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1 फरवरी 2020 को पेश हो सकता है आम बजट, इनकम टैक्स में कटौती का ऐलान संभव

News18Hindi
Updated: December 13, 2019, 3:42 PM IST
1 फरवरी 2020 को पेश हो सकता है आम बजट, इनकम टैक्स में कटौती का ऐलान संभव
मोदी सरकार (Modi Government) के दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट (Budget 2020) 1 फरवरी 2020 को पेश हो सकता है.

मोदी सरकार (Modi Government) के दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट (Budget 2020) 1 फरवरी, 2020 को पेश होगा. बजट सेशन (Budget Session) की तैयारी जोरों से शुरू हो चुकी हैं. माना जा रहा है कि बजट में इनकम टैक्स में कटौती का ऐलान हो सकता है.

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  • Last Updated: December 13, 2019, 3:42 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) के दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट (Budget 2020) 1 फरवरी 2020 को पेश हो सकता है. इस बजट सेशन (Budget Session) की तैयारी जोरों से शुरू हो चुकी है. इस बजट से सभी को काफी उम्मीदें हैं. लेकिन, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की इकोनॉ‍मिक ग्रोथ को पटरी पर लाना है. हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने एक कार्यक्रम में कहा था कि आर्थिक गतिविधि में तेजी लाने के लिए सरकार की तरफ से तमाम कोशिशें की जा रही हैं. इनकम टैक्स रेट को लेकर उन्होंने कहा था कि इसमें भी सुधार की गुंजाइश है. सरकार टैक्स रेट घटाने पर विचार कर रही है. खासकर कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के बाद से इसकी मांग और तेज हो गई है. बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह दूसरा बजट होगा.

1 फरवरी 2020 को पेश होगा आम बजट- संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि आम बजट अगले साल 1 फरवरी 2020 को पेश हो सकता है.



टैक्सपेयर्स को मिल सकती है बड़ी राहत- वित्त मंत्री ने हिंदुस्तान टाइम्स लीटरशीप समिट में कहा था कि सरकार कई चीजों पर विचार कर रही है. इनकम टैक्स में कटौती करना भी इन्हीं में से एक हो सकता है.>>  जब उनसे पूछा गया कि कितनी जल्दी आम लोगों को इनकम टैक्स में कटौती का तोहफा मिल सकता है तो उन्होंने कहा कि बजट तक का इंतजार करिए. आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2021 के लिए फरवरी 2020 में केंद्रीय बजट पेश किया जाना है.

>>  केंद्र सरकार ने सितंबर में कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का फैसला लिया था, जिसका सरकार के खजाने पर करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये का असर पड़ा था. भारतीय रिजर्व बैंक ने ​पिछले हफ्ते हुई मौद्रिक नीति की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया था.

मोदी सरकार ने बजट को लेकर बदल दी 92 साल पुरानी प्रथा- मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तत्‍कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 92 साल पुरानी प्रथा को खत्म कर दिया था. साल 2017 से रेलवे बजट की घोषणाएं भी आम बजट में ही वित्त मंत्री करने लगे. इससे पहले रेल मंत्री आम बजट से एक दिन पहले रेलवे बजट संसद में पेश करते थे.

>> आम बजट में रेलवे बजट को मर्ज करने के साथ ही जेटली ने बजट पेश करने की तारीख भी बदल दी. बजट अब करीब एक महीना पहले 1 फरवरी को पेश होने लगा है. साथ ही इकॉनमिक सर्वे भी 31 जनवरी को आने की शुरुआत हो गई.

>> अलग रेलवे बजट की प्रथा 1924 में ब्रिटिश शासन में शुरू की गई थी, क्योंकि सरकार के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) रेलवे द्वारा अर्जित राजस्व पर निर्भर रहता था. उस समय रेलवे से प्राप्त राजस्व अनुपातिक रूप से बहुत अधिक था. रेलवे का बजट कुल केंद्रीय बजट के 80 फीसदी से अधिक होता था.

>> नीति आयोग ने भी सरकार को दशकों पुराने इस चलन को खत्म करने की सलाह दी थी. काफी विचार-विमर्श और अलग-अलग अथॉरिटीज के साथ मंथन के बाद सरकार ने रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने का फैसला किया.

>> यह विचार व्यावहारिक था क्योंकि यूनियन बजट की तुलना में अब रेलवे बजट का हिस्सा बहुत कम है. तत्‍कालीन वित्त मंत्री जेटली ने 2017 में केंद्रीय और रेलवे बजट को एक साथ पेश किया.

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First published: December 13, 2019, 2:40 PM IST
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