बिहार के किसानों को झटका! MSP पर नहीं खरीदा जाएगा मक्का, जानिए क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?

बिहार के किसानों को झटका! MSP पर नहीं खरीदा जाएगा मक्का, जानिए क्या है वजह?
बिहार के किसानों को झटका! MSP पर नहीं खरीदा जाएगा मक्का, जानिए क्या है वजह?

किसानों के आक्रोश के बावजूद नीतीश कुमार सरकार एमएसपी पर मक्का नहीं खरीदेगी, फिर व्यापारियों के हाथों ठगे जाएंगे अन्नदाता!

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2020, 5:50 PM IST
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नई दिल्ली. चुनावी एलान और किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के बीच बिहार के किसानों के लिए एक निराश होने वाली खबर है. इस साल भी यहां मक्के (Maize) की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं होगी. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सरकार ने इसके लिए कोई प्रस्ताव ही नहीं दिया. तो यहां के किसान भाईयों आप फिर से मक्का की उपज स्थानीय व्यापारियों को ही बेचने के लिए तैयार हो जाईए. बिहार में पहले के ऐसे उदाहरण हैं कि व्यापारियों ने एमएसपी से बहुत कम दाम पर खरीद की है. वो भी अपनी शर्तों पर. सरकारी तंत्र ने उन्हें बेलगाम छोड़ा हुआ है. दूसरी ओर, आज देश के कई हिस्सों में एमएसपी की ही मांग को ही लेकर किसान आंदोलन हो रहा है.

बिहार (Bihar) में करीब 2 मिलियन टन मक्का पैदा होता है. उत्पादक किसानों को खुले बाजार में कम दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ेगा. बिहार प्रमुख मक्का उत्पादक राज्य है. यहां देश का करीब 9 फीसदी मक्का पैदा होता है. बिहार का 80 फीसदी मक्का उत्तरी बिहार के खगड़िया, अररिया, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और सहरसा सहित 18 जिलों में होता है. यहां यह रबी और खरीफ दोनों की फसल है.

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बिहार में मक्का किसानों से जारी है लूट, व्यापारी नहीं देते एमएसपी




केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया है कि बिहार सरकार ने चालू वर्ष के लिए मक्के की खरीद के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है. इसलिए भारत सरकार ने बिहार में मक्के की खरीद के लिए किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है. दो लाइन का यह स्टेटमेंट बिहार के किसानों की मुसीबत बढ़ाने वाला है.
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…फिर भी कोई खरीद केंद्र नहीं
बिहार के किसानों ने एमएसपी न मिलने के खिलाफ लॉकडाउन के दौरान 'मक्का हवन' किया था. बिहार किसान मंच के अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह टुडू का कहना है कि उनका प्रदेश देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में शामिल है. लेकिन यहां के मक्का उत्पादक किसानों को उचित दाम नहीं मिलता.



केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान बिहार से हैं. एफसीआई (FCI) उनके अधीन है इसके बावजूद यहां पर मक्के का कोई सरकारी खरीद केंद्र नहीं है. नीतीश सरकार धान और गेहूं का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाती है और मक्के की खरीद करती ही नहीं.

लागत, एमएसपी और बिहार का सच
कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) ने बताया है कि किसानों को मक्का पैदा करने की लागत प्रति क्विंटल 1213 रुपये आती है. जबकि यहां व्यापारी इसे 1100-1200 में खरीदते हैं. हालांकि, भारत सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपये निर्धारित किया है.

किसानों का कहना है कि व्यापारी भरपूर शोषण करता है. अनलोडिंग और अपना 2 फीसदी गद्दी खर्च भी किसान के पैसे से ही काट लेता है. यहां तक कि जिस बोरे में किसान मक्का ले जाता है उसका पैसा भी नहीं देता.

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ऐसा तो बिहार में ही हो सकता है
मक्का किसानों को आगे बढ़ाने के लिए खगड़िया जिले में सरकार की मदद से प्रिस्टाइन मेगा फूड पार्क बनना था. इसमें मक्के से बनने वाली चीजों की 34 यूनिट लगाई जानी थी लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ. पार्क बना होता तो इसमें मक्के की खपत होती.

यह वही फूड पार्क है जिसका केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल (Harsimrat Kaur Badal) ने 29 नवंबर 2018 को उद्घाटन करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि निरीक्षण के दौरान उन्हें फूड पार्क का काम अधूरा पड़ा मिला था. इसके बाद केंद्र के अनुदान पर रोक भी लगा दी थी.
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