरे-धीरे कोरोना वायरस के साथ रहना सीख रहे हैं. अब देश भर में ऑफिस, मॉल और स्टोर सभी खुल गए हैं और जीवन धीरे-धीरे व्यवसाय में वापस आ रहा है. दूसरी तरफ महामारी भी पूरे देश में फैलती जा रही है और कम होने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं. जिसकी वजह से महामारी ने दुनिया भर में विभिन्न आर्थिक गतिविधियों (Economic Activities) पर बुरा प्रभाव पड़ा है. रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) का मामला भी कुछ ऐसा ही रहा है. पिछले कुछ महीनों में बिक्री में कमी आई है. लेकिन जैसा कि कहते हैं कि अच्छे समय की तरह बुरा समय हमेशा के लिए नहीं रहता है और ऐसे संकेत मिलते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर जल्द ही फिर से उभर सकता है.

मानसून से उम्मीद
हाउसिंगडॉटकॉम, मकानडॉटकॉम व प्रॉपटाइगरडॉटकॉम के ग्रुप सीईओ ध्रुव अगरवाला कहते हैं कि अफोर्डेबल हाउसिंग के साथ-साथ रेडी टू मूव-इन प्रॉपर्टीज (Ready to move in Properties) ने चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे रियल स्टेट सेक्टर के लिए संजीवनी की तरह काम किया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा की गई देश भर में सामान्य मानसून की भविष्यवाणी के साथ यह दौर जारी रह सकता है. सामान्य मानसून देश के कृषि क्षेत्र के लिए आवश्यक और लाभदायी होता है. भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कृषि पर निर्भर है. अच्छी उपज संघर्ष कर रही देश की अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर लाने में भी मदद करती है. अच्छी फसल से रियल एस्टेट क्षेत्र में विशेष रूप से अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट को फायदा होने की संभावना है.

टियर II और III शहरों में बढ़ सकती है मांग
2019 के अंत में, भारत के शीर्ष नौ शहरों में 7.75 लाख यूनिट्स का कुल अनसोल्ड स्टॉक था, जिनमें से करीब 3.90 लाख यूनिट्स अफोर्डेबल हाउसिंग थीं. कीमतों के स्थिर रहने से, कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी से निश्चिततौर पर किफायती घरों की मांग अधिक हो सकती है. क्योंकि कृषि क्षेत्र में सरकार द्वारा हाल ही में किए गए सुधार के उपायों, जिसमें किसानों को अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता प्रदान करना शामिल है, जहां वे न्यूनतम समर्थन मूल्य में हालिया बढ़ोतरी के साथ-साथ अपनी इच्छा से कृषि क्षेत्र के विश्वास को और अधिक बढ़ावा देना चाहते हैं. जिसके बाद विशेष रूप से टियर II और III शहरों में मांग को पुनर्जीवित करने में काफी मदद करेगा.



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कम ब्याज दर भी देगा साथ
इसके अलावा ब्याज दरें लगभग 15 साल के निचले स्तर पर हैं. चूंकि रियल एस्टेट के लिए ब्याज दर काफी मायने रखता है, ऐसे में गिरते ब्याज दर से वर्तमान में होम लोन के लिए दरें लगभग 7-7.5% है और प्रॉपर्टी की बढ़ती मांग के कारण सेक्टर को लाभ होने की संभावना है. यह रेडी टू मूव-इन ’सेगमेंट के लिए विशेष रूप से सहायक होगा, जिसमें कुल मांग का एक बड़ा हिस्सा होता है. इस रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण, देश के नौ प्रमुख शहरों में पिछले वित्त वर्ष के दौरान आवास की बिक्री में 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी, लेकिन देखा गया कि रेडी टो मूव रेजिडेंशियल यूनिट्स की मांग अंडर कंस्ट्रक्शन के मुकाबले ज्यादा रही है.

रेडी-टू-मूव-इन घरों की मांग बढ़ी
इस फर्म के आंकड़ों के अनुसार, कुल बिक्री में रेडी-टू-मूव-इन इन्वेंट्री का प्रतिशत में हिस्सेदारी 2019-20 वित्त वर्ष के दौरान 20% तक बढ़ गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 15 प्रतिशत था. 2019-20 के दौरान तैयार यूनिट्स की बिक्री बढ़कर 64,386 यूनिट हो गई, जबकि 2018-19 में 53,908 यूनिट थी. गिरती ब्याज दर और महामारी के कारण बिल्डरों की वित्तीय स्थिति में अनिश्चितता के बीच, रेडी टू मूव इन प्रॉपर्टी की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है.

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अंत में अगरवाला कहते है, जैसा कि रियल एस्टेट शायद एकमात्र एसेट क्लास रहा है जिसने मौजूदा मार्केट में कीमतों में गिरावट या अस्थिरता नहीं देखी है जैसा कि इक्विटी द्वारा देखा गया है और एक बड़े तबके के लोगों में निवेश के लिए सबसे अच्छा निवेश विकल्प होने का तमगा हासिल किया है.
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