SBI चेयरमैन का बड़ा बयान! कहा- ब्याज दरों में कटौती के बाद भी इसलिए नहीं बढ़ रहा निवेश

SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश से ही अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाया जा सकता है.
SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश से ही अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाया जा सकता है.

देश के सबसे बड़े कर्जदाता एसबीआई (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि बैंक ब्‍याज दरों (Interest Rates) में कटौती का फायदा ग्राहकों को दे रही हैं. इसके बाद भी निवेश (Investment) नहीं बढ़ना चिंता का विषय है. उन्‍होंने कहा कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर (Infrastructure Sector) में निवेश से ही देश की अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) को पटरी पर लाया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 11:48 PM IST
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नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े कर्जदाता स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने अलग-अलग सेक्‍टर्स में निवेश (Investment) नहीं बढ़ने पर चिंता जताई. उन्‍होंने कहा कि ब्याज दरों में कटौती (Low Interest Rates) के बावजूद निवेश नहीं बढ़ रहा है, जबकि बैंकों की ओर से कटौती का फायदा ग्राहकों को दिया जा रहा है. उन्‍होंने कहा क‍ि इस साल क्रेडिट ग्रोथ की दर (Credit Growth Rate) सुस्त रही है, क्योंकि पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) सामान्य रफ्तार से नहीं हो रहा है.

देश में 10 लाख करोड़ के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स पाइपलाइन में हैं
रजनीश कुमार ने ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 47वें राष्‍ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन में कहा कि 2008 में आर्थिक संकट (Economic Crisis) के दौरान बैंकों ने नियमों को आसान बनाकर कर्ज (Loan) देने में बढ़ोतरी की थी. इसकी देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. इसलिए इस बार बैंक समझदारी से काम ले रहे हैं. आर्थिक विकास की बहाली के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर खर्च करना ही एकमात्र उपाय है. उन्होंने कहा कि भारत के पास 10 लाख करोड़ रुपये मूल्य के पांच साल के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं.

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'इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश ही रोजगार और मांग को बढ़ा सकता है'


एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को अकेले इन्‍हीं इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स के दम पर पटरी पर लाया सकता है. दरअसल, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर (Employment Opportunities) पैदा किए जा सकते हैं. रोजगार मिलने पर बाजार में मांग (Demand) भी बढ़ेगी और पूरी अर्थव्‍यवस्‍था का पहिया घूमने लगेगा. नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर (Growth Rate) में 2018 से ही गिरावट आई है.

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अरविंद पनगढ़िया ने कहा, बैंकों के फिर से पूंजीकरण की है जरूरत
अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Government) के पहले चार साल के कार्यकाल के दौरान विकास दर ऊंची रही थी. उन्होंने कहा कि फिर से 7 फीसदी की विकास दर हासिल करने के लिए भारत को मुक्त व्यापार (Free Trade) और बैंकों के फिर से पूंजीकरण (Re-Capitalization) की सख्त जरूरत है. उन्‍होंने कहा कि भारत में 6 से 7 फीसदी तक की महंगाई दर (Inflation) को सहन करने की क्षमता है. आरबीआई (RBI) को इसे कम रखने पर जोर देने की जरूरत नहीं है. अप्रैल से जून 2020 के दौरान महंगाई की ऊंची दर से आपूर्ति में कमी आई थी. आपूर्ति में सुधार होने पर महंगाई घटती चली जाएगी.
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