घर बनाना पहले से हुआ महंगा! यहां देखिए कितनी बढ़ी महंगाई, जानिए इसकी बड़ी वजह

कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में महंगाई बढ़ी.

कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में महंगाई बढ़ी.

कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर (Construction sector) में न्‍यूनतम मजदूरी में 15-20 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस सेक्‍टर में करीब 5 करोड़ लोग काम करते हैं. महामारी से पहले की तुलना में मजदूरी (wage) 450-500 रुपये से बढ़कर 550-600 रुपये प्रति दिन हो गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 19, 2020, 2:39 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में महंगाई बढ़ गई है. अब घर बनाना पहले के मुकाबले ज्यादा महंगा हो गया है. यदि आप इस समय घर बनाने की सोच रहे है. तो आपको थोड़ा इंतजार करना चाहिए. क्योंकि इस समय मजदूरों की कमी की वजह से दिहाड़ी मजदूरी बढ़ गई है. ऐसे में यदि आप इस समय घर बनवाते है. तो आपको पहले के मुकाबले ज्यादा मजदूरी देनी पड़ सकती है. आइए जानते है पहले के मुकाबले इस समय कितनी मजदूरी बढ़ी है और इस वजह से घर बनाना पहले से कितने प्रतिशत महंगा हुआ हैं. 

इतने प्रतिशत बढ़ी मजदूरी- कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में न्‍यूनतम मजदूरी में 15-20 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस सेक्‍टर में करीब 5 करोड़ लोग काम करते हैं. मानव संसाधन प्रबंधन फर्म बेटरप्‍लेस के अनुमान के अनुसार, महामारी से पहले की तुलना में मजदूरी 450-500 रुपये से बढ़कर 550-600 रुपये प्रति दिन हो गई है. वहीं, मजदूरों की उपलब्‍धता 70-75 फीसदी घटी है.

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मजदूरों की कमी की एक बड़ी वहज यह भी- कोरोना महामारी की वजह से ज्यादातर मजदूर अपने घरों की ओर लौट गए. वहीं जो मजदूर शहरों में बचे भी है तो उनमें से ज्यादातर लोग रियल एस्टेट कंपनी और हाईवे के निर्माण में लगे हुए है. क्योंकि इन जगह पर मजदूरों को लंबे समय के लिए काम मिलता है. ऐसे में मजदूरों की कमी की वजह से न्यूनतम मजदूरी बढ़ी हैं.
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कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मिलता है सबसे ज्यादा रोजगार- दिहाड़ी मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मिलता है. क्योंकि ये सेक्टर पूरी तह से असंगठित है. ऐसे में यहां सबसे ज्यादा ठेका प्रथा भी चलती है. जिसके चलते बड़ी संख्या में ठेकेदार मजदूरों की सप्लाई भी इसी सेक्टर में करते हैं. वहीं बेटरप्लेस के सीओओ सौरभ टंडन ने बताया कि लॉकडाउन के बाद मजदूरों की कमी से मजदूरी बढ़ी हैं.
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