CAIT हालात पर चिंतित! एक फैसले से कारोबारियों को लगा 25 हजार करोड़ रुपये का झटका, जानिए कैसे

होली त्योहार पर एक बार फिर कोरोना का कहर मंडरा रहा है.

होली त्योहार पर एक बार फिर कोरोना का कहर मंडरा रहा है.

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने बताया कि होली पर देशभर में 25 हजार करोड़ और अकेले दिल्ली में 1500 करोड़ रुपये का व्यापार होता है. होली पर जब कोई सामाजिक कार्यक्रम ही नहींं होगा तो लोग घरों में रहना पसंद करेंगे. यही कारण है कि होली के एक हफ्ते पहले होने वाली खरीदारी में गिरावट आई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 5:37 PM IST
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नई दिल्ली. रंगों का त्योहार होली (Holi) इस साल भी व्यापारियों के लिए बेरंग साबित होने वाला है. कोरोना (Corona) की शुरुआत ने ही देशभर के कारोबारियों को 25 हजार करोड़ रुपये का झटका दे दिया है. बीते साल कोरोना और लॉकडाउन (Lockdown) से पीड़ित कारोबार जगत इस होली पर बड़ी राहत की उम्मीद कर रहा था, लेकिन बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ने वाली भीड़ से पहले ही कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है. एक बार फिर दुकान और गोदामों में होली के सामान का स्टाक रखा रह गया है. कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताई है.

चीनी बहिष्कार के चलते भारतीय सामान का है स्टाक

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि होली से ही साल के बड़े त्योहार की शुरुआत होती है. इस त्योहार पर लोग जमकर खरीदारी करते हैं. हर साल चीन से होली पर करीब 10 हज़ार करोड़ का सामान होली के रंग और खिलौनों के रूप में इंपोर्ट किया जाता था. पिछले साल कैट के दीवाली पर चाइनीज़ समान के बहिष्कार के आह्वान को देशभर में भारी समर्थन मिला था.

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यह अभियान अभी जारी है, जिसके चलते व्यापारियों ने होली पर बिकने वाले भारतीय सामान की थोक में खरीदारी शुरू कर दी थी. अब दिल्ली सरकार समेत सभी राज्यो में होली पर जारी किए गए निर्देशों के बाद देशभर के व्यापारी बेहद परेशान हैं. होली के सामान का व्यापार करने वालोंं के यहां स्टॉक का बड़ा अम्बार लग गया है, जिसका निपटारा फ़िलहाल कोविड के बढ़ते प्रकोप के कारण बेहद मुश्किल है.

होली के 40 हजार आयोजनों पर लटकी तलवार

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि होली पर सामूहिक सभाओं, होली मिलन समारोह और गली नुक्कड़ों पर इक्कठा होकर जश्न मनाने का रिवाज सदियों से चला आ रहा है. ऐसे कार्यक्रमों से भी खासकर छोटे व्यापारियों को आर्थिक मुनाफा होता है, जिस पर अब रोक लगा दी गई है. अकेले दिल्ली में ही होली के मौके पर करीब 3 हजार छोटे-बड़े आयोजन किये जाते रहे हैं. देशभर में इस तरह के समारोह की संख्या करीब 40 हज़ार के आसपास होती है, लेकिन अब न तो होली का हुल्लड़ होगा न ही रंगों की मस्ती.



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यही वो आयोजन हैं, जिनसे देशभर में 25 हजार करोड़ और अकेले दिल्ली में लगभग 1500 करोड़ का व्यापार होता है. होली पर जब कोई सामाजिक कार्यक्रम ही नहींं होगा तो लोग घरों में ही रहना पसंद करेंगे. यही कारण है कि होली के एक हफ्ते पहले होने वाली खरीदारी में गिरावट आई है. बाज़ार सुनसान पड़े हैं. इस साल रंग, गुलाल और होली के खिलौनों की खरीद फरोख्त में तो दुकानदारो को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. मिठाई, नमकीन, हर्बल गुलाल, फूल और पूजा की सामग्री की खरीदारी होने की उम्मीद भी न के बराबर है.
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