कर्मचारियों के लिए अच्‍छी खबर! PF में 5 लाख रुपये तक के निवेश से मिले ब्‍याज पर नहीं लगेगा टैक्‍स

केंद्र ने प्रोविडेंट फंड में टैक्‍स फ्री निवेश की सीमा बढ़ा दी है.

केंद्र ने प्रोविडेंट फंड में टैक्‍स फ्री निवेश की सीमा बढ़ा दी है.

केंद्र सरकार ने बजट 2021 (Budget 2021) में घोषणा की थी अगर आपके ईपीएफ खाते (EPF Account) में 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा का निवेश हो रहा है तो आपको अतिरिक्त निवेश से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स चुकाना होगा, क्योंकि उसमें नियोक्ता भी अपनी ओर से योगदान देता है. केंद्र ने वित्‍त विधेयक में कुछ संशोधन किए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 1:14 PM IST
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नई दिल्‍ली. संसद के निचले सदन यानी लोकसभा (Lok Sabha) में वित्त विधेयक 2021 पारित हो चुका है. इसमें केंद्र सरकार ने कुछ संशोधन भी किए हैं. केंद्र सरकार ने प्रॉविडेंट फंड (Provident Fund) में निवेश की गई रकम पर मिले ब्याज पर छूट की सीमा (Tax Exemption Limit) को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है. हालांकि, ये छूट सिर्फ उन कर्मचारियों को मिलेगी, जिनकी कंपनी की ओर से पीएफ में कोई योगदान नहीं दिया जाता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने कहा कि इससे प्रॉविडेंट फंड में निवेश करने वाले सिर्फ 1 फीसदी लोगों पर असर पड़ेगा. साथ ही कहा कि बाकी लोगों का पीएफ में योगदान 2.5 लाख रुपये से कम ही है.

वीपीएफ और पीपीएफ में निवेश करने पर मिलेगी छूट

केंद्र सरकार ने बजट 2021 (Union Budget 2021) में घोषणा की थी अगर आपके ईपीएफ खाते (EPF Account) में 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा का निवेश हो रहा है तो आपको अतिरिक्त निवेश से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स (Taxable Income) चुकाना होगा, क्योंकि उसमें नियोक्ता भी अपनी ओर से योगदान (Employer Contribution) देता है. वहीं, अगर आप तय 12 फीसदी के अतिरिक्‍त वॉलिंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में निवेश करते हैं तो आप 5 लाख रुपये तक के कुल पीएफ निवेश पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स छूट (Tax Exemption) पा सकते हैं.

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नई व्‍यवस्‍था से ज्‍यादा इनकम वाले लोगों पर पड़ा असर

पीएफ में ज्यादा योगदान के जरिये टैक्स छूट का फायदा उठाने वाले लोगों को बजट 2021 की घोषणाओं से तगड़ा झटका लगा था. अच्छी कमाई करने वाले लोग अब तक टैक्स-फ्री हेवेन के तौर पर पीएफ का इस्तेमाल करते थे, लेकिन बजट 2021 में ये छूट सीमित कर दी गई थी. नई व्यवस्था के तहत एक साल में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा प्रॉविडेंट फंड जमा करने पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आना था. इससे हाई-इनकम सैलरीड लोग सीधे तौर पर प्रभावित होते, जो टैक्स फ्री इंट्रेस्ट कमाने के लिए पीएफ का इस्तेमाल करते थे.
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