Budget Pathshala: जानिए क्या होता है फिस्कल डेफिसिट, समझिए आसान भाषा में

Budget 2019: वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में जिस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल करेंगी वो वित्तीय घाटा यानी फिस्कल डेफिसिट होगा. इस पर देश के कारोबारियों के साथ-साथ शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों की भी नज़र रहती है.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 11:26 AM IST
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Updated: June 12, 2019, 11:26 AM IST
Budget 2019: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश होगा. इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं.देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसको पेश करेंगी. बजट में ऐसे कई शब्दों के इस्तेमाल होते हैं जो हमारी आम जानकारी में नहीं होते हैं. हालांकि इनसे परिचित होना बहुत जरूरी है क्योंकि बजट सीधे आपसे जुड़ा है और यह बजट आपके घर के खर्चे भी निर्धारित करता है.

वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में जिस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल करेंगी वो वित्तीय घाटा यानी फिस्कल डेफिसिट होगा. इस पर देश के कारोबारियों के साथ-साथ शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों की भी नज़र रहती है.



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फिस्कल डेफिसिट (वित्तीय घाटा) क्या होता है-अगर आसान भाषा में कहे तो सरकार जितना कमाती है. मतलब जो भी पैसा टैक्स और अन्य चीजों पर वसूलती है. वहीं, उससे ज्यादा खर्च कर देती है. कमाई कम और ज्यादा खर्च के बीच जो अंतर आता है, उसे वित्तीय घाटा कहते हैं.

सरकार कैसे करती है वित्ती घाटे की भरपाई- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सरकार उधार लेकर, विदेशी निवेशकों से पैसा लेकर, बॉन्ड या सिक्योरिटीज जारी करके सरकार इस वित्तीय घाटे की भरपाई कर लेती है.

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क्या होता है वित्तीय घाटे के बढ़ने से-वित्तीय घाटे के बढ़ने का मतलब है कि सरकार की उधारी बढ़ेगी. और अगर उधारी बढ़ेगी तो सरकार को ब्याज भी ज्यादा देना होगा. अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए वित्तीय घाटे को काबू में रखना बेहद जरूरी है.
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इन लोगों की वित्ती घाटे पर रहती हैं नज़र-पिछले बजट में वित्त मंत्री ने कहा था कि वित्तीय घाटा  जीडीपी का 3.3 फीसदी रहेगा. अगर घाटा इसके आसपास रहता है तो ठीक है, लेकिन जरूरत से ज्यादा वित्तीय घाटा होना शेयर बाजार को परेशान करता है. ऐसे में इस आंकड़ें के बाद शेयर बाजार तेज प्रक्रिया देता है.

जीडीपी के फीसदी में फिस्कल डेफिसिट की तुलना की जाती है. अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए फिस्कल डेफिसिट पर काबू रखना जरूरी होता है.
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