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    निवेशकों के लिए बड़ी खबर! शेयर बाजार से डिलिस्‍ट नहीं होगी Vedanta Limited

    वेदांता ग्रुप का डिलिस्टिंग ऑफर नाकाम हो गया है. इसलिए अब कंपनी भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध रहेगी.
    वेदांता ग्रुप का डिलिस्टिंग ऑफर नाकाम हो गया है. इसलिए अब कंपनी भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध रहेगी.

    वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd.) भारतीय शेयर बाजार से अपनी सूचीबद्धता खत्‍म करने के लिए 5 अक्‍टूबर को डिलिस्टिंग ऑफर (Delisting Offer) लेकर आई थी. इसके लिए ओपन बिड (Open Bid) शुक्रवार को बंद हो गई. कंपनी डिलिस्टिंग के लिए जरूरी शेयर बायबैक (Buyback) नहीं कर पाई और उसका ऑफर नाकाम हो गया. ऐसे में कंपनी अब इंडियन स्‍टॉक एक्‍सचेंज (Indian Stock Exchanges) पर लिस्टिड रहेगी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 11, 2020, 3:48 PM IST
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    नई दिल्‍ली. वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) से अपनी सूचीबद्धता खत्म करने के लिए डिलिस्टिंग ऑफर (delisting offer) लेकर आई थी. अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के नियंत्रण वाली इस कंपनी का डिलिस्टिंग ऑफर फेल हो गया है. कंपनी अब भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listed) रहेगी. इसे कंपनी के शेयरहोल्डर्स की बड़ी जीत माना जा रहा है. वेदांता ने शनिवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि कंपनी का डिलिस्टिंग ऑफर नाकाम हो गया है. इस संबंध में रविवार को एक विज्ञापन जारी किया जाएगा और इसकी सूचना निवेशकों को दे दी जाएगी.

    वेदांता लिमिटेड को मिली 125.47 करोड़ शेयर्स के लिए बिड
    स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में वेदांता ने कहा है कि कंपनी को 125.47 करोड़ शेयरों के लिए बिड मिली, जबकि उसे शेयर बाजार से डिलिस्ट (Delist) होने के लिए 134 करोड़ शेयरों की जरूरत थी. ऐसे में कंपनी का यह ऑफर नाकाम हो गया है. इसके बाद कंपनी ने खुद को डिलिस्ट करने के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) से एक दिन का समय मांगा, लेकिन उसे अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया गया है. शुक्रवार को सेबी ने डिलिस्टिंग ऑफर के लिए समय बढ़ाकर 7 बजे तक कर दिया था. वेदांता के प्रमोटर अगर शेयरधारकों के पास मौजूद कुल 169.73 करोड़ शेयरों में से 134 करोड़ शेयर खरीद लेते यानी बायबैक (Buyback) कर लेते तो शेयर बाजार से कंपनी की लिस्टिंग खत्म हो जाती.

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    वेदांता को डिलिस्टिंग के लिए चाहिए थे 134.12 करोड़ शेयर


    वेदांता ने बताया कि 5 अक्टूबर को खुली बिड से उसे 125.47 करोड़ शेयरों के लिए बिड मिली , जो शुक्रवार को बंद हो गई है. कंपनी को डिलिस्टिंग के लिए 134.12 करोड़ शेयर्स की जरूरत थी. इसके बाद प्रमोटर्स की होल्डिंग 90 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती, जो डिलिस्टिंग के लिए सेबी के नियमों के मुताबिक जरूरी था. कंपनी ने कहा कि वह पब्लिक की ओर से ऑफर किए गए शेयर नहीं खरीद रही है. इसलिए कंपनी अभी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध रहेगी. वेदांता के कुल फुली पेड अप शेयरों की संख्या 356.10 करोड़ है. इसका 90 प्रतिशत 320.49 करोड़ शेयर हुए. इसमें से प्रमोटर्स के पास 186.36 करोड़ शेयर हैं. वहीं, पब्लिक के पास 169.73 करोड़ शेयर हैं.

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    एलआईसी समेत इंस्‍टीट्यूशनल इंवेस्‍टर्स ने बिगाड़ दिया खेल
    अनिल अग्रवाल 6 महीने से कंपनी को डिलिस्‍ट कराने की कोशिश कर रहे हैं. कंपनी ने 87.25 रुपये पर डिलिस्ट का ऑफर दिया था. ऑफर के समय कंपनी के एक शेयर की कीमत 140 रुपये थी. आज यह 120 रुपये पर है. ऐसे में रिटेल इंवेस्‍टर्स के साथ इंस्टीट्यूशनल इंवेसटर्स को भी डिलिस्टिंग में भारी घाटा हो रहा था. वेदांता की डिलिस्टिंग में सबसे बड़ा अड़ंगा एलआईसी (LIC) ने लगाया. एलआईसी ने 320 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बिड किया. उसके पास वेदांता की 6 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है. कुछ और संस्थागत निवेशकों ने भी 155 से 175 रुपये पर बिड किया. इस तरह वेदांता को जो भाव मिला वह आज के शेयर के भाव से भी ज्यादा मिला, जबकि ऑफर भाव 87.25 रुपये था.
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