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MTNL के 22,000 कर्मचारियों को नहीं मिली सैलरी, BSNL के एंप्लॉइज की सैलरी भी खतरे में

MTNL-BSNL के कर्मचारियों को नहीं मिली सैलरी

BSNL और MTNL के कर्मचारियों की सैलरी पर एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है. CNBC आवाज़ की एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक MTNL के कर्मचारियों की पिछले महीने की सैलरी भी नहीं मिली है.

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    नकदी संकट से जूझ रही सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL और MTNL में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर. दरअसल BSNL और MTNL के कर्मचारियों की सैलरी पर एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है. CNBC आवाज़ की एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक MTNL के कर्मचारियों की पिछले महीने की सैलरी भी नहीं मिली है. वहीं बीएसएनएल के एंप्लॉइज को जुलाई की सैलरी मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. इसके साथ ही खबर ये भी है कि दोनों कंपनियों ने वेंडर्स को पैसे देने भी बंद कर दिए हैं.

    बीएसएनएल का इतना है लॉस?
    इस सरकारी कंपनी पर फिस्कल ईयर 2015-16 में 4859 करोड़ रुपये का प्रोविजनल लॉस था. यह 2016-17 में मामूली कमी के साथ 4793 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद 2017-18 में यह बढ़कर 7993 करोड़ रुपये हो गया. 2018-19 में यह लॉस बढ़कर लगभग डबल हो गया. इस दौरान इसका आंकड़ा 14,202 करोड़ रुपये रहा.

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    संसद को दी गई जानकारी में टेलीकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने बताया कि मोबाइल सेगमेंट में प्रतियोगिता बढ़ने के कारण टैरिफ घटा है. साथ ही स्टाफ कॉस्ट और 4G सर्विस (कुछ इलाकों को छोड़कर) ना होने के कारण कंपनी को लॉस हो रहा है. BSNL और MTNL के बहीखातों की हालत काफी खराब है और सरकार इन्हें रिवाइव करने की कोशिश कर रही है.



    MTNL और BSNL मिलाकर 1.85 लाख से ज्यादा कर्मचारी
    आधिकारिक डेटा के अनुसार, 31 मार्च, 2019 तक बीएसएनएल में कुल 1,63,902 कर्मचारी काम कर रहे थे. इनमें से 46,597 एक्जीक्यूटिव क्लास के और 1,17,305 नॉन-एक्जीक्यूटिव क्लास के थे. वहीं MTNL के कर्मचारियों की संख्या 21,679 है. इनमें से 3,128 कर्मचारी एक्जीक्यूटिव जबकि 18,551 कर्मचारी नॉन-एक्जीक्यूटिव पदों पर थे.

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    सरकार बना रही है इन्हें संकट से उबारने की व्यापक योजना
    कुछ ही समय पहले रविशंकर प्रसाद ने यह बताया था कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद और डेलॉइट बीएसएनएल और एमटीएनएल को उबारने/ उसके पुनर्गठन की योजना पर काम कर रहा है. उनके सुझावों और उनके बोर्ड के पास किए प्लान के हिसाब से BSNL और MTNL के लिए एक व्यापक प्लान को तैयार करने में जुटी है. घाटे में चल रही टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी आर्थिक तंगी की हालत में तुरंत मदद के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम से संपर्क किया था.

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