क्या होती है 'ब्लू इकोनॉमी'? आखिर क्यों है मोदी सरकार का इस पर खास फोकस

क्या होती है 'ब्लू इकोनॉमी'? आखिर क्यों है मोदी सरकार का इस पर खास फोकस
क्या होती है 'ब्लू इकोनॉमी'? आखिर क्यों है मोदी सरकार का इस पर खास फोकस

भारत (India Trade) के कुल बिजनेस का 90 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग (Ocean Routs) के जरिए होता है. अर्थशास्त्री बताते हैं कि समुद्री रास्तों, नए बंदरगाहों और समुद्री सामरिक नीति के जरिये अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना ही ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) कहलाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2019, 5:16 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने अपने भाषण में 'ब्लू इकोनॉमी' (Blue Economy) के बारे में बताया था कि देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर (5 लाख करोड़ डॉलर) तक पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है. इस पर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि भारत के कुल व्यापार का तकरीबन 90 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग से ही होता है. ऐसे में ब्लू इकोनॉमी न केवल भारत के लिए सामरिक बल्कि आर्थिक लिहाज से बेहद फायदेमंद है. आइए जानते हैं आखिर क्या है ब्लू इकोनॉमी और कैसे मिलेगा देश को इसका फायदा.

आपको बता दें कि हर साल सितंबर के अंतिम हफ्ते में जो बृहस्पतिवार होता है उसी दिन विश्व समुद्री दिवस मनाया जाता है. सन 2018 में 27 सितंबर को मनाया गया था को प्रतिवर्ष विश्व समुद्री दिवस के रूप में मनाया था इस साल 26 सितंबर को मनाया जा रहा है इसके द्वारा शिपिंग सुरक्षा के महत्व समुद्री सुरक्षा, समुद्री वातावरण और समुद्री उद्योग पर प्रकाश डाला जाता है.

इसीलिए आज हम आपको  ब्लू इकोनॉमी और इससे कैसे देश को फायदा होने वला है...



ब्लू इकोनॉमी क्या है- भारत के कुल बिजनेस का 90 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग के जरिए होता है. अर्थशास्त्री बताते हैं कि समुद्री रास्तों, नए बंदरगाहों और समुद्री सामरिक नीति के जरिये अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना ही ब्लू इकोनॉमी कहलाता है.





>> इसीलिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आने वाले दिनों में इसी पर फोकस करने जा रही है. भारत के लिए समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद है, क्योंकि भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा है ऐसे में ब्लू इकोनॉमी पर फोकस करना अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.

>> आपको बता दें कि ब्लू इकोनॉमी समुद्री इलाकों पर तो आधारित होती है, लेकिन साथ ही इसमें पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही काम किया जाता है.



अब क्या होगा-  कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर सुब्रमण्यम पशुपति ने न्यूज18 हिंदी को बताया है कि  ब्लू इकोनॉमी के तहत भारत भी आने वाले सालों में समुद्री रास्तों और पोर्ट्स के रखरखाव और सुरक्षा पर अतिरिक्त ध्यान देने वाला है.

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>> इस एजेंडे के तहत समुद्र में पर्यावरण के अनुकूल इंफ्रास्टक्चर तैयार किया जाएगा. गौरतलब है कि नीति आयोग ने भी ब्लू इकोनॉमी के मद्देनज़र एक प्रस्ताव तैयार किया था जिसमें लंबी समुद्री सीमाओं के उपयोग से व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही गई थी.



 

>> भारत के कुल व्यापार का 90% हिस्सा अभी भी इन्हीं समुद्री मार्गों के जरिये होता है, लेकिन इन्हें और सक्षम बनाया जा सकता है.

ब्लू इकोनॉमी बिजनेस मॉडल कैसे काम करता है- अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इसमें सबसे पहले समुद्र आधारित बिजनेस मॉडल तैयार किया जाता है, साथ ही संसाधनों को ठीक से इस्तेमाल करने और समुद्री कचरे से निपटने के डायनामिक मॉडल पर कम किया जाता है.



>> दुनिया में पर्यावरण फिलहाल एक बड़ा मुद्दा है ऐसे में ब्लू इकोनॉमी को अपनाना इस नज़रिये से भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.

>> अर्थशास्त्री बताते हैं कि ब्लू इकोनॉमी फोकस खनिज पदार्थों समेत समुद्री उत्पादों पर होता है. समुद्र के जरिये व्यापार का सामान भेजना ट्रकों, ट्रेन या अन्य साधनों के मुकाबले पर्यावरण की दृष्टि से बेहद साफ-सुथरा साबित होता है.
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