कोविड-19 की दवा Remdesivir की हो रही कालाबाजारी! वसूले जा रहे हैं 6 गुना दाम

कोविड-19 की दवा Remdesivir की हो रही कालाबाजारी! वसूले जा रहे हैं 6 गुना दाम
कोरोना वायरस के इलाज में कारगर मानी जा रही दवा Remdesivir की देश में शॉर्टेज हो गई है.

सिप्‍ला (Cipla) की कोरोना वायरस की दवा अभी तक बाजार में नहीं उतारी गई है. वहीं, हेटेरो (Hetero) की ओर से बाजार में उतारी गई 20,000 वायल (Vials) करीब-करीब खत्‍म हो चुकी हैं. 

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नई दिल्‍ली. देश में हर दिन कोविड-19 (COVID-19) के नए मामले सामने आ रहे हैं. अभी तक कोई भी देश कोरोना वैक्‍सीन (Corona Vaccine) या एक कारगर इलाज तैयार नहीं कर पाया है. हालांकि, ज्‍यादातर देशों ने रेमडेसिवीर (Remdesivir) को कोरोना के इलाज में फायदेमंद माना है. इसी बीच भारत में रेमडेसिवीर की कमी हो गई है. सरकारी और निजी अस्‍पतालों से ये दवा करीब-करीब नदारद हो गई है. यही नहीं, रेमडेसिवीर की कालाबाजारी (Black Marketing) भी शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि ब्‍लैक मार्केट में इसकी 6 गुना कीमत (Price) वसूली जा रही है.

नवी मुंबई में रहने वालेद 38 वर्षीय राजीव (बदला हुआ नाम) को 4 जुलाई को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई. उनके परिजन उन्‍हें नजदीकी निजी अस्‍पताल ले गए. उन्‍हें तुरंत ऑक्‍सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा. इसके बाद डॉक्‍टर्स ने कहा कि राजीव को रेमडेसिवीर की डोज दी जानी है. उन्‍हें पहले दिन 200 एमजी और उसके अगले 4 दिन 100 एमजी की डोज दी जानी है. साथ ही बताया कि अस्‍पताल में रेमडेसिवीर का स्‍टॉक खत्‍म हो चुका है. उन्‍हें ये दवा बाजार से लानी होगी.

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ब्‍लैक मार्केट में 100 एमजी के वसूले जा रहे हैं 30,000 रुपये
राजीव के परिवार की मुसीबत यहीं से शुरू हुई. वो जिस अस्‍पताल या डिस्‍ट्रीब्‍यूटर के पास गए उन्‍हें ये ही जवाब मिला कि दवा खत्‍म हो चुकी है और उन्‍हें 4-5 दिन इंतजार करना होगा. वहीं, ब्‍लैक मार्केट में उनसे 100 एमजी की वायल के 30,000 रुपये मांगे जा रहे थे, जो हेटेरो की इस दवा की खुदरा कीमत का करीब-करीब 6 गुना दाम हुआ. कुछ प्रभावशाली संपर्कों और सीधे कंपनी में बात करने पर उन्‍हें 2 डोज मिल पाईं, जो अगले दो दिन में खत्‍म हो जानी थीं. लेकिन हर व्‍यक्ति के इतने संपर्क नहीं होते कि वे सीधे कंपनी से संपर्क कर दवा जुटा सके.

बीएमसी अस्‍पतालों में शुरू नहीं हुआ रेमडेसिवीर का इस्‍तेमाल
मुंबई में सेवन हिल्‍स हॉस्पिटल को छोड़कर केईएम हॉस्पिटल, सायन हॉस्पिटल और नायर हॉस्पिटल जैसे बंबई म्‍युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) के अस्‍पतालों में रेमडेसिवीर का इस्‍तेमाल शुरू भी नहीं हुआ है. बता दें कि इन अस्‍पतालों में बड़ी संख्‍या में कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है. हालांकि, बताया जा रहा है कि बीएमसी ने हेटेरो को आर्डर दे दिया है और इन सभी अस्‍पतालों को बहुत जल्‍द ये दवा मिलने वाली है. यही हाल देश की राजधानी दिल्‍ली में भी है. यहां भी रेमडेसिवीर की कमी हो गई है.

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मैक्‍स हॉस्पिटल के पास मौजूदा मरीजों के लिए है पर्याप्‍त दवा
दिल्‍ली में मैक्‍स हॉस्पिटल ने बताया कि उनके पास मौजूदा मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिवीर का पर्याप्‍त स्‍टॉक है. वहीं, फोर्टिस की ओर से इस बारे में कोई जवाब नहीं मिला. दिल्‍ली और मुंबई में प्राइवेट हॉस्पिटल्‍स में इन दोनों अस्‍पतालों के पास कोविड-19 मरीजों के लिए सबसे ज्‍यादा बेड उपलब्‍ध हैं. एक व्‍यक्ति ने बताया कि एक तरफ रेमडेसिवीर की शॉर्टेज हो गई है और दूसरी तरफ बड़ा स्‍टॉक ब्‍लैक मार्केट पहुंचा दिया गया है, जहां इसे ऊंची कीमतों पर बेचा जा रहा है. बता दें कि भारत में करीब 7 लाख कोरोना मरीज हो चुके हैं.

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डीसीजीआई की ओर से दो हफ्ते पहले दी जा चुकी है मंजूरी
सिप्‍ला (Cipla) और हेटेरो (Hetero) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की ओर से कोविड-19 के इलाज में इस्‍तेमाल के लिए रेमडेसिवीर का जेनरिक वर्जन बनाने की अनुमति दो हफ्ते मिल चुकी है. इसके बाद भी सिप्‍ला की दवा अब तक बाजार में नहीं आ पाई है. वहीं, हेटेरो की ओर से बाजार में उतारे गए 20,000 वायल का शुरुआती स्‍टॉक करीब-करीब खत्‍म होने को है. हेटेरो को बीएमसी ने 15,000 और तमिलनाडु सरकार की ओर से 42,000 वायल का ऑर्डर मिल चुका है.

(ये खबर मनी कंट्रोल की कॉपी से अनुवाद की गई है. अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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