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भारत के COVID-19 टीकाकरण अभियान में लैंगिक असमानता को पाटना

भारत के COVID-19 टीकाकरण अभियान में लैंगिक असमानता को पाटना

भारत में COVID-19 टीकाकरण अभियान

भारत में COVID-19 टीकाकरण अभियान

भारत में COVID-19 टीकाकरण अभियान ने अपने शुरूआत के दिनों के बाद से पिछले नौ महीनों में काफी तेज़ी दिखाई है. अब तक कुल 87 करोड़ डोज़ लगाई जा चुकी हैं. हाल के दिनों में, टीकाकरण के आंकड़ों ने टीकाकरण की खुराक में लैंगिक असमानता की ओर ध्यान आकर्षित किया है.

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    नई दिल्ली. अब तक दी गई कुल खुराक में से 45.14 करोड़ खुराक पुरुषों को और 41.51 करोड़ खुराक महिलाओं को दी गई हैं यानी कुल खुराक का 51.88% पुरुषों को और 47.70% महिलाओं को दिया गया है. पुरुषों को महिलाओं की तुलना में तीन करोड़ से अधिक खुराक मिली हैं. भारत में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है. हालांकि, हिंदुस्तान टाइम्स के एक विश्लेषण ने इसे असमानता के संभावित कारण के रूप में खारिज कर दिया है.

    अभियान की शुरुआत में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं वैक्सीनेशन कवरेज का हिस्सा नहीं थीं. अब इस समूह के लिए भी वैक्सीन लगवाना सुरक्षित माना गया है, लेकिन फिर भी अभी तक इसके बारे में मिथ चल रहे हैं, जिससे कई गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं वैक्सीन लगाने से हिचकिचा रही हैं. मासिक धर्म और वैक्सीन के बारे में भी गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं, जिसके कारण महिलाएं मासिक धर्म के दौरान जैब लेने से डर रही हैं.

    एक और व्यापक मिथक यह है कि प्रजनन क्षमता पर भी वैक्सीन का प्रभाव पड़ता है, जो विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के बीच घूम रहा है. उन्हें डर है कि टीका गर्भ धारण करने और बच्चा पालने की उनकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है, यह मिथ भी उन्हें टीका लगवाने से रोक रहा है. जागरूकता के पर्याप्त संसाधन और प्रयास होने के बावजूद, देश के ग्रामीण इलाकों में लोग इन अफवाहों पर विशवास करते हुए वैक्सीन से कटे हुए हैं.

    कई घरों में, अभी भी केवल पुरुष ही एक कमाने वाला सदस्य है. काम पर जाने के लिए उन्हें वैक्सीन लगवानी ही पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण केंद्र गांवों से काफी दूर-दूर हैं, यह भी एक अन्य कारक है जिसे महिलाओं के लिए बाधा माना जा सकता है. आज भी कई घरों में, महिलाओं को घर से बाहर जाने के लिए घर के पुरुषों और बड़ों से इजाजत लेनी पड़ती है और अक्सर वे टीकाकरण केंद्र जैसी जगहों पर अकेले आने-जाने में असमर्थ होती हैं.

    परिवार के किसी अन्य पुरुष सदस्य की अनुपस्थिति में वे स्वयं वैक्सीन नहीं लगवा पा रही हैं. चूंकि पूरे परिवार को सम्भालने की जिम्मेदारी महिलाओं की होती है, इसलिए वे स्वंय भी वैक्सीन को टाले जा रही हैं, ताकि इसके बाद के साइड इफेक्ट के कारण घर का काम प्रभावित न हो. इसके अलावा, कई घरों में महिलाओं के पास स्मार्टफोन नहीं हैं. टेक्नोलॉजी से यह दूरी भी महिलाओं में वैक्सीनेशन को प्रभावित कर रही है क्योंकि वो इसके लिए स्वंय रजिस्टरेशन नहीं कर पाती हैं.

    टीकाकरण अभियान के शुरुआती महीनों में लैंगिक असमानता काफी अधिक थी, लेकिन अब यह अंतर धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है. आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक संख्या में वैक्सीन की खुराक दी है.

    कम आय वाले और ग्रामीण समुदायों के लोगों को वैक्सीनेशन उपलब्ध कराने के लिए की जा रही पहलों से महिलाओं को भी लाभ होने की संभावना है. कुछ राज्यों में, गांवों और समुदायों में विकेन्द्रित टीकाकरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को वैक्सीन के लिए लंबी दूरियां तय न करनी पड़े. इससे महिलाओं को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. टीकाकरण केंद्र अब ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन और वॉक-इन स्लॉट की अनुमति दे रहे हैं. इसलिए, जो महिलाएं को-विन पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कर पा रही थीं, वे भी अब सीधे केंद्र में जाकर वैक्सीन लगवा सकती हैं. मुंबई में, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, शहर के टीकाकरण केंद्रों में वॉक-इन टीकाकरण अभियान का आयोजन किया गया था.

    भले ही ये लैंगिक अंतर को पाटने के बढ़िया उपाय हैं, लेकिन इन प्रयासों को राज्यों में तेज करने की आवश्यकता है ताकि टीकों को वास्तव में सभी के लिए समान रूप से सुलभ बनाया जा सके. राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता पैदा करने और अधिक से अधिक महिलाओं को टीकाकरण केंद्रों में लाने पर जोर देने का काम किया जाना चाहिए. मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अन्य सामाजिक और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. यही वह समय जब सदियों पुरानी लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने और देश में महिलाओं के स्वास्थ्य और भलाई को प्राथमिकता देना आवश्यक है.
    वर्तमान में, को-विन डैशबोर्ड पर “अन्य” की श्रेणी में शामिल ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी, जेंडर फ्लूइड आदि लोगों के लिए टीकाकरण को लेकर सीमित डेटा उपलब्ध है. इस समूह को 191690 टीकों की खुराक दी जा चुकी है.

    Tags: Covid-19 Case, Covid-19 Vaccinations, Covid-19 Vaccines

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