देश के बड़े बैंकों ने ग्राहकों को दी क्रिप्‍टोकरेंसी से दूर रहे की चेतावनी, नहीं मानने पर रद्द किया जा सकता है कार्ड

क्रिप्टोकरेंसी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्रिप्टोकरेंसी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के सभी बैंकों को क्रिप्‍टोकरेंसी (Cryptocurrency) से जुड़े लेनदेन की निगरानी करने को कहा था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इसे लेकर आरबीआई की एडवाइजरी को गलत करार दे चुका है.

  • Share this:

नई दिल्‍ली. देश के कई बड़े बैंकों (Indian Banks) ने अपने ग्राहकों को बिटक्‍वाइन और डॉगक्‍वाइन (Bitcoin/Dogecoin) जैसी क्रिप्‍टोकरेंसीस में सौदे नहीं करने की सलाह दी है. देश के सबसे बड़े सरकारी कर्जदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और निजी क्षेत्र के सबसे बड़े कर्जदाता एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने अपने ग्राहकों को इस बारे में ई-मेल भेजी हैं. हालांकि, ये ई-मेल चुनिंदा ग्राहकों को ही भेजी गई हैं. इनमें उनकी क्रिप्‍टोकरेंसी से जुड़ी ट्रांजैक्शंस के बारे में पूछा गया है. साथ ही उन्‍हें ऐसी ट्रांजैक्शंस से बचने की सलाह दी गई है.

चेतावनी नहीं मानने पर रद्द कर दिए जाएंगे बैंक कार्ड्स

बैंकों ने कस्टमर्स को चेतावनी दी है कि इस सलाह को नहीं मानने पर उनके कार्ड रद्द किए जा सकते हैं. एचडीएफसी बैंक ने ई-मेल में कहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत वर्चुअल करेंसी से जुड़ी ट्रांजैक्शंस की अनुमति नहीं है. इसमें रिजर्व बैंक की ओर से अप्रैल 2018 में जारी किए गए सर्कुलर का हवाला दिया गया है. इस सर्कुलर में बैंकों को इस तरह की ट्रांजैक्शंस को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई थी. साथ ही कहा गया था कि बैंकों को अपने ग्राहकों के अकाउंट से होने वाली ऐसी ट्रांजैक्शंस की निगरानी करनी चाहिए.

ये भी पढ़ें- मोतीलाल ओसवाल का अनुमान! Sensex अगले 10 साल में पार कर जाएगा 2 लाख अंक का जादुई स्‍तर
SC ने RBI के दिशानिर्देशों को ठहराया था गलत

एसबीआई ने कस्टमर्स को क्रिप्‍टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों का ध्यान रखने को कहा है. देश के इस सबसे बड़े सरकारी बैंक ने ई-मेल में सीधी चेतावनी दी है कि वर्चुअल करेंसी प्लेटफॉर्म पर ट्रांजैक्शंस के लिए क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से आपका क्रेडिट कार्ड रद्द (Credit Card Cancellation) किया जा सकता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले साल रिजर्व बैंक के इन दिशानिर्देशों को गलत करार दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था, 'आरबीआई यह साबित नहीं कर सका है कि क्रिप्‍टोकरेंसी से जुड़ी फर्मों के चलने से रेगुलेटेड एंटिटीज को नुकसान हो सकता है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज