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शानदार ग्रोथ: अक्टूबर में 13 साल के टॉप पर मैन्युफैक्चरिंग PMI, डिमांड से मिला बूस्ट

India’s Manufacturing PMI in October 2020: जीएसटी वसूली के बाद पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़ों ने आर्थिक ग्रोथ में तेजी की उम्मीद को बढ़ा दिया है.
India’s Manufacturing PMI in October 2020: जीएसटी वसूली के बाद पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़ों ने आर्थिक ग्रोथ में तेजी की उम्मीद को बढ़ा दिया है.

India’s Manufacturing PMI in October 2020: जीएसटी वसूली के बाद पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़ों ने आर्थिक ग्रोथ में तेजी की उम्मीद को बढ़ा दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 2, 2020, 1:03 PM IST
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नई दिल्ली. मोदी सरकार (Government of India) के लिए अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के मोर्चे पर एक राहत की खबर है. बाजार में मांग सुधरने से अक्टूबर में मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी (Manufacturing Activity) 13 साल के टॉप पर पहुंच गई है. इससे प्रोडक्टशन और जॉब एक्टिविटी में भी तेजी दिखाई दे रही है. सोमवार को जारी आईएचएस मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (IHS Markit PMI) सर्वे में यह खुलासा हुआ है. आर्थिक विकास दर में सुस्ती, निवेश और मांग के मोर्चे पर मौजूदा चुनौतियों के बीच मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में सुधार सकारात्मक संकेत हैं. आपको बता दें कि परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) एक इंडेक्स होता है जिसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की स्थिति का आंकलन करने के लिए किया जाता है. यह अलग-अलग कारोबारी पहलुओं पर मैनेजरों की राय के आधार पर तैयार होता है, जिसमें हजारों मैनेजरों से उत्पाद, नए ऑर्डर, उद्योग की उम्मीदों एवं आशंकाओं और रोजगार से जुड़ी हुई राय ली जाती है. इसके साथ ही मैनेजरों से पिछले माह की तुलना में नई स्थिति पर राय और रेटिंग देने के लिए कहा जाता है, जिसके आधार पर इसको हर महीने जारी किया जाता है.

आपको बता दें कि लगातार दूसरे आर्थिक आंकड़े ने देश की जीडीपी में ग्रोथ लौटने की उम्मीद जगाई है. अक्टूबर महीने के लिए जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा जारी हो गया है. फरवरी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी महीने में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है. 31​ अक्टूबर तक 80 लाख GSTR-3B रिटर्न्स भी फाइल हो चुके हैं.

13 साल के टॉप पर मैन्युफैक्चरिंग PMI-कंपनियों के परचेजिंग मैनेजर्स के बीच हुए मासिक सर्वेक्षण आईएचएस मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स अक्टूबर में 58.9 रहा है. अक्टूबर 2007 के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं, सितंबर 2020 में यह 56.8 अंक था. यह लगातार तीसरा महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में लगातार ग्रोथ आई है. पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना गतिविधियों में विस्तार जबकि 50 अंक से नीचे रहना गिरावट के रुख को दर्शाता है.





PMI से कैसे पड़ता है अर्थव्यवस्थआ पर असर? पीएमआई की प्रासंगिकता पीएमआई सूचकांक को मुख्य सूचकांक माना जाता है. यह किसी खास सेक्टर में आगे की स्थिति का संकेत देता है. चूंकि यह सर्वे मासिक आधार पर होता है. इसलिए इससे आय में बढ़ोत्तरी का अंदाजा लगाया जा सकता है.

इससे यह भी पता चलता है कि आर्थिक गतिविधियों में उछाल आएगा या नहीं. हालांकि यह सवालों के वास्तविक जवाब पर निर्भर करता है. तिमाही आधार इन जवाबों का विश्लेषण किया जाता है. जो लोग इंडस्ट्री का हिस्सा हैं, उनके लिए पीएमआई काफी महत्वपूर्ण सूचकांक है.

देखा जाए तो पीएमआई इकोनॉमी में सेंटिमेंट को भी दर्शाता है. पीएमआई बेहतर होना इकोनॉमी में उत्साह का संचार करता है. अर्थव्यवस्था पर इसका असर आमतौर पर महीने की शुरुआत में पीएमआई आंकड़ा जारी होता है, जिसे जीडीपी वृद्धि दर से पहले जारी किया जाता है.

कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर फैसला करने के लिए इस सूचकांक की मदद लेते हैं. क्योंकि अच्छे पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि देश में आर्थिक हालात सुधर रहे हैं और अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ रही है, जिसकी वजह से कंपनियों को ज्यादा सामान बनाने के ऑर्डर मिलते हैं.

अगर कंपनियों का उत्पादन बढ़ता है तो लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं. इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसलिए अर्थशास्त्री भी पीएमआई आंकड़ों को मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ का अच्छा संकेतक मानते हैं.

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वित्तीय बाजार में भूमिका वित्तीय बाजार में भी पीएआई की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि, परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स कंपनियों की आय का संकेत देता है. इसी वजह से बांड बाजार और निवेशक दोनों ही इस सूचकांक पर नजर रखते हैं. इसके आधार पर ही निवेशक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने का फैसला करते हैं.
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