Union Budget 2021: अगर FM निर्मला सीतारमण ने लगाया कोरोना सेस तो जानें कैसे पड़ेगा आपकी टैक्‍स देनदारी पर असर

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2021 में कोरोना सेस पेश कर सकती हैं.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2021 में कोरोना सेस पेश कर सकती हैं.

केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने पहले कार्यकाल के दौरान बजट 2018 (Budget 2018) में 4 फीसदी हेल्‍थ और एजुकेशन सेस (Health & Education Cess) लागू किया था. इससे पहले 2 फीसदी एजुकेशन और 1 फीसदी सीनियर सेकेंडरी एजुकेशन को मिलाकर कुल 3 फीसदी सेस लागू था. आइए जानते हैं कि अगर इस बार केंद्र ने कोरोना वायरस सेस लागू किया तो आपकी टैक्‍स देनदारी (Tax Liability) कैसे बढ़ेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:13 AM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2021 की सुबह 11 बजे संसद में बजट 2021-22 (Budget 2021) पेश करेंगी. माना जा रहा है कि कोरोना संकट (Coronavirus Crisis) के कारण इस बार का बजट काफी खास होगा. वहीं, ये भी चर्चा जोरों पर है कि केंद्र सरकार वैश्विक महामारी (Pandemic) से निपटने के लिए किए जाने वाले अतिरिक्‍त खर्च (Additional Expenditure) पूरे करने के लिए फंड की व्‍यवस्‍था करने को कोविड-19 से जुड़ा अधिभार यानी सेस (CESS) लागू कर सकती है. अगर ऐसा हुआ तो टैक्‍सपेयर्स (Taxpayers) की देनदारी में बढ़ोतरी हो जाएगी. आइए समझते हैं कि सेस क्‍या है और इससे कर देनदारी (Tax Liability) पर कैसे असर पड़ेगा.

बजट 2018 में पेश किया गया था हेल्‍थ और एजुकेशन सेस

केंद्र सरकार इस समय व्‍यक्तिगत करदाताओं (Individual Taxpayer) की प्रत्‍यक्ष कर देनदारी (Direct Tax Liability) पर 4 फीसदी हेल्‍थ और एजुकेशन सेस (Health & Education Cess) वसूलती है. पूर्व केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने इन दोनों सेस को केंद्रीय बजट 2018 में पेश किया था. इससे पहले तक कुल 3 फीसदी सेस वसूला जाता था. इसमें 2 फीसदी एजुकेशन (Education Cess) और 1 फीसदी सीनियर सेकेंडरी एजुकेशन सेस (Senior Secondary Education Cess) शामिल था.

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सेस में हुई 1% वृद्धि तो कितनी बढ़ेगी टैक्‍स लायबिलिटी

वित्‍त मंत्री सीतारमण बजट 2021 में कोरोना सेस की घोषणा करें, उससे पहले आइए समझते हैं कि कैसे ये आपकी टैक्‍स लायबिलिटी पर असर डाल सकता है. अगर किसी व्‍यक्तिगत करदाता की कर देनदारी 50 हजार रुपये होती है और उस पर 4 फीसदी सेस लगा दिया जाए तो उसकी कुल टैक्‍स लायबिलिटी 52,000 रुपये हो जाएगी. आसान शब्‍दों में समझें तो अगर पहले आपकी कर देनदारी 50 हजार रुपये थी तो 4 फीसदी सेस लगने के बाद आपको 2,000 रुपये अतिरिक्‍त भुगतान करना होगा. अब अगर बजट 2021 में 1 फीसदी कोरोना सेस लागू कर दिया गया तो आपकी टैक्‍स लायबिलिटी 52,500 रुपये हो जाएगी.

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खास काम के लिए फंड इकट्ठा करने को लगता है सेस

सेस को किसी खास मकसद (Special Purpose) के लिए फंड इकट्ठा करने को वसूला जाता है. उदाहरण के तौर पर हेल्‍थ और एजुकेशन सेस को ग्रामीण भारत (Rural India) की स्‍वास्‍थ्‍य व शिक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए फंड इकट्ठा करने को वसूला जाता है. ऐसे में किसी खास जरूरत को पूरा करने के लिए इकट्ठा किए गए सेस का इस्‍तेमाल किसी दूसरे काम के लिए नहीं किया जा सकता है. बता दें कि सेस आपकी कुल टैक्‍स लायबिलिटी पर लागू होता है. उदाहरण के तौर पर अगर सभी तरह की टैक्‍स छूट के बाद अगर किसी व्‍यक्ति की कर देनदारी 50,000 रुपये होती है तो 4 फीसदी सेस इसी रकम पर वसूला जाता है.
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