कोरोना काल के बाद मुनाफे की ओर बढ़ा था अंडा बाजार, अब नये संकट ने दी दस्तक

कोरोना वायरस महामारी के बाद अब अंडा मंडियों पर बर्ड फ्लू का खतरा मंडरा रहा है.

कोरोना वायरस महामारी के बाद अब अंडा मंडियों पर बर्ड फ्लू का खतरा मंडरा रहा है.

कोरोना वायरस महामारी की वजह से अंडे के कारोबार को भी तगड़ा झटका लगा था. अब इस अंडा बाजार के लिए एक और नये संकट ने दस्तक दी है. राजस्थान और हरियाणा में इसका असर देखने को मिल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2021, 10:31 PM IST
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नई दिल्ली. देश की दो बड़ी अंडा मंडियों में एक नये संकट ने दस्तक दी है. राजस्थान में हर रोज मर रहे पक्षियों ने पोल्ट्री (Poultry) फार्म कारोबारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. इसका कोई टीका और बचाव न होने के चलते भी कारोबारी डरे हुए हैं. जैसे-तैसे तो कोरोना के बाद अंडा बाज़ार (Egg Market) ने मुनाफे की राह पकड़ी थी, अब यह परेशानी आकर खड़ी हो गई. जानकारों की मानें तो अजमेर (Ajmer) और हरियाणा (Haryana) के बरवाला की अंडा मंडी बड़ी मंडियों में शुमार होती है. देश के दूसरे राज्यों समेत खासतौर से उत्तर भारत में इन दो मंडियों से अंडे की सबसे ज़्यादा सप्लाई है. बीते 24 घंटे में राजस्थान के 7 ज़िलों में 135 तो सिर्फ कौए मर चुके हैं.

2 करोड़ अंडे रोज़ की सप्लाई होती हैं अजमेर-बारवाला से

पोल्ट्री फार्म कारोबारी अनिल शाक्या की मानें तो हरियाणा की बरवाला मंडी से रोज़ाना 1.25 करोड़ से लेकर 1.5 करोड़ अंडे का कारोबार होता है. वहीं अजमेर मंडी से भी रोज़ाना 70 से 80 लाख अंडे की सप्लाई होती है. अब राजस्थान में बर्ड फ्लू की चर्चा के चलते अजमेर मंडी और बार्डर केस होने के चलते हरियाणा मंडी पर सबसे ज़्यादा खतरा मंडरा रहा है. राजस्थान की सीमा से यूपी के भी कई ज़िले जुड़े हुए हैं. अगर यूपी की बात करें तो पूरे राज्य से रोज़ाना 2.5 से 3 करोड़ अंडे का कारोबार है.

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संक्रामित हवा के संपर्क में आते ही मरने लगती हैं मुर्गियां

अनिल शाक्या ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया, पोल्ट्री फार्म बहुत बड़े-बड़े होते हैं. जगह-जगह शेड बनाए जाते हैं. अगर बर्ड फ्लू से संक्रामित हवा फार्म में सिर्फ दो शेड की तरफ से गुजरी है तो उसी शेड की मुर्गियां बीमार पड़ेंगी और मरने लगेंगी. लेकिन अगर किसी पोल्ट्री फार्म में 10 मुर्गी भी बर्ड फ्लू से मर गईं तो फिर ऐहतियात के तौर पर सभी मुर्गियों को खत्म करना पड़ता है. कोरोना में भी बीमारी न होने पर देशभर में करीब 40 फीसदी तक मुर्गियां खत्म कर दी गईं थी.
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