DHFL के प्रोमोटर्स को देश छोड़ने पर लगा रोक, जाने क्या है मामला

DHFL के प्रोमोटर्स को देश छोड़ने पर लगा रोक, जाने क्या है मामला
दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL)

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने DHFL से जुड़े एक याचिका की सुनवाई के दौरान प्रोमोटर धीरज वाधवान (Dheeraj Wadhwan) और कपिल वाधवान (Kapil Wadhwan) को अगले आदेश तक विदेश जाने पर रोक लगा दिया है.

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नई दिल्ली. बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने गुरुवार को दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) के प्रवर्तक धीरज वाधवान और कपिल वाधवान पर अगले आदेश तक देश छोड़ने पर रोक लगा दी. 63 मून्स टेक्नोलॉजीज (63 Moons Technology) की 200 करोड़ रुपये बकाये की वसूली को लेकर दायर याचिका पर उच्च न्यायालय ने यह रोक लगायी.

200 करोड़ रुपये लौटाने को लेकर याचिका
न्यायाधीश एस जे कत्थवाला ने कहा कि अगर वे (दोनों वाधवान) देश छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें उच्च न्यायालय से मंजूरी लेनी होगी. पीठ जिग्नेश शाह प्रवर्तित 63 मून्स टेक्नोलॉजीज की याचिका पर सुनवाई कर रही है. याचिका में DHFL पर बकाया करीब 200 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है. साथ ही यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि प्रवर्तक धीरज वाधवान और उनके भाई कपिल वाधवान देश छोड़ नहीं पाये.

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कोष जुटाने के लिए विदेश जा सकते हैं वाधवान
इससे पहले, DHFL ने अदालत से कहा था कि वाधवान कोष जुटाने के लिये विदेश जा सकते हैं. हालांकि, 63 मून्स ने आशंका जताते हुए कहा कि अगर वाधवान बंधुओं को देश छोड़ने की अनुमति दी जाती है तो वे भाग सकते हैं. 63 मून्स ने डीएचएफएल के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर लिया था. लेकिन वित्तीय संस्थान कंपनी को राशि लौटाने में नाकाम रही.

ED कर रहा DHFL के खिलाफा जांच
उसके बाद कंपनी ने अदालत में अर्जी दी. डीएचएफएल ने याचिका की स्वीकार्यता को चुनौती दी. उसने अपनी दलील में कहा कि बांडधारकों के न्यासियों ने बकाये की वसूली को लेकर पहले ही कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) की पुणे पीठ में आवेदन दिया है, ऐसे में इस याचिका को यहां विचार के लिये स्वीकार नहीं किया जा सकता. प्रवर्तन निदेशालय कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर डीएचएफएल के खिलाफ जांच कर रहा है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिये 14 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है.

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