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...तो बिहार में किसानों की आय देश में सबसे कम और पंजाब में सबसे ज्यादा क्यों है?

...तो बिहार में किसानों की आय देश में सबसे कम और पंजाब में सबसे ज्यादा क्यों है?

रबी सीजन में 1 सितंबर से 31 मार्च तक ब्याजमुक्त फसली ऋण दिया जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रबी सीजन में 1 सितंबर से 31 मार्च तक ब्याजमुक्त फसली ऋण दिया जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा ने कहा, अगर एपीएमसी एक्ट में संशोधन से किसानों का हित होगा तो बिहार नंबर वन होता. वहां 2006 से एपीएमसी है ही नहीं लेकिन किसानों की आय देश में सबसे कम सिर्फ 3558 रुपये प्रति माह है.

नई दिल्ली. कृषि क्षेत्र के लिए घोषित आर्थिक पैकेज (Economic Package) में नीतिगत सुधारों की बात भी की गई है. इसमें एसेंशियल कमोडिटी एक्ट और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC-Agricultural produce market committee) एक्ट में बदलाव प्रमुख है. अब इसे लेकर कृषि जगत में यह बहस तेज हो गई है कि क्या कृषि मार्केटिंग रिफॉर्म से किसानों को सच में लाभ मिलेगा? इसे लेकर हमने कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा से बातचीत की.

शर्मा ने कहा कि अगर एपीएमसी एक्ट में संशोधन से किसानों को लाभ मिलता तो बिहार के अन्नदाता सबसे आगे होते. क्योंकि बिहार (Bihar) में 2006 से ही एपीएमसी एक्ट नहीं है. फिर भी वहां किसानों की स्थिति बद से बदतर होती गई. दूसरी ओर पंजाब (Punjab) में एपीएमसी सबसे मजबूत स्थिति में है, 1840 मंडियां हैं, वहां पर किसान संपन्न है. तो दोनों मॉडल का अध्ययन करने के बाद देखना चाहिए क्या सही और गलत है.

बिहार, पंजाब में किसानों की आय में इतना अंतर क्यों?

शर्मा कहते हैं कि बिहार में किसानों की औसत आय (Farmers Income) देश में सबसे कम सिर्फ 3558 रुपये प्रति माह है. जबकि पंजाब में 18,059 रुपये. जबकि दोनों कृषि प्रदेश हैं. फिर भी दोनों के किसानों की आय में इतना अंतर है. तो हमें सोचना चाहिए कि एपीएमसी में बदलाव करके हम किसानों को सीधे बाजार के हवाले कर उन्हें शोषण के लिए तो नहीं छोड़ रहे. अगर बिहार में पिछले 14 साल में एपीएमसी का नेटवर्क बना होता तो शायद किसानों की स्थिति बेहतर होती. किसान मजदूर नहीं बन जाता. शर्मा कहते हैं कि सन् 2000 में निजी मंडी के रूप में आईटीसी की ई-चौपाल आई थी लेकिन बाद में वो बंद हो गई.

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सबसे ज्यादा और सबसे कम किसान आय वाले प्रदेश


ऐसे सुधारों का क्या मतलब

सरकार कृषि सुधारों के नाम पर राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-Nam) की बात करती है लेकिन हो क्या रहा है. इसी प्लेटफार्म पर किसान 59 पैसे और 1 रुपये किलो में प्याज बेचने को मजबूर हैं. फिर ऐसे सुधार का क्या मतलब है. सरकार को ट्रेडर्स के लिए नहीं किसानों के लिए काम करना होगा. यदि सरकार किसानों का हित चाहती है तो हर कृषि उत्पाद पर एक एश्योर्ड प्राइस तय होनी चाहिए. अगर उससे कम पर बिके तो सरकार भावांतर जैसी किसी योजना से उसकी भरपाई करे.

सरकार ने सिर्फ एपीएमसी में संशोधन के लिए कहा है  

इस बारे में जब डबलिंग फामर्स इनकम कमेटी के प्रमुख डॉ. अशोक दलवई से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि हमने एपीएमसी एक्ट में संशोधन की बात की है न कि उसे खत्म करने की. इन सुधारों का कृषि जगत को काफी फायदा मिलने वाला है.

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Tags: Farmer, Kisan, Ministry of Agriculture, Punjab, बिहार

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