इस एक देश में जितनी बिजली की सप्लाई उतनी अकेले बिटकॉइन के बनाने में

बिटकॉइन से हर साल 38.10 एमटी (मिलिटन टन) कार्बन फुटप्रिंट पैदा हाेता

बिटकॉइन माइनिंग में न केवल भारी मात्रा में बिजली की खपत हाेती है. देखा जाए ताे आस्ट्रेलिया या बांग्लादेश में हाेनी वाली कुल बिजली खपत से भी ज्यादा बिटकॉइन में बिजली खर्च हाे रही है.

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    नई दिल्ली. करीब 350 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ बिटकॉइन (Bitcoin) दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) बन चुकी है. बीते सप्ताह क्रिप्टोकरेंसी ने फिर रिकॉर्ड तोड़ दिया थे और 60,000 डॉलर का नया ऑलटाइम हाई बनाया है. क्रिप्टोकरेंसी में तेजी से एक बिटकॉइन की कीमत भारतीय मुद्रा में 43.85  लाख रुपए हो गई है. हममें से ज्यादातर लाेग यही साेचते है कि बिटकॉइन (Bitcoin) एक वर्चुअल कंरसी है, जाे कि है भी. फिर भी इसे बनाने इसमें इतनी बिजली (electricity ) लगती है जाे किसी एक देश काे की जाने वाली आपूर्ति के बराबर है. साेच में पढ़ गए हाेंगे लेकिन यह बात सही है. 


    बिटकॉइन माइनिंग में बाेहत भारी मात्रा में बिजली की खपत हाेती है . देखा जाए ताे आस्ट्रेलिया या बांग्लादेश में हाेनी वाली कुल बिजली खपत से भी ज्यादा बिटकॉइन में बिजली खर्च हाे रही है. माइक्राेसॉफ्ट के काे-फाउंडर ने बिल गेट्स (Bill gates )ने यह बात कही थी बिटकॉइन के प्रति ट्रांजेक्शन (Per Transaction) में जितनी बिजली खर्च हाेती है उतनी किसी में नहीं लगती.


    डच इकनॉमिस्ट एलेक्स ड्री व्रीज की इसे लेकर की गई एक स्टडी में यह बताया था कि बिटकॉइन से हर साल 38.10 एमटी (मिलिटन टन) कार्बन फुटप्रिंट पैदा हाेता है इसे तुलना की जाए भारत से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का कार्बन फुटप्रिंट भी इससे कम है जाे कि करीब 32 एमटी है वही बेंगलाेर का ताे इससे भी कम करीब 21.50 एमटी है.जानकार बताते है कि हर बिटकॉइन ट्रांजेक्शन में औसतन करीब 300 किलाे कार्बन डाईऑक्साइड की जरूरत हाेती है जाे 750000 क्रेडिट कार्ड स्वाइप से निकले कार्बन फुटप्रिंट के बराबर है. 


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     कैसे हाेती है इतनी खपत बिटकॉइन में

    विशेषज्ञाें की माने ताे बिटकॉइन काे तैयार करने के इसके लिए हाई टेक कम्प्यूटर्स का लंबे समय तक इस्तेमाल करना हाेता है. जितने ज्यादा सिक्के उतना अधिक समय और उतनी ही बिजली की खपत. जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में बिटकॉइन नेटवर्क ने एक साल में 30 टेरवॉट आवर्स (TWh) बिजली का इस्तेमाल किया था. व्रीच की रिपाेर्ट के अनुसार अब यह खपत दाेगुनी हाे गई है. जाे कि 78 से 101 टेरावॉट आवर्स के बराबर है.


    क्या होता है बिटकॉइन?


    यह एक किस्म का डिजिटल या वर्चुअल टोकन होता है, जिसे काफी जटिल एल्गोरिदम को हल कर हासिल किया जाता. इस विख्यात क्रिप्टोकरेंसी का ट्रांसफर आसानी से मुफ्त में एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में संभव है.


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     बिटकॉइन कैसे करता है काम?

    अगर किसी भी व्यक्ति के पास बिटकॉइन है, तो इसकी कीमत और वैल्यू ठीक उसी तरह मानी जाएगी जैसे ईटीएफ में कारोबार करते समय सोने की कीमत मानी जाती है. इस बिटकॉइन से आप ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकते हैं और इसे निवेश के रूप में भी संभाल कर रख सकते हैं. आपको बता दें बिटकॉइन एक पर्सनल -वॉलेट से दूसरे पर्सनल -वॉलेट में ट्रांसफर कर सकते हैं.


    इसमें करना चाहिए निवेश या नहीं


    आपको बता दें खुदरा निवेशकों को बिटकॉइन से बचना चाहिए. फाइनेंशियल एजुकेटर और फिनसफे इंडिया के संस्थापक मृणाल अग्रवाल ने बिटकॉइन में निवेश को जुए के बराबर बताया है. वह कहती हैं कि ''यहां कोई अंडरलाइंग संपत्ति नहीं है, यह अन-रेगुलेटिड है. इसके अलावा मूल्य की खोज अप्रत्याशित है तो इससे दूर रहो.'