टैक्स में हुए बदलाव, बिजली के बिल पर भी भरना होगा टैक्स

विदेश यात्रा और बिजली के बिल पर भी आयकर रिटर्न भरना जरूरी होगा, भले ही आपकी इनकम 5 लाख या इससे कम हो.

News18Hindi
Updated: July 13, 2019, 1:26 PM IST
टैक्स में हुए बदलाव, बिजली के बिल पर भी भरना होगा टैक्स
विदेश यात्रा और बिजली के बिल पर भी आयकर रिटर्न
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Updated: July 13, 2019, 1:26 PM IST
आये दिन सरकार की नीतियों में तरह-तरह के बदलाव देखें जा रहे हैं. ऐसे में सरकार आपके बैंक खाते के साथ-साथ विदेश यात्रा और बिजली के बिल पर भी नजर रखने वाली है. यदि आपने विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं तो आपको आयकर रिटर्न भरना जरूरी होगा, भले ही आपकी इनकम 5 लाख या इससे कम हो. यदि आप एक साल में बिजली का बिल 1 लाख से अधिक भरते हैं या अपने अकाउंट में 1 करोड़ या उससे ज्यादा जमा करते हैं तो भी रिटर्न फाइल करना होगा.

नई बजट नीति के अनुसार कहां-कहां टैक्स भरना होगा



आम बजट 2019 में टैक्स की चोरी को रोकने के लिए बजट-2019 में एक वित्त विधेयक प्रस्तुत किया गया.  वित्त विधेयक(2)-2019 में आयकर अधिनियम की धारा-139 में कुछ संशोधन के प्रस्ताव हैं. इसके तहत कुछ मदों पर किसी भी शख्स के द्वारा एक निश्चित राशि से अधिक का लेनदेन करने पर आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी होगा.

कोई व्यक्ति खुद की या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर कुल 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करता है तो भी उसे इनकम टैक्स डिटेल देना जरूरी होगा.

अगर कोई व्यक्ति एक साल में किसी बैंकिंग कंपनी या सरकारी बैंक में एक या एक से अधिक करंट अकाउंट में कुल एक करोड़ रुपये या उससे अधिक पैसा जमा करता है तो उसे इनकम टैक्स डिटेल देना जरूरी होगा.

किसी का सालाना बिजली का बिल कुल 1 लाख रुपये से अधिक है तो भी उसे आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा.

इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा-54 के तहत लांगटर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट का दावा करने वालों को भी इनकम टैक्स डिटेल देना जरूरी होगा.
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कहां टैक्स भरना जरूरी नहीं

इस बजट में मकान, बांड जैसी संपत्तियों में इंवेस्टमेंट पर इनकम टैक्स में छूट मिल जाती है और इसके लिए उन्हें इनकम टैक्स डिटेल देना जरूरी नहीं होता है. यह सभी संशोधन 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी होंगे और एस्टिमेशन ईयर 2020-21 और उसके बाद के लिए लागू होंगे.

कैश ट्रांजैक्शन को कम करने के लिए

कैश के लेनदेन को कम करने के लिए आयकर अधिनियम में धारा-194 एन जोड़ने का प्रस्ताव है. इसके तहत बैंक या सहकारी बैंक या डाकघर के खातों से 1 साल में 1 करोड़ से ज्यादा निकालने पर 2 फीसदी की दर से कटौती (टीडीएस) काटने की सिफारिश की गई है.

यह प्रावधान सरकार, बैंकिंग कंपनी, बैंकिंग में लगी सहकारी समिति, पोस्ट ऑफिस, बैंकिंग प्रतिनिधि और व्हाइट लेबल एटीएम परिचालन करने वाली इकाइयों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि इस व्यवसाय में उन्हें भारी मात्रा में कैश का इस्तेमाल करना होता है.

बजट दस्तावेजों के अनुसार सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श कर ऐसी दूसरी फर्मों/व्यक्तियों को भी धारा-194एन के तहत लगने वाले प्रस्तावित टीडीएस से छूट दे सकती है. यह संशोधन एक सितंबर 2019 से प्रभावी करने का प्रस्ताव है.
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