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Budget 2019: घर खरीदारों की मांग, अटके प्रोजेक्ट्स के लिए बने 10 हजार करोड़ का फंड

Budget 2019: घर खरीदारों की मांग, अटके प्रोजेक्ट्स के लिए बने 10 हजार करोड़ का फंड

अटके प्रोजेक्ट्स के लिए बने 10 हजार करोड़ का फंड

अटके प्रोजेक्ट्स के लिए बने 10 हजार करोड़ का फंड

सरकार को बजट में देशभर में अटके पड़े रेजिडेंशियल प्रोजक्ट्स को पूरा करने के लिये 10,000 करोड़ रुपये का एक अलग कोष बनाना चाहिए ताकि ऐसे प्रोजेक्ट्स में संपत्ति बुक कराने वाले 5 लाख से अधिक लोगों को राहत पहुंचाई जा सके.

    सरकार को आगामी आम बजट (Budget) में देशभर में अटके पड़े रेजिडेंशियल प्रोजक्ट्स को पूरा करने के लिये 10,000 करोड़ रुपये का एक अलग कोष बनाना चाहिए ताकि ऐसे प्रोजेक्ट्स में संपत्ति बुक कराने वाले 5 लाख से अधिक लोगों को राहत पहुंचाई जा सके. घर खरीदारों के संगठन FPCE ने यह मांग की है. वित्त मंत्री को बजट के लिए दिये गए सुझाव में फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने कहा है कि घर खरीदारों को प्राथमिक सुरक्षित कर्जदाता माना जाना चाहिए. FPCE को इससे पहले रेरा (RERA) कानून बनाने के लिये संघर्ष करने वाले मंच के तौर पर जाना जाता रहा है.

    रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लिए अलग फंड की मांग
    FPCE के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने वित्त मंत्री को भेजे सुझाव में कहा है, आप जानते हैं कि पांच लाख से अधिक घर खरीदारों की जीवन भर की कमाई विभिन्न रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में फंसी हुई है. इन प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने प्राप्त धन को कहीं और इस्तेमाल किया जिसकी वजह से अनिश्चितकालीन देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि बजट में यदि इस तरह के आवासीय प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिये अलग फंड रखा जाता है तो घर खरीदारों को सुकून और काफी राहत पहुंचेगी.

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    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम ज्ञापन में कहा गया है कि रीयल्टी सेक्टर के लिये रेरा कानून बनने के बावजूद कई प्रोजेक्ट्स पर काम देरी से चल रहा है और ये समय पर पूरी नहीं हो रहे हैं. अब समय आ गया है जब सरकार को देश भर में ऐसे पेंडिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिये बजट में दस हजार करोड़ रुपये का एक अलग फंड बनाने की आवश्यकता है.

    सेक्टर की ग्रोथ के आड़े आ रहे हैं पेंडिंग प्रोजेक्ट्स
    इस फंड को बनाने का मकसद अगले पांच साल के दौरान देशभर में अटकी पड़ी प्रोजेक्ट्स को पूरा करना होना चाहिये. FPCE ने कहा है कि सरकार के इस कदम से रीयल एस्टेट क्षेत्र में स्थिति साफ होगी, विकास कार्य तेज होंगे, क्षेत्र में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और रेरा के मजबूती के साथ अमल में लाने के लिए आगे से इस तरह प्रोजेक्ट्स के लंबित होने की गुंजाइश नहीं होगी. FPCE का कहना है कि प्रोजेक्ट्स में देरी रीयल एस्टेट क्षेत्र की वृद्धि के आड़े आने वाली सबसे बड़ी समस्या है.

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    Tags: Budget 2019, Business news in hindi, Buying a home, Finance Minister, Modi government, Modi Government Budget, Nirmala sitharaman, Union Budget 2019

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