खुशखबरी! BHIM यूपीआई के जरिए लेन-देन हुआ सस्ता! जानें यहां

अगर आप भीम (भारत इंटरफेस फॉर मोबाइल) एप का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. आइए जानें पूरा मामला

News18Hindi
Updated: August 31, 2019, 6:10 PM IST
खुशखबरी! BHIM यूपीआई के जरिए लेन-देन हुआ सस्ता! जानें यहां
खुशखबरी! BHIM यूपीआई के जरिए लेन-देन हुआ सस्ता! जानें यहां
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Updated: August 31, 2019, 6:10 PM IST
अगर आप BHIM (Bharat Interface for Money) App का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India)  ने मोबाइल भुगतान ऐप BHIM UPI के जरिए पैसों के लेन-देन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) में बदलाव किया है. NPCI का कहना है कि अब 100 रुपये तक ट्रांजेक्नशन (पैसों का लेन-देन) पर कोई MDR चार्ज नहीं देना होगा. इससे छोटे दुकानदारों को मदद मिलेगी. देश भर के छोटे ग्रोस्री स्टोर, केमिस्ट और किराना स्टोर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

क्या होता है एमडीआर चार्ज- MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक चार्ज है. कई बार जब हम आप कुछ खरीदने जाते हैं. और अपना क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड निकालते हैं तो दुकानदार कुछ एक्स्ट्रा चार्ज लगाने की बात कहता है. क्या कभी आपने कभी सोचा है कि दुकानदार ये एक्स्ट्रा चार्ज क्यों मांग रहा है?

अगर आसान शब्दों में कहते तो जब आप कार्ड से पेमेंट करते हैं तो दुकानदार को एक तय फीस अपने बैंक को चुकानी पड़ती है. इसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR कहते हैं. MDR चार्ज दुकानदार पर लगता है. और इसे वे ग्राहकों से वसूल करते हैं.



दुकानदार इस फीस को आपके बिल के साथ आपसे वसूल जरूर करता है. मगर उसे मिलती अठन्नी भी नहीं है. याद कीजिए अक्सर छोटे दुकानदार इसी वजह से कार्ड से पेमेंट लेने में आनाकानी करते हैं. तो फिर MDR का पैसा किसकी झोल में जाता है?

 नई MDR दरें 1 अक्टूबर से लागू होंगी-एनपीसीआई की ओर से 30 अगस्त को जारी की गयी जारी बयान में कहा गया है कि कि एमडीआर को संशोधित कर अधिकतम 100 रुपये प्रति लेन-देन के साथ 0.30% कर दिया गया है.  मौजूदा समय में 2,000 रुपये तक की लेन-देन के लिए यह 0.25% और 2,000 रुपये से अधिक की लेन-देन पर 0.65% है.

एनपीसीआई यूपीआई का उपयोग करके व्यापारी भुगतान के प्रसार के लिए विभिन्न कदम उठा रहा है, जिसमें पी2पीएम (P2PM) के लेन-देन की सीमा को 50,000 रुपये से बढ़ा कर 1 लाख रुपये किया जाना शामिल है.
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यूपीआई क्या है- यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस का डिजिटल वॉलिट्स से कोई लेनादेना नहीं है. यूपीआई नेटबैंकिंग को आसान बनाने के लिए लाया गया है. यह IMPS से ऊपर का स्तर है जो एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करता है. यह एक मेल भेजने जैसा अनुभव देता है.

आप अपना आईडी यानी वीपीए (यूनिक प्राइवेट ऐड्रेस) बना सकते हैं और किसी भी अकाउंट से पैसे का लेनदेन कर सकते हैं.

इसमें पैसे सीधे एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में आते-जाते हैं.आरबीआई ने हाल ही में कुछ कड़े दिशा-निर्देश जारी किए ताकि वॉलिट सर्विसेज की विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ाई जा सके. फोन अनलॉक्ड रहने के बावजूद कई वॉलिट ऐप्स को संचालित करने के लिए पिन या फिंगरप्रिंट स्कैन की जरूरत होती है. पेटीएम और फ्रीचार्ज जैसी वॉलिट सर्विसेज इंश्योरेंस कवर्स भी देती हैं ताकि किसी तरह का फर्जीवाड़ा या मोबाइल चोरी होने पर नुकसान की भरपाई हो सके.

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First published: August 31, 2019, 6:09 PM IST
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