एक रुपये के जरिए जानिए सरकारी खजाने में कहां से आएगा पैसा और कहां होगा खर्च!

मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश कर दिया है. वित्त मंत्री ने बजट भाषण की शुरुआत में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई आंकड़ों का जिक्र किया.आज हम आपको '1 रुपये' से अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर दिखाते हैं.

News18Hindi
Updated: February 2, 2019, 6:08 PM IST
एक रुपये के जरिए जानिए सरकारी खजाने में कहां से आएगा पैसा और कहां होगा खर्च!
एक रुपये के जरिए जानिए सरकारी खजाने में कहां से आएगा पैसा और कहां होगा खर्च!
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Updated: February 2, 2019, 6:08 PM IST
मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश कर दिया है. वित्त मंत्री ने बजट भाषण की शुरुआत में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई आंकड़ों का जिक्र किया. सरकार के खजाने में आने वाले हर एक रुपये में 70 पैसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के जरिये आएंगे. इसी तरह सरकार हर एक रुपये के व्यय में 23 पैसे राज्यों को करों एवं शुल्कों में उनके हिस्से के रूप में दिया जाएगा. वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश अंतरिम बजट 2019-20 के अनुसार सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत माल व सेवा कर (जीएसटी) होगा और हर एक रूप की प्राप्तियों में इसका योगदान 21 पैसे होगा. आज हम आपको '1 रुपये' से अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर दिखाते हैं.

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सरकार की कमाई- बजट दस्तावेज में दिए पाई-चार्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के राजस्व में सबसे बड़ा योगदान गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की वसूली से होता है. 1 रुपये का 21 पैसा यानी 21 फीसदी राजस्व वित्त वर्ष 2018-19 में जीएसटी से एकत्र हुआ है. वहीं, जीसटी जितनी 21 फीसदी कमाई सरकार को कॉरपोरेशन टैक्स या निगम कर से होती है. वहीं, चालू वित्त वर्ष के दौरान केंद्रीय खजाने में तीसरा सबसे बड़ा योगदान सरकार द्वारा दिए गए कर्ज और अन्य देनदारी से एकत्र होता है.



इसका योगदान 19 फीसदी है. सरकारी खजाने में चौथा अहम योगदान इनकम टैक्स से होता है. इनकम टैक्स से सरकार को कुल 17 फीसदी राजस्व मिल रहा है. ये भी पढ़ें-Budget 2019: टैक्स स्लैब में बदलाव को लेकर न हों कंफ्यूज़, 5 लाख की इनकम में छूट को ऐसे समझें



सरकार का खर्च- इसी आधार पर सरकार के खजाने से खर्च को देखें तो सरकार की कमाई के एक रुपये में सर्वाधिक 23 पैसे का खर्च यानी 23 फीसदी खर्च राज्यों को टैक्स और शुल्क में हिस्सा देने में जाता है. राज्यों के भुगतान के बाद केंद्र सरकार का दूसरा सबसे बड़ा खर्च सरकार द्वारा लिए गए कर्ज का ब्याज अदा करने में जाता है. कुल राजस्व का लगभग 18 फीसदी पैसा ब्याज अदा करने में खर्च किया जाता है.

इसके बाद केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं पर 12 फीसदी खर्च, देशभर में केन्द्र सरकार की चलने वाली योजनाओं पर 9 फीसदी राजस्व का खर्च और आर्थिक सहायता या सब्सिडी देने में अतिरिक्त 9 फीसदी का खर्च किया जाता है. इसके अलावा रक्षा क्षेत्र की जरुरतों के लिए 8 फीसदी और रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन देने में 5 फीसदी खर्च किया जाता है.
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