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Budget 2021: कम हो सोने पर कस्टम ड्यूटी, कैश पेमेंट के जरिए खरीदारी की लिमिट बढ़े- ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग

फिलहाल सोने के आयात पर 12.5 फीसदी आयात शुल्क लगता है.
फिलहाल सोने के आयात पर 12.5 फीसदी आयात शुल्क लगता है.

Union Budget 2021-22: जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री ने ​बजट सिफारिशों में सरकार से कस्टम ड्यूटी घटाने की मांग की है. कैश पेमेंट के जरिए ज्वेलरी खरीदारी की लिमिट को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की भी मांग है. देश के कुल निर्यात में इस इंडस्ट्री की 14 फीसदी भागीदारी है और करीब 60 लाख लोग इस सेक्टर में काम करते हैं.

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नई दिल्ली. बजट 2021-22 के लिए जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री ने सरकार से गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी (Custom Duty on Gold) को कम करने की मांग की है. इंडस्ट्रीज की मांग है कि सोने के आयात पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी को घटाकर 4 फीसदी पर लाया जाए. वर्तमान में यह 12.5 फीसदी है. इसके अलावा टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) से छूट और पॉलिश्ड प्रिशियस व सेमी प्रिशियस जेमस्टोन पर इम्पोर्ट ड्यूटी को भी कम करने की मांग है. इंडस्ट्री की इस मांग के बारे में जानकारी देते हुए ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन आशीष पेठे ने कहा कि हमने सरकार से कस्टम ड्यूटी घटाकर 4 फीसदी पर लाने की मांग है.

पेठे ने कहा ​कि अगर कस्टम ड्यूटी को इस स्तर पर नहीं लाया जाता है तो सोने की तस्करी बढ़ेगी और असंगठित कारोबार के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा. जेम्स एंड जवेलरी इंडस्ट्री ने सरकार से यह भी मांग की है कि हार्मोनाइज्ड सिस्टम नॉमेनक्लेचर (HSN-71) के तहत आने वाले सामान को TCS के दायरे से बाहर रखा जाए. इसके पीछे उनका तर्क है कि TCS में ब्लॉक होने वाली रकम इनकम टैक्स जमा करने की पात्रता से 6.7 गुना ज्यादा होती है और इससे फंड ब्लॉक हो जाता है. उन्होंने आगे कहा कि जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर में भी ईएमआई सुविधा को लाया जाना चाहिए और कैश पेमेंट की मौजूदा 10,000 रुपये की लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाना चाहिए.

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क्या है GJEPC की मांग
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन कोलिन शाह ने मांग की है कि कट, पॉलिश्ड प्रिशियस व सेमी प्रिशियस जेमस्टोन पर इम्पोर्ट ड्यूटी को घटाया जाए. फिलहाल यह 7.5 फीसदी पर है, जिसे घटाकर 2.5 फीसदी करने की मांग है. जीजेईपीसी ने बजट के लिए अपनी सिफारिशों में सिंथेटिक कट व पॉलिश्ड स्टोन्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 5 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने की मांग की है.

ज्वेलरी के रिटेल ट्रेड में MRP प्राइसिंग की मांग
मालाबार ग्रुप के चेयरमैन एमपी अहमद ने बजट को लेकर सरकार से अपील की है कि सोने पर आयात शुल्क और जीएसटी को मिलाकर कुल टैक्स 7 फीसदी कर दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ज्वेलरी रिटेल ट्रेड के मामले में ज्वेलरी की MRP प्राइसिंग लाना चाहिए. इसमें जीएसटी या किसी दूसरे टैक्स के संदर्भ में कोई प्राइसिंग ब्रेकअप न हो. फिलहाल गोल्ड पर 12.5 फीसदी इम्पोर्ट ड्यूटी और 3 फीसदी जीएसटी लगता है. इस प्रकार दोनों को मिलाकर कुल टैक्स 15.5 फीसदी है. अगर इसमें माइनिंग रॉयल्टीज को जोड़ दिया जाए तो यह करीब 20 फीसदी हो जाता है. इतने ज्यादा टैक्स लगाने से तस्करी और चोरी के मामले बढ़ सकते हैं.

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सोना व हीरा कारोबार अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर
बता दें कि देश की कुल जीडीपी में सोने व हीरे के कारोबार की कुल हिस्सेदारी करीब 7.5 फीसदी है. देश के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 14 फीसदी है. इस सेक्टर में करीब 60 लाख लोग काम करते हैं. अहमद का कहना है कि सरकार को इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सिफारिशों को मानना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में यह सेक्टर अपनी भूमिका निभा सके.
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