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OPINION: बेरोजगारी दर के आंकड़े, देश के अधिकतर युवा बंद कर चुके हैं रोजगार के अवसर तलाशना

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Updated: November 27, 2019, 10:52 PM IST
OPINION: बेरोजगारी दर के आंकड़े, देश के अधिकतर युवा बंद कर चुके हैं रोजगार के अवसर तलाशना
मिर सुहेल की आर्ट

2019 की पहली तिमाही में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में बेरोजगारी (Unemployment) दर में मामूली गिरावट आई है. लेकिन, कुछ प्राइवेट एजेंसियों के आंकड़ों में बेरोजगारी में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 10:52 PM IST
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सिंधु भट्टाचार्य

नई दिल्ली. अर्थव्यवस्था में सुस्ती ने देशभर के युवआों के बीच बेरोजगारी को लकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जुलाई-सितंबर माह के दौरान जीडीपी ग्रोथ रेट लुढ़ककर 5 फीसदी के स्तर पर आ गया है. अब इस आंकड़े के साथ ही नौकरी सृजन को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कम होते औद्योगिक आउटपुट, सर्विस सेक्टर में धीमी ग्रोथ, कॉरपोरेट द्वारा कम निवेश और बाहरी व्यापार लगातार बेरोजगार को बढ़ा रहा है. लेकिन, सरकारी आंकड़े इस थ्योरी को साबित नहीं करते. हालांकि, प्राइवेट एजेंसियों ने कहा है कि बेरोगारी बढ़ रही है.

बेरोजगारी के पिछले आंकड़ों की तुलना नहीं की जा सकती
सरकारी श्रम आंकड़ों के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की मेथडोलॉजी में कुछ समय पहले बदलाव की वजह से पहले के श्रम आंकड़े को मौजूदा समय के आंकड़ों से तुलना नहीं किया जा सकता. ऐसे में जब वित्त वर्ष 2017-18 में 15 साल व उससे अधिक के उम्र के लोगों के​ लिए बेरोजगारी दर बीते 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, तब सरकार ने कहा कि मेथडोलॉजी में बदलाव होने की वजह से इस आंकड़े को मौजूदा समय के आंकड़े से तुलना नहीं किया जा सकता है.

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PLFS के आंकड़े के मुताबिक बेरोजगारी दर में सुधार
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इसके ठीक बाद 2019 की पहली तिमाही में जारी किए गए PLFS रिपोर्ट से पता चला कि पिछली तिमाही की तुलना में बेरोजगारी दर में मामूली सुधार हुआ है. PLFS की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 की पहली तिमाही में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 9.3 फीसदी रही जो कि इसके पिछली तिमाही में 9.9 फीसदी रही थी. 15 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों के लिए यह आंकड़ा पिछली तिमाही के 9.7 फीसदी से कम होकर 9.2 फीसदी रही. ​15 साल से 29 साल के युवाओं के लिए इस दौरान बेरोजगारी दर 22.5 फीसदी रहा. इसके पहली तिमाही में यह आंकड़ा 23.7 फीसदी रहा था. इस रिपोर्ट के हिसाब से देखें तो उपरोक्त ​तीन श्रेणियों में बेरोजगारी दर में गिरावट आई है.

CMIE के आंकड़ों में अलग तस्वीर
लेकिन, प्राइवेट सोर्स को आंकड़ो में बेरोजगारी दर बढ़ने की बात कही गई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के मुताबिक, इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच बेरोजगारी दर 6.87 फीसदी रही, जो कि पिछले साल की सामान अवधि के 5.5 फीसदी के मुकाबले अधिक है. 2019 के सितंबर से लेकर दिसंबर के बीच यह आंकड़ा 6.67 फीसदी रहा था. CMIE का सेम्पल साइज और मेथडोलॉजी PLFS से अलग है.

वैसे भी, PLFS के आंकड़ों का केन्द्र बिंदु है यह है कि एक साल के लिए बेरोजगारी दर 22 फीसदी से अधिक होने का मतलब है कि हर पांच में एक भारतीय बेरोजगार है. क्या है मामूली सुधार के बावजूद भी सरकार के लिए चिंता का विषय नहीं है?

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कमजोर अर्थव्यवस्था में निराश हैं युवा
ध्यान देने योग्य एक और बात है. PLFS के आंकड़ों से पता चलता है कि लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) भी पहली 2019 की पहली तिमाही में लुढ़का है. इसका मतलब है अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति को देखते हुए लोग नौकरियों के अवसर तलाशना बंद कर रहे हैं और वर्कफोर्स से वो खुद को अलग रखना चाहते हैं. सभी आयुवर्ग के लिए 2019 की पहली तिमाही में LFPR 36 फीसदी है, जोकि 2018 की अंतिम और चौथी तिमाही में 36.3 फीसदी था. अगर आप केवल युवाओं के लिहाज से देखें तो 15 से 29 साल के आयुवर्ग पिछली तिमाही के 38.2 फीसदी के मुकाबले घटकर 37.7 फीसदी पर आ गया है. इससे पता चलता है कितनी तेजी से देशभर के युवा खुद को लेबरफोर्स से अलग कर रहे हैं. भारत की कुल आबादी का एक बड़ा वर्ग युवाओं का है.

सबसे अधिक शिक्षा दर के बावजूद भी केरल में बेरोजगारी
फिर, फिसदी के मामले में राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग (NSO) के आंकड़े हल्की राहत की तरफ इशारा करते हैं. अलग दृष्टिकोण से इसपर देखने से एक नया ही नजरिया मिलता है. उदाहरण के तौर पर केरल को देखें तो 2011 की जनगणन के मुताबिक यहां देशभर में सबसे अधिक शिक्षा दर है. अन्य राज्यों के मुकाबले यहां अभी भी सबसे अधिक बेरोजगारी अनुपात है. वहीं, गुजरात में बेरोजगारी दर के मामले में युवाओं की संख्या सबसे कम है.

PLFS 2019 आंकड़े के मुताबिक, 2019 की पहली तिमाही में केरल में शहरी क्षेत्रों के युवओं की बेरोजगारी दर 37.2 फीसदी है. अलग शब्दों में कहें तो केरल का हर तीसरा युवा बेरोजगार है. वो भी तब, जब देश की राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 22.5 फीसदी. गुजरात के लिए यह आंकड़ा 9.5 फीसदी है. यानी, गुजरात के शहरी क्षेत्रों में हर 10 में से एक युवा बेरोजगार है.

मातृभूमि अखबबार की ​एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 36 से अधिक युवा बेरोजगार है. इसमें मेडिकट और इंजीनियरिंग से ग्रैजुएट युवा भी हैं. इसमें से भी युवतियों की संख्या युवाओं के मुकाबले अधिक है. यहां 23 लाख युवतियां बेरोजगार हैं.

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युवतियों में सबसे अधिक बेरोजगारी
PLFS के आंकड़ों से पता चलता है कि केरल की हर 10 में 6 शहरी युवतियां बेरोजगार हैं. पिछले साल की अंतिम तिमाही के 57.6 फीसदी के मुकाबले 2019 की पहली तिमाही में यह 60.1 फीसदी है. केवल अन्य दो राज्यों में ही युवतियों में बेरोजगारी दर 60 फीसदी से अधिक रही. ये राज्य उत्तराखंड और जम्मू एंड कश्मीर है. गुजरात अभी भी अधिक से अधिक युवतियों को रोजगार देने में आगे है. अन्य राज्यों के मुकाबले गुजरात में युवतियों का बेरोजगारी दर 10.5 फीसदी रहा है.

वर्कफोर्स में घट रही महिलाओं की भागीदारी
PLFS आंकड़े से एक और चिंता के बारे में पता चलता है. देशभर में महिलाओं की का लेबर फोर्स में भागीदारी लगातार कम हो रही है और महिलओं की बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है. महिलाओं के लिए LFPR 16-17 फीसदी के ​करीब है, जिसका मतलब है कि हर 6 में से केवल 1 ही महिला रोजगार के अवसर तलाश रही है. 2019 की पहली तिमाही के लिए, सभी आयुवर्ग की महिलाओं का LFPR 15 फीसदी रहा है. पुरूषों के लिए यह आंकड़ा 57.9 फीसदी रहा है. पहली तिमाही में हर 10 में करीब हर 3 महिला बेरोजगार है. हालांकि, कुछ राज्यों में यह स्थिति एक दूसरे से काफी भिन्न है.

(लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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First published: November 27, 2019, 10:45 PM IST
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