BPCL समेत इन सरकारी कंपनियों को बेचने में हो रही है देरी, अब इस वजह से 3 महीने बाद किए जाएंगे प्राइवेट!

100 सरकारी संपत्तियों का मौद्रिकरण किया जाएगा.

100 सरकारी संपत्तियों का मौद्रिकरण किया जाएगा.

कोरोनावायरस की दूसरी लहर (Second Wave of corona) के चलते सरकार विनिवेश लक्ष्य ( Divestment Target) को समय पर पूरा नहीं कर पा रही है. सरकार BPCL, Air India समेत कई सरकारी कंपनियों को बेचकर पूंजी जुटाना चाहती है.

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नई दिल्ली. कोरोनावायरस की दूसरी लहर (Second Wave of corona) के चलते सरकार विनिवेश लक्ष्य ( Divestment Target) को समय पर पूरा नहीं कर पा रही है. सरकार BPCL, Air India समेत कई सरकारी कंपनियों को बेचकर पूंजी जुटाना चाहती है. फिलहाल इस प्रक्रिया में कम से कम 3 महीने की देरी हो सकती है. CNBC की खबर के मुताबिक, BPCL के विनिवेश प्रक्रिया में कम से कम 3 महीने की देरी हो सकती है. बता दें कि सरकार BPCL में अपनी पूरी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.

देरी की वजह है कोरोना

गौरतलब है कि बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार का इस साल का विनिवेश लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपये है. सरकार इस विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2 पीएसयू बैंक और एक इंश्योरेंस कंपनी समेत पब्लिक सेक्टर की कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने जा रही है. पीएसई पॉलिसी पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा था कि IDBI बैंक, BPCL, शिपिंग कॉर्प, कंटेनर कॉर्पोरेशन, नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड समेत कई अन्य कंपनियों की रणनीतिक बिक्री 1 अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष 2021-22 में की जाएगी. वहीं, LIC IPO लाए जाएंगे.


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सितंबर तक बिकेगा एयर इंडिया

सितंबर तक एयर इंडिया के लिए फाइनेंशियल बिडिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. माना जा रहा है कि मार्च 2022 तक (वित्त वर्ष 2021-22 की समाप्ति) एयर इंडिया और BPCL के लिए ट्रांजैक्शन पूरे हो जाएंगे. एयर इंडिया को खरीदने के लिए बता दें कि टाटा ग्रुप की सबसे मजबूत दावेदारी है. वहीं, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और BEML की विनिवेश प्रक्रिया पर भी असर हुआ है.



2.5 लाख करोड़ रु जुटाएगी सरकार

हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसेट मॉनेटाइजेशन स्‍कीम (AMS) के तहत बेकार पड़ी हुई या आधी-अधूरी इस्‍तेमाल हुई 100 सरकारी संपत्तियों का मौद्रिकरण किया जाएगा. इससे सरकार को 2.5 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे, जिनका इस्‍तेमाल आम लोगों पर किया जाएगा. साथ ही प्राइवेट सेक्‍टर को लेकर निजी क्षेत्र से दक्षता आती है और लोगों को रोजगार (Employment) मिलेगा.

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इकोनॉमी में तेजी आएगी!

बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सरकार को पैसे की जरूरत है और इसके लिए सरकार तेजी से विनिवेश की प्रक्रिया में बढ़ना चाहती है. हालांकि कोरोना का कारण इस प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो रही है.

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