चीनी कंपनियों को लगा बड़ा झटका! अब भारत में नहीं ले पाएंगी हाईवे प्रोजेक्ट, सरकार का फैसला

नितिन गडकरी
नितिन गडकरी

भारत के हाईवे प्रोजेक्ट में अब चीनी कंपनियां शामिल नहीं हो पाएंगी. केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने इसकी जानकारी दी.

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नई दिल्ली. भारत और चीन के जारी तनाव के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Minister of Road Transport & Highways, Micro, Small & Medium Enterprises) ने कहा है कि भारत के हाईवे प्रोजेक्ट में चीन की कंपनियां शामिल नहीं हो पाएंगी. अगर वो किसी भारतीय या फिर अन्य कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाकर भी बोली लगाती हैं तो भी उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा. गडकरी ने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि चीनी निवेशकों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी निवेश से रोका जाए.

चीन की कंपनियों पर लगी रोक- नितिन गडकरी ने पीटीआई को बताया है कि हम सड़क निर्माण के लिए चीनी भागीदारों वाले संयुक्त उद्यमों को अनुमति नहीं देंगे. हमने कड़ा रुख अपनाया है कि अगर वे (चीनी कंपनियां) संयुक्त उद्यम के जरिए आते हैं, तो हम इसकी अनुमति नहीं देंगे. गडकरी ने बताया कि जल्द इससे जुड़ी नई नीति आएगी. जिसमें चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और भारतीय कंपनियों को राजमार्ग परियोजनाओं में ढील देने के नियम तय किए जाएंगे.

अभी चल रहे प्रोजक्ट का क्या होगा- मौजूदा समय में  कुछ ही परियोजनाएं जो बहुत पहले की गई थीं उनमें कुछ चीनी कंपनियां शामिल हैं. गडकरी ने कहा कि ये फैसला नए प्रोजेक्ट पर लागू होगा.



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BSNL ने रद्द किया चीनी कंपनी का टेंडर- टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL (Bharat Sanchar Nigam Limited) के 4G अपग्रेडेशन के लिए जारी किया गया टेंडर रद्द कर दिया है. केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनी से अपग्रेडेशन के लिए चीनी उपकरणों का इस्तेमाल करने से मना किया था, जिसके बाद अब टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने अपग्रेडेशन के लिए जारी टेंडर को रद्द कर दिया है. अब नया टेंडर जारी किया जाएगा.


नए टेंडर में इस क्षेत्र में भारतीय क्षमता को बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर होगा. इसी हिसाब से नया टेंडर जारी किया जाएगा. इसमें मेक इन इंडिया के मिशन को बढ़ावा देने की योजना है. ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि इस नए टेंडर में अपग्रेडेशन के लिए उपकरण उपलब्ध कराने वाली चीनी कंपनियों को लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा.
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