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Insurance Tips: बिल्डर या सोसायटी ने अपार्टमेंट का कराया है बीमा तो होम लोन के लिए जरूरी नहीं इंश्योरेंस

यदि आपके फ्लेट वाले अपार्टमेंट का बीमा नहीं हुआ है तो रेसीडेंसियल सोसाइटी प्रबंधन से इसे खरीदने के लिए कहें या स्वयं खरीद सकते हैं.

यदि आपके फ्लेट वाले अपार्टमेंट का बीमा नहीं हुआ है तो रेसीडेंसियल सोसाइटी प्रबंधन से इसे खरीदने के लिए कहें या स्वयं खरीद सकते हैं.

Insurance Tips: चोरी जैसी घटनाओं की वजह से यदि घर और उसमें रखें सामान का बीमा कराया जाए तो आप अपना वित्तीय नुकसान कम कर सकते हैं.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. होम लोन (Home Loan) लेने के लिए बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां होम इंश्यारेंस (Home Insurance) की शर्त रखती हैं. प्राकृतिक आपदाओं की वजह से यह बेहद जरूरी भी है, लेकिन यदि बिल्डर (Builder) या कॉलोनाइजर ने भी फाइनेंस के लिए पूरे अपार्टमेंट का बीमा कराया है तो आप  होम इंश्योरेंस कराने से बच सकते हैं.

    होम इंश्योरेंस कई तरह का होता है. लिहाजा, सबसे पहले बिल्डर की पॉलिसी चेक करें. यदि उसमें पूरे स्ट्रक्चर और आपकी लोन अवधि तक का कवर है तो ही इस विकल्प पर विचार करें. हालांकि, बीमा सलाहकार (Insurance Consultant) अनिल वरदिया बताते हैं कि चोरी जैसी घटनाओं की वजह से यदि घर और उसमें रखें सामान का बीमा कराया जाए तो आप वित्तीय नुकसान कम कर सकते हैं.

    बिल्डर तो सिर्फ अपने लोन के लिए स्ट्रक्चर का बीमा कराता है. इसलिए हो सकता है कि उसमें कई चीजें कवर नहीं हो. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय बाजार में तीन तरह की आवास बीमा पॉलिसियां (insurance policies) उपलब्ध हैं. इनमें पहली है इमारत/घर की बीमा पॉलिसी, दूसरी घर में रखे सामान की बीमा पॉलिसी और तीसरी समग्र बीमा पॉलिसी यानी घर एवं घर में रखे सामान दोनों का ही बीमा है.

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    वेलफेयर सोसायटी भी करती हैं पूरी कॉलोनी का बीमा
    पहली तरह की पॉलिसी में इमारत का ढांचा का बीमा किया जाता है. इसमें आग, विस्फोट, आकाशीय बिजली, आंधी और बाढ़ से नुकसान होने पर क्षति-पूर्ति की जाती है. आजकल कई आवासीय या वेलफेयर सोसाइटी ऐसी बीमा पॉलिसी खरीदकर रखरखाव शुल्क (मेन्टेनेंस चार्ज) के जरिए वहां रहने वाले लोगों से प्रीमियम लेती हैं. बजाज अलायंज जनरल इंश्यारेंस के प्रवक्ता ने बताया कि जिस इमारत में आपका घर है उसका बीमा हुआ है. अगर बीमा नहीं हुआ है तो सोसाइटी प्रबंधन से इसे खरीदने के लिए कहें या स्वयं खरीदें. इस पॉलिसी में मुख्य रूप से मकान या इमारत बनाने पर आने वाला खर्च शामिल होता है.

    आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फर्नीचर, पेन्टिंग्स सभी का होता है बीमा
    दूसरी तरह की बीमा पॉलिसी में घर में रखी मूल्यवान वस्तुओं जैसे आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फर्नीचर, पेन्टिंग्स आदि की चोरी या इन्हें होने वाले नुकसान से सुरक्षा का प्रावधान है. मकान मालिक और किराएदार दोनों ही यह बीमा पॉलिसी खरीद सकते हैं. बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस में मुख्य तकनीकी अधिकारी टी ए रामलिंगम कहते हैं, इन दिनों घर में मौजूद सामान की कीमत घर की कीमत से भी अधिक होती है.

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    घर की निर्माण लागत से लेकर हर सामान का बीमा

    रामलिंगम कहते हैं कि हम अक्सर देखते हैं कि बाढ़ के दौरान पानी घर के अंदर घुस जाता है और सामान के साथ ही इमारत को भी नुकसान पहुंचा देता है. या फिर घर से मूल्यवान वस्तुओं की चोरी हो जाती है. इस स्थिति को देखते हुए समग्र बीमा पॉलिसियों में घर और इसमें रखी वस्तुओं दोनों को हुए नुकसान की भरपाई होती है. अपनी जरूरतों के हिसाब से पॉलिसी तैयार करने के लिए आप अस्थायी पुनर्वास बीमा, किराए का नुकसान, चाबी एवं ताला बदलने आदि के लिए एड-ऑन पॉलिसियां ले सकते हैं.

    आईआरडीए की भारत गृह रक्षा पॉलिसी भी अच्छा विकल्प
    बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) द्वारा तय बीमा प्रावधानों के तहत मानक घर बीमा पॉलिसी ‘भारत गृह रक्षा’ खरीदने के विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं. कुछ मानक खूबियों की वजह से इस पॉलिसी की खरीदारी बेहिचक कर सकते हैं. इस पॉलिसी में इमारत एवं सामान दोनों की सुरक्षा होती है. इस पॉलिसी में आपकी बीमा कंपनी इस बात की पड़ताल नहीं करेगी कि बीमित रकम बीमित वस्तुओं के मूल्य के बराबर है या नहीं. यह आपको पहले से तय बीमित रकम आवंटित करेगी.

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