किसानों को 8 हजार रुपये सालाना मिले आर्थिक मदद- रिपोर्ट

Budget 2019: 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार को आगामी बजट में निवेश उद्देश्य के लिए एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव मुहैया कराने की भी जरूरत है.

News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 5:55 PM IST
किसानों को 8 हजार रुपये सालाना मिले आर्थिक मदद- रिपोर्ट
किसानों को 8 हजार रुपये सालाना मिले आर्थिक मदद- रिपोर्ट
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Updated: June 26, 2019, 5:55 PM IST
बजट 2019 में कृषि क्षेत्र के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं. 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार को आगामी बजट में निवेश उद्देश्य के लिए एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव मुहैया कराने की भी जरूरत है. यह बात SBI की इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट में कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव या तो ब्याज सब्सिडी या फिर क्रेडिट गारंटी फंड के लिए मैकेनिज्म बनाकर उपलब्ध कराया जा सकता है.

8000 रुपये की जाए किसानों की आर्थिक मदद
आगे कहा गया कि कृषि क्षेत्र के लंबी अवधि फायदों के लिए सरकार को किसानों को प्रदान की जाने वाली आर्थिक मदद को 5 सालों में 6000 रुपये सालाना से बढ़ाकर 8000 रुपये करने की कोशिश करनी चाहिए. हमारा मानना है कि आर्थिक मदद स्कीम देश के 14 करोड़ किसानों की आय और उनका जीवन-स्तर बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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नहीं बढ़ेगा वित्तीय बोझ
इकोरैप रिपोर्ट की कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर वक्त-वक्त पर बढ़ोत्तरी कर किसानों की आर्थिक मदद की राशि को 6000 रुपये से बढ़ाकर 8000 रुपये कर दिया जाता है और वित्तीय घाटा में घटकर जीडीपी का 3 फीसदी हो जाता है तो 14 करोड़ गरीब किसानों के लिए अतिरिक्त लागत 12,000 करोड़ सालाना ही बैठेगी.

रिपोर्ट में कहा गया कि चूंकि हम फिर ग्रोथ दर्ज कर रहे हैं, आर्थिक मदद के साथ भी वित्तीय घाटा घटकर वित्त वर्ष 2024 में जीडीपी के 3 फीसदी पर आ सकता है. इसकी वजह है कि जीडीपी भी घटकर 0.40 फीसदी से 0.34 फीसदी पर आ रही है.
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PMFBY के तहत कवर की जाएं सभी फसल
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय संस्थाएं व सरकार किसानों को फसल उगाने से लेकर बेचने तक में मार्केट सपोर्ट प्रदान कर उनकी मदद कर सकते हैं.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) इस वक्त मुख्य रूप से तीन तरह की फसल- फूड क्रॉप, ऑयलसीड्स, सालाना कमर्शियल/हॉर्टीकल्चर क्रॉप्स को कवर करती है. इसके चलते बैकों द्वारा दिए जाने वाले फसल लोन में से केवल 30 फीसदी ही PMFBY के तहत कवर हो पाते हैं. सरकार को हर तरह की फसल को PMFBY के तहत कवर करना चाहिए. इससे बैंकों को रिस्क मैनेज करने में मदद होगी.
First published: June 23, 2019, 2:32 PM IST
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