भारतमाला परियोजना के तहत 3000 किमी सड़कों का हुआ निर्माण, कोरोना संकट के बीच 322 परियोजनाओं का दिया ठेका

कोरोना संकट के बीच भारतमाला परियोजना के तहत करीब 3,000 किमी सड़क का निर्माण किया गया.
कोरोना संकट के बीच भारतमाला परियोजना के तहत करीब 3,000 किमी सड़क का निर्माण किया गया.

भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत पिछड़े इलाकों, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) बनाए जा रहे हैं. ये परियोजना गुजरात और राजस्थान से शुरू होकर पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं को कवर करेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 9:17 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश में सड़क निर्माण (Road Construction) में लगातार तेजी लाई जा रही है. देश भर में सड़क का जाल बिछाने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) कई सड़क परियोजनाओं पर काम कर रही है. इसी कड़ी में भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत भी सड़क बनाई जा रही है. कोरोना काल में इस परियोजना के तहत 300 से ज्‍यादा परियोजनाओं का ठेका (Contract Award) दिया गया. अगस्त 2020 तक भारतमाला परियोजना के तहत 12,413 किमी लंबी सड़कों के निर्माण के लिए कुल 322 प्रोजेक्ट का ठेका दिया गया. अगस्त 2020 तक इस परियोजना के तहत 2,921 किमी सड़कों का निर्माण किया गया. इस परियोजना के तहत कुल 550 जिला मुख्यालयों को कम से कम चार लेन वाले हाईवे से इंटरकनेक्ट किया जाएगा.

परियोजना में इंटरनेशनल कनेक्टिविटी वाले रोड्स भी शामिल
परियोजना के रूट्स पर 80 फ्रेट ट्रैफिक का भार है. यह परियोजना देश के 24 लॉजिस्टिक पार्क, 66 इंटर-कॉरिडोर को आपस में जोड़ेगी. इसका दायरा करीब 8,000 किमी का होगा. यह परियोजना 7,500 किमी के 116 फीडर रूट्स और 7 उत्तर पूर्वी राज्यों के मल्टी मॉडल वॉटरवे पोर्ट से भी कनेक्ट करेगी. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने 1998 में भारतमाला परियोजना लांच की थी. सड़क विस्तार और विकास की इस परियोजना में सीमा और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी वाले प्रोजेक्‍ट शामिल किए गए. यही नहीं इस परियोजना के तहत बंदरगाहों (Ports) तक पहुंच और नेशनल कॉरिडोर्स (National Corridors) को विकसित किया जा रहा है.

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इन सभी राज्‍यों को आपस में जोड़ेगा भारतमाला प्रोजेक्‍ट


भारतमाला परियोजना के तहत पिछड़े इलाकों, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग भी बनाए जा रहे हैं. परियोजना गुजरात और राजस्थान से शुरू होकर पंजाब व आगे पूरे हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व तराई इलाकों के साथ उत्तर प्रदेश तथा बिहार की सीमाओं को कवर करेगी. पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम में भारत-म्यांमार की सीमा तक सड़कों का जाल इस परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है. भारत माला के तहत राजमार्ग की कुल लंबाई करीब 51,000 किमी की होगी. इसके पहले चरण में 34,800 किमी सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए 5.35 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

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भारतमाला सड़क परियोजना से लोगों को होंगे ये फायदे
पूर्व पीएम वाजपेयी की महात्‍वाकांक्षी सड़क परियोजना के पूरा होने से सामान और लोगों की आवाजाही आसान हो जाएगी. देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी और लोगों को रोजगार मिलेगा. किसानों की फसल समय पर बाजारों तक पहुंच पाएगी. भारतमाला परियोजना के लिए सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए एक मसौदे को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 24 अक्टूबर 2017 को मंजूरी दे दी थी. इस परियोजना के पहले चरण को साल 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

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पहले चरण में इस तरह की सड़कों का होना है निर्माण
आर्थिक कॉरिडोर-9000 किमी, इंटर-कॉरिडोर्स व फीडर मार्ग 6000 किमी, नेशनल कॉरिडोर दक्षता कार्यक्रम 5000 किमी, बॉर्डर एंड इंटरनेशनल कनेक्टिविटी रोड्स 2000 किमी, तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़कें 2000 किमी, एक्सप्रेस-वे 800 किमी का निर्माण इस परियोजना के तहत किया जाना है. वहीं, भारतमाला परियोजाना के तहत पहले चरण में कुल 24,800 किमी सड़क बनाने का प्रावधान है. इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) के तहत 10 हजार किमी सड़क का निर्माण भी किया जाना है.
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