अभी नहीं होगा BSNL-MTNL का विलय! समिति ने पहले कई ठोस कदम उठाने की सिफारिश की

अभी नहीं होगा BSNL-MTNL का विलय! समिति ने पहले कई ठोस कदम उठाने की सिफारिश की
केंद्र सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय को पिछले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी.

केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि MTNL को BSNL की सहयोगी कंपनी बना दिया जाए. इसके लिए सरकार एमटीएनएल में अपनी हिस्‍सेदारी (Government Shareholding) बीएसएनएल को ट्रांसफर करेगी. इससे वियल (Merger) होने तक दोनों के नेटवर्क ऑपरेशन में तालमेल बन जाए.

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) का भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) में विलय (Merger) करना चाहती है. फिलहाल सरकार (Central Government) की ये कोशिश सिरे चढ़ती नहीं दिख रही है. अभी इसमें कुछ देरी होने के आसार नजर आ रहे हैं. दरअसल, विलय की प्रक्रिया के लिए सरकार की ओर से नियुक्‍त की गई सलाहकार समिति (Panel) ने सुझाव दिया है कि पहले दिल्‍ली (Delhi) और मुंबई (Mumbai) में बीएसएनएल को 2G और 4G स्‍पेक्‍ट्रम आवंटित किया जाए ताकि कंपनी पूरे देश में सेवाएं (Pan-India Services) मुहैया कराना शुरू कर सके.

केंद्र ने 70,000 करोड़ के रिवाइवल प्‍लान को दी थी मंजूरी
बीएसएनएल इस समय देश के 20 टेलीकॉम सर्किल (Telecom Circles) में सेवाएं मुहैया कराती है. वहीं, एमटीएनएल बाकी दोनों सर्किल दिल्‍ली और मुंबई में मौजूद है. ये टेलीकॉम सर्किल राज्‍यों से जुड़े होते हैं. सलाहकार समिति का मानना है कि इस विलय से नई कंपनी पर 45,000 करोड़ रुपये के कर्ज की देनदारी (Outstanding Debt) हो जाएगी. इससे नई कंपनी मुसीबत में पड़ सकती है. केंद्र सरकार ने पिछले साल बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए 70,000 करोड़ रुपये के रिवाइवल प्‍लान को मंजूरी दे दी थी. साथ ही दोनों कंपनियों के विलय की सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी थी.

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सरकार ने पिछले साल ही दे दी थी विलय को सैद्धांतिक मंजूरी


सरकार ने पिछले साल तय किया था कि एमटीएनएल बीएसएनएल की सहयोगी कंपनी बन जाएगी. इसके लिए सरकार एमटीएनएल की अपनी हिस्‍सेदारी बीएसएनएल को ट्रांसफर कर देगी. इससे विलय की प्रक्रिया पूरी होने के पहले ही दोनों कंपनियों के नेटवर्क ऑपरेशंस और सेल्‍स में तालमेल हो जाएगा. इसके बाद सरकार ने डेलॉयट हस्किंस एंड सेल्‍स एलएलपी को कैबिनेट का फैसला लागू करने के लिए विभिन्‍न व्‍यवहारिक विकल्‍पों का सुझाव देने की जिम्‍मेदारी दी. साथ ही विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी के सामने पेश आने वाली चुनौतियों पर सुझाव देने की भी जिम्‍मेदारी दी गई.

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बीएसएनएल-एमटीएनएल पर बकाया कर्ज है 45,000 करोड़
समिति ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में विलय से पहले कुछ ठोस कदम उठाने की सिफारिश की. डेलॉयट की ओर से की गई इन सिफारिशों में बीएसएनएल को 2G और 4G आवंटन करने, एमटीएनएल की रियल एस्‍टेट एसेट्स की बिक्री और एमटीएनएल को डीलिस्‍ट करना शामिल थीं. बता दें कि वित्‍त वर्ष 2018-19 के लिए एमटीएनएल पर 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था. इसकी फाइनेंसिंग कॉस्‍ट 1,703.18 करोड़ रुपये है. वहीं, बीएसएनएल पर भी करीब इतना ही बकाया है. ऐसे में विलय होने पर नई कंपनी पर 45,000 करोड़ रुपसे से ज्‍यादा का कर्ज होगा.
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