इस सेक्टर की कंपनियों पर मंदी का बड़ा खतरा! 10 लाख लोगों की नौकरियों पर लटकी तलवार

ऑटो इंडस्ट्री में लगातार मंदी रहने और प्रोडक्शन में गिरावट की वजह से 10 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है. नौकरियां जाने का अंदेशा देखते हुए ACMA ने मोदी सरकार से अनुरोध किया है.

पीटीआई
Updated: July 25, 2019, 1:49 PM IST
इस सेक्टर की कंपनियों पर मंदी का बड़ा खतरा! 10 लाख लोगों की नौकरियों पर लटकी तलवार
10 लाख लोगों की नौकरियों पर लटकी तलवार
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Updated: July 25, 2019, 1:49 PM IST
देश के ऑटो सेक्टर पर इन दिनों मंदी का खतरा मंडरा रहा है. कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) ने बुधवार को वाहन क्षेत्र के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की दर एक समान 18 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है. ऐसा इसलिए ताकि पूरे वाहन उद्योग में मांग को बढ़ाया जा सके, जिससे करीब 10 लाख नौकरियां बचाने में मदद मिलेगी. अभी वाहन बिक्री में लगातार मंदी रहने की वजह से ये नौकरियां दांव पर लगी हैं. ऑटो कम्पोनेंट इंडस्ट्री करीब 50 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराता है.

10 लाख लोग हो सकते हैं बेरोजगार
एक्मा के अध्यक्ष राम वेंकटरमानी ने कहा, ''ऑटो इंडस्ट्री अभूतपूर्व मंदी का सामना कर रही है. हर श्रेणी में वाहनों की बिक्री पिछले कई महीनों से भारी दबाव का सामना कर रही है.'' उन्होंने कहा कि ऑटो कम्पोनेंट इंडस्ट्री की बढ़ोतरी पूरी तरह से वाहन उद्योग पर निर्भर करती है. मौजूदा स्थिति में ऑटो प्रोडक्शन में 15 से 20 फीसदी की कटौती हुई है जिससे कम्पोनेंट इंडस्ट्री के सामने संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा, यदि यही रुख जारी रहता है तो करीब 10 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं.

छंटनी का काम हो चुका शुरू

उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर छंटनी का काम शुरू भी हो चुका है. GST प्रणाली के तहत पहले से ही करीब 70 फीसदी ऑटो कम्पोनेंट पर 18 फीसदी की दर से कर लग रहा है. जबकि बाकी बचे 30 फीसदी पर 28 फीसदी GST है. इसके अलावा वाहनों पर 28 फीसदी GST के साथ उनकी लंबाई, इंजन के आकार और प्रकार के आधार पर एक से 15 फीसदी का सेस भी लग रहा है.

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वेंकटरमानी ने कहा कि मांग में कमी, भारत स्टेज-4 से भारत स्टेज-6 उत्सर्जन मानकों के लिए हाल में किए गए निवेश, ई-व्हीकल नीति को लेकर अस्पष्टता से वाहन उद्योग का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है और इस वजह से भविष्य के सभी निवेश रुक गए हैं. संगठन ने इसके अलावा स्थिर इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति की जरूरत बताई. ई-व्हीकल को पेश करने के लक्ष्य में और कोई भी बदलाव करने से देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा जबकि देश के मौजूदा कम्पोनेंट इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा.
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First published: July 25, 2019, 12:40 PM IST
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