भारत ने चीन की कंपनियों को दिया बड़ा झटका! बदल गए सरकारी टेंडर से जुड़े नियम

भारत ने चीन की कंपनियों को दिया बड़ा झटका! बदल गए सरकारी टेंडर से जुड़े नियम
भारत ने चीन कंपनियों को दिया जोर का झटका!

सरकारी खरीद में चीन समेत भारत की सीमा से सटे देशों (Restrictions on Public Procurement) को मिली खुली छूट को खत्म करते हुए सरकार ने बड़ा फैसला किया है. अब चाइनीज कंपनियां सरकारी खरीद के लिए बोली में शामिल नहीं हो सकती हैं.

  • Share this:
नई दिल्ली. सरकार (Government of India) ने चीन समेत उन देशों से सरकारी खरीद पर नियंत्रण लगा दिए हैं जिनकी सीमाएं भारत से लगती हैं. इन देशों का कोई कंपनी सुरक्षा मंजूरी और एक विशेष समिति के पास पंजीकरण के बाद ही टेंडर भर सकेगी. चीन (Chinese Company) के साथ सीमा विवाद के बीच यह कदम उठाया गया है. गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भारत सरकार सामान्य वित्तीय नियम, 2017 को संशोधित किया है ताकि उन देशों की कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जा सके जिनकी सीमा भारत से लगती हैं. देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.

चाइनीज कंपनियों को दिया झटका, अब रजिस्ट्रेशन जरूरी- व्यय विभाग ने देश की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के इरादे से नियम के तहत सार्वजनिक खरीद पर विस्तृत आदेश जारी किया. आदेश के तहत भारत की सीमा से लगे देशों का कोई भी आपूर्तिकर्ता भारत में सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए वस्तुओं , सेवाओं (परामर्श और गैर-परामर्श समेत)की आपूर्ति के अनुबंध या परियोजना कार्यों (टर्न-की परियोजना समेत) के लिये तभी बोली लगा सकेगा जब वह उचित प्राधिकरण के पास रजिस्ट्रेशन होगा.

विदेश और गृह मंत्रालय से मंजूरी जरूरी- इसमें कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन के लिये उचित प्राधिकरण उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा गठित पंजीकरण समिति होगी. इसके लिये विदेश और गृह मंत्रालय से राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मजूरी अनिवार्य होगा.



इन सभी के लिए मंजूरी जरूरी- आदेश के दायरे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों, स्वायत्त निकायों, केंद्रीय लोक उपक्रमों, सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं को भी लिया गया है जो सरकार या उसके अंतर्गत आने वाली इकाइयों से वित्तीय समर्थन लेती हैं.
राज्यों के लिए भी जारी हुआ आदेश- इसमें कहा गया है कि देश की रक्षा और सुरक्षा में राज्य सरकारों की अहम भूमिका है. इसको देखते हुए भारत सरकार ने राज्य सरकारों और राज्य उपक्रमों आदि द्वारा खरीद के मामले में इस आदेश के क्रियान्वयन को लेकर संविधान के अनुच्छेद 257 (1) का उपयोग करते हुए राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है. राज्य सरकारों की खरीद के मामले में उचित प्राधिकरण का गठन राज्य करेंगे लेकिन राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य बनी रहेगी. कुछ मामलों में छूट दी गयी है. इसमें कोविड-19 वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिये 31 दिसंबर तक चिकित्सा सामानों की आपूर्ति के लिये खरीद शामिल हैं.

ये भी पढ़ें-संसद की कैंटीन का इस तरह बदलेगा जायका, 52 साल से रेलवे के पास था ठेका 

सरकार ने अलग आदेश में उन देशों को पूर्व पंजीकरण से छूट दी है जिन्हें भारत सरकार की तरफ से ऋण सुविधा या विकास संबंधी सहायता उपलब्ध करायी गयी है. अदेश के अनुसार, ‘‘नया प्रावधान सभी निविदाओं पर लागू होगा.

जिन निविदाओं को पहले ही आमंत्रित किया जा चुका है या वे पात्रता के मूल्यांकन का पहला चरण पूरा नहीं हुआ, जिन बोलीदाताओं का पंजीकरण नहीं है, उन्हें पात्र नहीं माना जाएगा.’’ अगर यह चरण पूरा हो गया है, निविदा रद्द की जाएगी और नये सिरे से प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यह प्रावधान निजी क्षेत्र द्वारा खरीद पर लागू नहीं होता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज